बिहार को बुद्ध की धरती भी कहा जाता है। यह राज्य अपने समृद्ध इतिहास और सांस्कृतिक विरासत के लिए जाना जाता है। राज्य में विभिन्न नदियों का प्रवाह होता है, जो कि अलग-अलग जिलों से गुजरती हैं। इस कड़ी में यहां एक जिला ऐसा भी है, जिसे ‘नदियों का मायका’ या फिर ‘सात नदियों की भूमि’ भी कहा जाता है। यह जिला पूरी तरह नदियों से घिरा हुआ है, जिससे इसे विशेष पहचान मिलती है। इस लेख में हम इस जिले के बारे में विस्तार से जानेंगे।
किस जिले को कहा जाता है ‘नदियों का मायका’
अब हम यह जान लेते हैं कि किस जिले को ‘नदियों का मायका’ कहा जाता है। आपको बता दें कि बिहार के खगड़िया जिले को अपनी भौगोलिक स्थिति के कारण ‘नदियों का मायका’ या ‘सात नदियों की भूमि’ कहा जाता है।
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क्यों कहा जाता है ‘नदियों का मायका’
खगड़िया जिले में 7 बड़ी और उनकी सहायक नदियों का संगम होता है। यह बिहार का इकलौता जिला है, जहां इतनी संख्या में नदियां मौजूद हैं, जो कि इस प्रकार हैंः
गंगा- गंगा नदी खगड़िया में दक्षिणी सीमा बनाती है।
बूढ़ी गंडक- यह नदी जिले के बीचों-बीच से होकर गुजरती है।
कोसी नदी- यह नदी जिले में उत्तर और पूर्व दिशा में बहती है।
बागमती नदी- यह नदी पश्चिमी और मध्य भाग में बहती है।
कमला नदी-यह नदी बागमती और कोसी की सहायक नदी के रूप में जानी जाती है, जो कि जिले में बहती है।
करहा- यह नदी सहायक नदी प्रणाली का हिस्सा है।
काली कोसी-यह नदी कोसी नदी की मुख्य धारा में शामिल है।
इन नदियों की वजह से जिले में अलग-अलग द्वीप बनते हैं।
नदियों से उपजाऊ हुई मिट्टी
जिले में 7 नदियां होने की वजह से यहां की मिट्टी बहुत ही उपजाऊ है। क्योंकि, हर साल नदियां अपने साथ बहाकर मिट्टी लाती है, जिससे यहां की जमीन अधिक उपजाऊ बन गई है। जिले में मक्का, गेहूं, केला और धान व आम की फसल होती है। खगड़िया जिले का मक्का बिहार समेत अन्य राज्यों में बेचा जाता है।
जिले में रहता है बाढ़ का खतरा
जिले में अधिक नदियां होने की वजह से यहां बाढ़ का खतरा बना रहता है। मानसून में यहां कोसी और बागमती नदियां उफान पर आ जाती हैं, जिस वजह से यहां बाढ़ की स्थिति बनती है।
