भारतीय रेलवे में आपने अलग-अलग रंग के इंजनों को देखा होगा। रेलवे द्वारा इंजनों को लाल, हरा, पीला, नीला और सफेद रंग विजुल पहचान और ब्रांडिंग के लिए दिया जाता है। ये रंग सिर्फ इंजनों को आकर्षक बनाने के लिए नहीं होता है, बल्कि इससे इंजन की क्षमता, निर्माण और उपयोग के बारे में जानकारी मिलती है। यही वजह है कि डीजल इंजनों का रंग अलग तय किया गया है, जबकि इलेक्ट्रिक और मेंटेनेंस इंजनों का रंग अलग होता है। इस लेख में हम विस्तार से जानेंगे।
लाल और क्रीम रंग वाले इंजन
रेलवे में WDM-2 और WDM-3A जैसे इंजनों को यह रंग दिया गया है। यह रेलवे का सबसे क्लासिक कलर माना जाता है, जो कि वर्षों से रेलवे द्वारा इस्तेमाल किया जा रहा है। ये इंजन पैसेंजर और मालगाड़ी, दोनों गाड़ियों को खींचने के लिए इस्तेमाल किये जाते हैं।
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सफेद रंग वाले इंजन
सफेद रंग वाले इंजन अमूमन इलेक्ट्रिक इंजन होते हैं, जिनकी पहचान WAP-7 और WAP-9 जैसे इंजनों के रूप में होती है। ये इंजन पूरी तरह सफेद होते हैं और इन पर काली रंग की पट्टी होती है। इन इंजनों का इस्तेमाल हमेशा पैसेंजर ट्रेनों को खींचने के लिए किया जाता है। राजधानी एक्सप्रेस जैसी ट्रेनों में WAP-7 जैसे शक्तिशाली इंजनों का इस्तेमाल होता है।
लाल रंग वाले इंजन
लाल रंग वाले इंजनों का इस्तेमाल सुपरफास्ट और एक्सप्रेस ट्रेनों के लिए किया जाता है। यह इलेक्ट्रिक इंजन ही होते हैं।
हरा इंजन
रेलवे में हरा रंग का इंजन WAG-9 होता है, जो कि मुख्य रूप से मालगाड़ी ट्रेनों में इस्तेमाल किया जाता है। यह पर्यावरणीय संदेश देने के लिए भी उपयोग होता है।
पीला रंग का इंजन
रेलवे में पीले रंग का इंजन मुख्य रूप से मेंटेनेंस इंजनों के लिए होता है। इस प्रकार के इंजनों का इस्तेमाल ट्रेक की मरम्मत, निरीक्षण और शंटिंग के लिए किया जाता है। यह बिजली से चलने वाला इंजन होता है। वहीं, कुछ पीले रंग के डीजल इंजन हैं, जिनका उपयोग शंटिंग के लिए होता है।
नीले रंग का इंजन
रेलवे में नीले रंग के इंजन का उपयोग सुपरफास्ट और एक्सप्रेस ट्रेनों के लिए होता है। कई बार इनका उपयोग मेल गाड़ियों के लिए भी किया जाता है। आपको बता दें कि रेलवे का सबसे शक्तिशाली इंजन WAG-12B भी नीले रंग का इंजन है, जो कि दो इंजनों से मिलकर बना है। इस इंजन का उपयोग बड़ी मालगाड़ियों को खींचने के लिए किया जाता है। यह रेलवे का सबसे आधुनिक इंजन है।
