हरियाणा का जींद जिला रेलवे के इतिहास में हमेशा-हमेशा के लिए दर्ज हो गया है। क्योंकि, हाल ही में इस जिले से देश को पहली हाइड्रोजन ट्रेन मिली है। हालांकि, क्या आप जानते हैं कि जींद जिले को ‘हरियाणा का दिल’ भी कहा जाता है? इसके पीछे पौराणिक, भौगोलिक और सांस्कृति कारण छिपा हुआ है। इस लेख में जींद जिले के इतिहास, संस्कृति और पौराणिक महत्त्व के बारे में विस्तार से जानेंगे।
जींद जिले का इतिहास
जिले जिले में सिंधु घाटी सभ्यता के कई अवशेष मिले हैं। हालांकि, आधुनिक जींद की स्थापना 1763 में राजा गजपत सिंह ने की थी। उन्होंने 1776 में इस शहर को अपनी राजधानी बनाकर यहां एक मजबूत किले का निर्माण करवाया। किले में रहकर उनके कई वंशजों ने राज किया और इसके आस-पास एक बड़ा शहर बसता चला गया। जब हरियाणा पंजाब से अलग हुआ, तो इस जींद को जिले का दर्जा मिला।
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क्यों कहा जाता है ‘हरियाणा का दिल’
जींद जिले को ‘हरियाणा का दिल’ कहने के पीछे सांस्कृतिक, पौराणिक और भौगोलिक कारण हैं, जो कि इस प्रकार हैंः
केंद्रीय बिंदु पर है जिला
यदि जींद जिले की भौगोलिक स्थिति की बात करें, तो यह हरियाणा के बिल्कुल मध्य में स्थित है। ऐसे में यह राज्य के अलग-अलग जिलों के साथ सीमा साझा करता है।
पौराणिक काल का महत्त्व
पौराणिक कथाओं में जींद जिले का इतिहास महाभारत काल का माना जाता है। पांडवों द्वारा यहां युद्ध से पहले जयंती देवी यानि कि जीत की देवी का मंदिर बनवाया गया था। मान्यता के मुताबिक, पांडवों द्वारा इस मंदिर में पूजा-अर्चना की गई थी। बाद में इस मंदिर के नाम पर शहर का नाम जैंतपुरी हो गया, जो कि बाद में बदलकर जींद हो गया।
जिले का सांस्कृतिक महत्त्व
जींद जिला एक ऐसा जिला है, जो कि कई बार उजड़ा और कई बार बसाया गया। यहां रानी का तालाब और कई बड़े प्रसिद्ध मंदिर हैं, जिन्हें हरियाणा की संस्कृति से जोड़कर देखा जाता है। यही वजह है कि इस जिले को ‘हरियाणा का दिल’ भी कहा जाता है।
