दुनिया में आज सभी देशों में गगनचुंबी इमारतें देखने को मिलती हैं, जिन्हें मजबूती देने के लिए कंक्रीट का इस्तेमाल किया जाता है। इससे ये इमारतें कई वर्षों तक अपनी जगह पर टिकी रहती हैं। हालांकि, दुनिया के एक देश में इसकी इकलौती राजधानी ऐसी भी है, जहां कंक्रीट की इमारतों पर पूरी तरह प्रतिबंध लगा हुआ है। इस राजधानी में कोई भी व्यक्ति गगनचुंबी इमारतें या फिर कांच के टॉवर का निर्माण नहीं कर सकता है। इस लेख में हम इस बारे में विस्तार से जानेंगे।
इस राजधानी में कंक्रीट की इमारतों पर है प्रतिबंध
भूटान एशिया के छोटे देशों में शामिल है, जिसकी राजधानी थिम्फू एशिया की सबसे ऊंची राजधानी है। यह दुनिया की इकलौती ऐसी राष्ट्रीय राजधानी है, जहां आधुनिक शैली की कंक्रीट की बहुमंजिला इमारतों, कांच के टावरों और गगनचुंबी इमारतों के निर्माण पर पूरी तरह प्रतिबंध है।
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क्यों लगाया गया है प्रतिबंध ?
दरअसल, भूटान सरकार ने देश की सांस्कृतिक विरासत, पारंपरिक पहचान और पर्यावरण के संतुलन को बनाए रखने के लिए यह सख्त नियम लागू किया है। इसके पीछे मुख्य कारण निम्नलिखित हैं:
-भूटान अपनी संस्कृति को बहुत अधिक महत्त्व देता है। सरकार का मानना है कि कंक्रीट के गगनचुंबी ढांचे शहर की सांस्कृतिक पहचान को खत्म कर देंगे।
-भूटान अपनी प्रगति को जीडीपी से नहीं, बल्कि 'सकल राष्ट्रीय प्रसन्नता' (Gross National Happiness) से मापता है। इसका एक मुख्य पीलर पर्यावरण और पारंपरिक मूल्यों को सिक्योर करना है।
-थिम्फू हिमालय की वादियों में बसा है। ऐसे में यहां बड़े पैमाने पर कंक्रीट का उपयोग और भारी निर्माण थिम्फू के पारिस्थितिक तंत्र को नुकसान पहुंचा सकता है।
थिम्फू में भवन निर्माण के सख्त नियम
थिम्फू में बिल्डिंग निर्माण के लिए सख्त नियम हैं, जो कि इस प्रकार हैंः
-थिम्फू में बनने वाली किसी भी नई इमारत,चाहे वह सरकारी दफ्तर हो, होटल हो या किसी का निजी घर,उसे पारंपरिक भूटानी वास्तुकला के अनुरूप ही बनाना पड़ता है।
-सभी इमारतों में नक्काशीदार लकड़ी की खिड़कियां, हाथ से बने चित्र और पारंपरिक ढलवां छतें होना कानूनी रूप से अनिवार्य है।
-थिम्फू शहर में इमारतों की ऊंचाई पर सख्त पाबंदी है। यहां कोई भी इमारत 5 या 6 मंजिल से ज्यादा ऊंची नहीं बनाई जा सकती, जिससे पहाड़ियों का प्राकृतिक दृश्य प्रभावित न हो।
