आपने कर्क, मकर और भूमध्य रेखाओं के बारे में पढ़ा और सुना ही होगा। दुनिया के भूगोल में इन सभी रेखाओं का बहुत ही महत्त्व है। इन सभी रेखाओं को अलग-अलग नदियों द्वारा काटा जाता है। हालांकि, क्या आप जानते हैं कि दुनिया में इकलौती नदी ऐसी भी है, जो कि भूमध्य रेखा को दो बार काटती है। इस लेख में हम इस नदी के बारे में विस्तार से जानेंगे।
भूमध्य रेखा को दो बार काटने वाली नदी
भूमध्य रेखा को दो बार काटने वाली नदी कांगो नदी है, जिसे पहले जायरे नदी के नाम से जाना जाता था। यह नदी अफ्रीका महाद्वीप की बहुत ही महत्त्वूपूर्ण नदी है।
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कब बदला नदी का नाम
नदी का नाम 'जायरे' पुर्तगाली व्यापारियों द्वारा स्थानीय बांतू भाषा के शब्द एनजारे से लिया गया था, जिसका मतलब नदी होता है। इसे 1997 में बदलकर कांगो कर दिया गया।
भूमध्य रेखा को दो बार काटती है नदी
आपको बात दें कि कांगो नदी उल्टे नदी जैसी 'U' जैसी आकृति बनाती है। यह पूर्वी अफ्रीका की डीआर कांगो सीमा से निकलकर उत्तर दिशा की ओर बहती है। उत्तर की ओर बहते हुए यह पहली बार भूमध्य रेखा को पार करके उत्तरी गोलार्ध में प्रवेश करती है। वहीं, उत्तर में कुछ दूर बहने के बाद यह कांगो बेसिन के कारण पश्चिम और फिर दक्षिण-पश्चिम की ओर मुड़ जाती है। ऐसे में दक्षिण-पश्चिम की ओर बहते हुए यह दूसरी बार भूमध्य रेखा को पार करकेदोबारा दक्षिणी गोलार्ध में आती है और आखिर में अटलांटिक महासागर में गिरती है।
दुनिया की सबसे गहरी नदी है कांगो
आपको बता दें कि दुनिया की सबसे गहरी नदी कांगो है, जो कि कुछ जगहों पर 220 मीटर तक है। वहीं, लंबाई के मामले में यह नील नदी के बाद दूसरी सबसे लंबी नदी है, जो कि 4700 किलोमीटर है। ऐसे में इस नदी की पहचान वैश्विक स्तर पर भी होती है।
दूसरा सबसे बड़ा वर्षावन
कांगो बेसिन में स्थित वर्षावन दक्षिण अमेरिका के अमेजन वर्षावन के बाद दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा उष्णकटिबंधीय वर्षावन है। आपको बता दें कि इसे अफ्रीका का फेफड़ा भी कहा जाता है, जिसका पर्यावरणीय रूप से बहुत ही महत्त्व है।
