भारत में रेलवे का संबंध सिर्फ यात्री ट्रेनों से नहीं है। देश की अर्थव्यवस्था को चलाने में मालगाड़ियों की भी बड़ी भूमिका है। रोजाना हजारों टन सामान एक शहर से दूसरे शहर और बंदरगाहों से औद्योगिक क्षेत्रों तक पहुंचाया जाता है। ऐसे में इन मालगाड़ियों की आवाजाही को संभालने के लिए एक बेहद आधुनिक कमांड सेंटर तैयार किया गया है, जहां बैठकर सैकड़ों किलोमीटर दूर चल रही ट्रेनों पर भी नजर रखी जा सकती है।
यह खास सेंटर गुजरात के अहमदाबाद स्थित साबरमती में है। इसे साबरमती ऑपरेशंस कमांड सेंटर (OCC) कहा जाता है और यह वेस्टर्न डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर यानी WDFC के संचालन में अहम भूमिका निभाता है।
साबरमती में बना है हाईटेक कमांड सेंटर
साबरमती OCC को डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड (DFCCIL) संचालित करता है, जो रेल मंत्रालय के अधीन काम करता है।
करीब 3.07 एकड़ में फैले इस सेंटर का निर्मित क्षेत्र लगभग 12,867 वर्ग मीटर है। वर्ष 2025 में पूरी तरह चालू होने के बाद यह पश्चिमी डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर के संचालन का प्रमुख केंद्र बन गया।
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1506 किलोमीटर लंबे कॉरिडोर की निगरानी
साबरमती OCC से करीब 1,506 किलोमीटर लंबे वेस्टर्न डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर की निगरानी की जाती है। यह कॉरिडोर उत्तर प्रदेश से शुरू होकर हरियाणा, राजस्थान और गुजरात होते हुए महाराष्ट्र तक पहुंचता है।
इसका उद्देश्य मालगाड़ियों की आवाजाही को तेज, सुरक्षित और ज्यादा व्यवस्थित बनाना है। इसके जरिए मुंद्रा, कांडला और पीपावाव जैसे प्रमुख बंदरगाहों को उत्तरी भारत के औद्योगिक क्षेत्रों से बेहतर तरीके से जोड़ने में मदद मिलती है।
72 मीटर की वीडियो वॉल है सबसे बड़ा आकर्षण
इस कमांड सेंटर की सबसे खास चीजों में से एक है इसकी करीब 72 मीटर लंबी घुमावदार वीडियो वॉल। इस विशाल स्क्रीन पर कॉरिडोर में चल रही ट्रेनों की लोकेशन से लेकर ट्रैक, बिजली आपूर्ति और सुरक्षा से जुड़ी जानकारी रियल टाइम में देखी जा सकती है।
यानी अधिकारियों को किसी एक ट्रेन या सेक्शन की जानकारी लेने के लिए अलग-अलग जगहों से डेटा जुटाने की जरूरत नहीं पड़ती। पूरा नेटवर्क एक ही जगह से उनकी नजर के सामने रहता है।
इमरजेंसी के लिए भी पूरी तैयारी
सिर्फ सामान्य संचालन ही नहीं, आपात स्थिति से निपटने के लिए भी OCC में खास इंतजाम किए गए हैं। इसका मुख्य कंट्रोल रूम करीब 1480 वर्ग मीटर में फैला है। यहां दो वॉर रूम और एक डिजास्टर मैनेजमेंट रूम भी मौजूद है।
अगर किसी जगह तकनीकी खराबी, दुर्घटना या दूसरी आपात स्थिति आती है, तो संबंधित टीमें तेजी से स्थिति का आकलन कर फैसले ले सकती हैं।
आखिर क्यों है यह खास
दरअसल, मालगाड़ियों का संचालन जितना तेज और व्यवस्थित होगा, सामान उतनी जल्दी अपने गंतव्य तक पहुंच सकेगा। इसका फायदा बंदरगाहों, उद्योगों, एमएसएमई और ई-कॉमर्स जैसी गतिविधियों को मिल सकता है।
बेहतर माल ढुलाई से लॉजिस्टिक्स में लगने वाला समय कम करने और सप्लाई चेन को ज्यादा भरोसेमंद बनाने में भी मदद मिल सकती है।
रेलवे के बदलते दौर की तस्वीर
साबरमती OCC सिर्फ एक बड़ा कंट्रोल रूम नहीं है। यह इस बात का उदाहरण है कि भारतीय रेलवे किस तरह आधुनिक तकनीक और रियल-टाइम मॉनिटरिंग को अपने संचालन का हिस्सा बना रहा है। वहीं प्रयागराज का OCC भी देश के समर्पित माल गलियारों के संचालन में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है।
