दिल्ली से पटना जाने वालों के लिए सबसे बड़ी परेशानी अक्सर दूरी नहीं, बल्कि सफर में लगने वाला लंबा समय होता है। ट्रेन पकड़िए तो 12 से 15 घंटे, कई बार इससे भी ज्यादा वक्त सफर में निकल जाता है। लेकिन यदि प्रस्तावित हाई-स्पीड रेल प्रोजेक्ट जमीन पर उतरता है, तो यही लंबा सफर महज 4.5 घंटे में पूरा हो सकता है।
High Speed Rail Corridor India: करीब 1170 किलोमीटर लंबे प्रस्तावित दिल्ली-पटना हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर को उत्तर भारत की रेल कनेक्टिविटी के लिए बड़ा बदलाव माना जा रहा है। यह सिर्फ दिल्ली और पटना को जोड़ने वाली ट्रेन नहीं होगी, बल्कि रास्ते में आने वाले कई बड़े शहरों को भी तेज रेल नेटवर्क से जोड़ेगी।
दिल्ली से पटना तक कौन-कौन से शहर जुड़ेंगे?
Delhi-Patna Bullet Train: प्रस्तावित रूट नई दिल्ली से शुरू होकर आगरा, कानपुर, लखनऊ, प्रयागराज और वाराणसी होते हुए पटना तक जाने की बात कही जा रही है। यानी इस एक कॉरिडोर से देश के कई महत्वपूर्ण शहर एक-दूसरे से कनेक्ट हो जाएंगे।
आगरा पर्यटन के लिए जाना जाता है, कानपुर बड़ा औद्योगिक केंद्र है, लखनऊ उत्तर प्रदेश की राजधानी है, जबकि प्रयागराज और वाराणसी का धार्मिक एवं सांस्कृतिक महत्व देश-दुनिया में है। दूसरी ओर पटना बिहार का प्रमुख राजनीतिक और आर्थिक केंद्र है।
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320 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से दौड़ सकती है ट्रेन
प्रस्तावित हाई-स्पीड रेल में ट्रेन की डिजाइन स्पीड 350 किलोमीटर प्रति घंटे और परिचालन गति करीब 320 किलोमीटर प्रति घंटे बताई गई है।
रफ्तार का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि दिल्ली से आगरा की दूरी करीब 200 किलोमीटर है, जिसे प्रस्तावित व्यवस्था में लगभग 58 मिनट में तय करने का टारगेट है। वहीं दिल्ली से वाराणसी पहुंचने में करीब 3 घंटे 33 मिनट और दिल्ली से पटना तक लगभग 4 घंटे 30 मिनट लगने का अनुमान है।
अभी कितना लगता है समय ?
फिलहाल दिल्ली-पटना के बीच चलने वाली पारंपरिक एक्सप्रेस ट्रेनों में सफर का समय ट्रेन और मार्ग के हिसाब से काफी अलग हो सकता है। कई ट्रेनों से इस दूरी को तय करने में करीब 12 से 15 घंटे या उससे अधिक समय लग जाता है। ऐसे में 4.5 घंटे का प्रस्तावित सफर यात्रियों के लिए कितना बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है।
त्योहारों में यात्रियों को मिल सकती है राहत
दिल्ली, उत्तर प्रदेश और बिहार के बीच बड़ी संख्या में लोग रोजाना यात्रा करते हैं। दिवाली और छठ पूजा जैसे त्योहारों के दौरान ट्रेनों में भीड़ और टिकटों की मांग काफी बढ़ जाती है, लेकिन इससे लोगों को काफी मदद मिल सकती है।
सिर्फ सफर नहीं, कारोबार और पर्यटन भी होगा तेज
इस प्रोजेक्ट का असर सिर्फ यात्रियों के समय बचने तक सीमित नहीं रहेगा। दिल्ली, लखनऊ, वाराणसी और पटना जैसे शहरों के बीच तेज कनेक्टिविटी से व्यापार, रोजगार और पर्यटन को भी बढ़ावा मिलने की उम्मीद है।
उदाहरण के लिए, दिल्ली में काम करने वाला व्यक्ति कुछ ही घंटों में वाराणसी या पटना पहुंच सकेगा। इसी तरह दूसरे शहरों के कारोबारी भी कम समय में दिल्ली जैसे बड़े बाजार से जुड़ सकेंगे।
अभी प्रस्तावित योजना है, अंतिम रूट बदल सकता है
दिल्ली-पटना हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर को लेकर सर्वे और योजना से जुड़े काम महत्वपूर्ण हैं। परियोजना से जुड़ी अंतिम जानकारी में रूट, स्टेशन, लागत और समयसीमा में बदलाव संभव है। इसलिए 4.5 घंटे का सफर फिलहाल प्रस्तावित लक्ष्य के रूप में देखा जाना चाहिए।
