इतिहास के पन्नों में राष्ट्रकूट राजवंश का नाम शक्तिशाली और गौरवशाली साम्राज्य के रूप में दर्ज है। राष्ट्रकूटों ने भारत में छठी से लेकर 10वीं शताब्दी तक दक्षिण, मध्य और उत्तर भारत के एक बड़े हिस्से पर शासन किया था। आज के समय में कर्नाटक के गुलबर्गा के पास मौजूद मान्यखेट कभी राष्ट्रकूटों की राजधानी रही थी। भारत की प्रसिद्ध गुफाएं भी राष्ट्रकूटों की ही देन हैं, जो कि आज विश्व धरोहर स्थल के रूप में जानी जाती हैं।
किसने की थी साम्राज्य की स्थापना
राष्ट्रकूट साम्राज्य की स्थापना 753 ईस्वी में चालुक्य राजा कीर्तिवर्मन द्वितीय को हराकर दन्तिदुर्ग द्वारा की गई थी। राष्ट्रकूट राजाओं को महान योद्धाओं के साथ-साथ कला, साहित्य और रॉक-कट आर्किटेक्चर के लिए भी जाना जाता है। उनके शासन में मूर्तिकला और वास्तुकला अपने चरम पर था।
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राष्ट्रकूटों द्वारा बनाई गई प्रमुख इमारतें
राष्ट्रकूटों ने भारत में कई प्रसिद्ध इमारत और स्मारकों का निर्माण किया था, जो कि आज विश्व धरोहरों में शामिल हैं।
कैलाश मंदिर-एलोरा
महाराष्ट्र के छत्रपति संभाजीनगर में स्थित यह मंदिर अपनी वास्तुकला के लिए जाना जाता है। इस मंदिर का निर्माण 8वीं शताब्दी में राष्ट्रकूट राजा कृष्ण प्रथम-1 द्वारा करवाया गया था। मंदिर को लेकर खास बात यह है कि इस मंदिर को ईंट या फिर पत्थरों को जोड़कर नहीं बनाया गया है, बल्कि एक बड़ी पहाड़ी को ऊपर से नीचे की तरफ काटकर दो मंजिला मंदिर का निर्माण हुआ है। मंदिर के आधार पर हाथियों की कतार देखने को मिलती है, जिससे देखने पर लगता है कि मंदिर हाथियों की पीठ पर बना हुआ है।
एलिफेंटा की गुफाएं
ये गुफाएं मुंबई के पास हैं, जिन्हें बनाने का श्रेय राष्ट्रकूट राजाओं को जाता है। राष्ट्रकूटों द्वारा मंदिर में भगवान शिव को समर्पित कई मूर्तियों का निर्माण करवाया गया है।
एलोरा की जैन गुफाएं
राष्ट्रकूट शासक शैव और वैष्णव धर्म के साथ जैन धर्म के भी संरक्षक थे। राजा अमोघवर्ष प्रथम ने जैन धर्म को अपनाया था। उनके काल में ही एलोरा में प्रसिद्ध जैन गुफाओं का निर्माण किया गया था। इसके प्रमाण गुफा संख्या 30 से 34 तक में देखे जा सकते हैं। इनमें गुफा संख्या 32 में एक दो मंजिला जैन गुफा है, जो कि अपनी बारीक नक्काशी, सुंदर खंभों और भगवान महावीर और पार्श्वनाथ की मूर्तियों के लिए जानी जाती है।
उतर-दक्षिण भारत के बीच बनाया सांस्कृतिक पुल
राष्ट्रकूट राजाओं ने उत्तर और दक्षिण भारत के बीच सांस्कृतिक पुल बनाने का भी काम किया। एलोरा में पत्थरों को तराशकर बनाई गई उनकी इमारतों को देखने के लिए आज पूरी दुनिया के लोग आते हैं। इसके साथ ही उनके द्वारा बनाई गई इमारतें आज भी इतिहासकारों को हैरान कर देती है कि उस दौर में बिना किसी मशीन के सिर्फ छैनी और हथौड़े की मदद से राष्ट्रकूट वंश ने विश्व धरोहरों का निर्माण किया।
