सरकार ने पेट्रोल-डीजल की कीमतों को लेकर बड़ा फैसला लिया है। इस कड़ी में पेट्रोल-डीजल के निर्यात पर लगने वाले विंडफॉल टैक्स में बदलाव किया गया है। सरकार ने डीजल के निर्यात टैक्स को 16 रुपये प्रति लीटर से घटाकर 8.50 पैसे प्रति लीटर किया है, जबकि पेट्रोल के निर्यात पर टैक्स को .50 पैसे से बढ़ाकर 2.50 प्रति लीटर कर दिया है। यह बदलाव निर्यात किए जाने वाले पेट्रोल-डीजल पर लागू होगा, जिससे तेल कंपनियां अब इस नई दर से विदेशों में तेल को बेच सकेगी।
हर 15 दिनों में समीक्षा करती है सरकार
सरकार द्वारा पेट्रोल-डीजल के अंतरराष्ट्रीय बाजार के मूल्यों को लेकर हर 15 दिनों में समीक्षा की जाती है। इसका प्रमुख उद्देश्य देश में ईंधन की उपलब्धता बनाए रखना है, जिससे कंपनियां बाहर अधिक तेल न बेचें और देश में तेल बचा रहे।
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भारतीय बाजारों में क्या पड़ेगा प्रभाव
पेट्रोल-डीजल के निर्यात के दाम बढ़ने पर इसका असर भारत के घरेलू बाजार पर नहीं पड़ेगा। भारतीय पेट्रोल पंपों पर तेल की कीमत वही रहेंगी, जो कि पहले थीं। ऐसे में तेल के दामों में बढ़ोतरी होने की चिंता नहीं है। तेल की आपूर्ति व दाम में किसी भी प्रकार का बदलाव नहीं है।
15 दिन पहले भी बदली थीं कीमतें
सरकार द्वारा 15 दिन पहले भी तेल के निर्यात दामों में बदलाव किये गए थे। उस दौरान डीजल पर लगने वाली निर्यात ड्यूटी को 20 रुपये प्रति लीटर से घटाकर 16 रुपये प्रति लीटर कर दिया गया था। वहीं, पेट्रोल पर टैक्स को 0.50 पैसे प्रति लीटर पर ही रखा गया था।
क्या होता है विंडफॉल टैक्स
अब हम विंडफॉल टैक्स के बारे में जान लेते हैं। आपको बता दें कि विंडफॉल टैक्स एक प्रकार का अतिरिक्त टैक्स होता है। इसे सरकार द्वारा खास परिस्थितियों में तेल कंपनियों के निर्यात पर लगाया जाता है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव होने की वजह से इसकी दरों की समीक्षा की जाती है। आपको बता दें कि ईंधन के निर्यात पर यह टैक्स पहली बार जुलाई 2022 में लगाया गया था। दो सालों तक यह टैक्स लगता रहा और बाद में इसे हटा दिया गया। हालांकि, मार्च 2026 से यह टैक्स फिर से लग रहा है।
