El Nino: एल नीनो किस भाषा का शब्द और क्या होता है इसका अर्थ? जानें भारत पर इसका असर

एल नीनो (El Nino) स्पेनिश भाषा का शब्द है, जिसका अर्थ ‘छोटा लड़का’ या ‘क्राइस्ट चाइल्ड’ होता है। यह पैसिफिक ओसियन (प्रशांत महासागर) में समुद्री जल के असामान्य रूप से गर्म होने की जलवायु घटना है, जो दुनिया भर के मौसम और भारत के मानसून को प्रभावित करती है। 

Jun 13, 2026, 12:11 IST
2026 में क्यों चर्चा में है एल नीनो?
2026 में क्यों चर्चा में है एल नीनो?

मानसून और मौसम से जुड़ी खबरों पर नजर रखने वाले इन दिनों एल नीनो (El Nino) शब्द बार-बार सुन रहे होंगे, आज-कल इसकी चर्चा भारत में भी तेज हो रही है। मॉनसून मिशन कपल्ड फोरकास्ट सिस्टम (MMCFS) ने अनुमान लगाया है कि इस साल जून से सितंबर के बीच अल नीनो का गंभीर प्रभाव देखने को मिल सकता है और इसके पूरे मॉनसून सीजन बने रहने की भी प्रबल संभावना है।     

मौसम वैज्ञानिकों की मानें तो 2026 में बनने वाला संभावित सुपर एल नीनो भारत के मानसून को प्रभावित कर सकता है। ऐसे में यह पता करना जरूरी है कि आखिर एल नीनो क्या है, इसका नाम कहां से आया और भारत के लिए यह क्यों अहम बन गया है।

क्या होता है एल नीनो का अर्थ?

एल नीनो स्पेनिश भाषा का शब्द है, जिसका अर्थ होता है ‘छोटा लड़का’ (The Little Boy) या ‘क्राइस्ट चाइल्ड’। यह नाम 17वीं शताब्दी में पेरू और इक्वाडोर के मछुआरों द्वारा दिया गया था। उन्होंने देखा कि क्रिसमस के आसपास प्रशांत महासागर का पानी असामान्य रूप से गर्म हो रहा है। अक्सर यह घटना क्रिसमस के समय दिखाई देती थी, इसलिए इसका नाम ‘एल नीनो’ रख दिया गया। 

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आखिर क्या है एल नीनो?

सरल भाषा में कहें तो एल नीनो एक ऐसी जलवायु घटना है, जिसमें पैसिफिक ओसियन के मध्य और पूर्वी हिस्से का पानी सामान्य से ज्यादा गर्म हो जाता है। समुद्र के तापमान में यह बदलाव दुनिया भर के मौसम को प्रभावित करता है। आमतौर पर एल नीनो हर 2 से 7 साल में एक बार आता है और इसका असर कई महीनों तक बना रह सकता है।

एल नीनो का अर्थ: हाई लाइट्स 

भाषा
स्पेनिश
अर्थ
छोटा लड़का या क्राइस्ट चाइल्ड
पहली पहचान
पेरू के मछुआरों द्वारा
फ्रीक्वेंसी 
हर 2-7 वर्ष
मुख्य प्रभाव
मानसून में कमी, सूखा, कृषि नुकसान

2026 में क्यों चर्चा में है एल नीनो?

वैज्ञानिकों ने प्रशांत महासागर में ‘सुपर एल नीनो’ बनने की आशंका जताई है। इसी कारण से भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने साल 2026 के मानसून के सामान्य से कमजोर रहने की संभावना व्यक्त की है।

मौसम विशेषज्ञों का मानना है कि अगर एल नीनो अपनी मजबूत पकड़ दिखाता है तो:

मानसून की बारिश सामान्य से कम हो सकती है।

कृषि उत्पादन प्रभावित हो सकता है।

कई राज्यों में सूखे जैसी स्थिति बन सकती है।

खाद्य पदार्थों की कीमतों में बढ़ोतरी देखने को मिल सकती है।

एल नीनो का भारत पर असर

यहाँ नीचे El Nino के कारण भारत पर होने वाले प्रभाव के बारें में बताया गया है-  

मानसून पर सीधा प्रभाव

El Nino in India: एल नीनो का सबसे बड़ा असर भारतीय मानसून पर पड़ता है। इतिहास बताता है कि एल नीनो वाले वर्षों में भारत में अक्सर औसत से कम बारिश होती है।

किसानों की बढ़ सकती है चिंता

कम बारिश का मतलब है कि धान, दाल, गन्ना और अन्य खरीफ फसलों की बुवाई प्रभावित हो सकती है। इससे किसानों की आय पर भी इसका सीधा असर पड़ सकता है।

जल संकट की आशंका

कम वर्षा होने पर बांधों और जलाशयों में पानी का स्तर घट सकता है, जिससे कई क्षेत्रों में पानी की कमी की समस्या देखने को मिल सकती है।

महंगाई बढ़ने का खतरा

जब फसल उत्पादन कम होता है तो बाजार में खाद्य वस्तुओं की आपूर्ति घट जाती है और इसका सीधा असर कीमतों पर पड़ता है।

वैज्ञानिकों से लेकर किसानों तक, सबकी नजर

एल नीनो सिर्फ महासागर में तापमान बढ़ने की घटना नहीं है, बल्कि इसका प्रभाव करोड़ों लोगों की जिंदगी पर पड़ सकता है। भारत जैसे देश में इसकी भूमिका और भी महत्वपूर्ण हो जाती है। यही वजह है कि 2026 में संभावित सुपर एल नीनो को लेकर वैज्ञानिकों से लेकर किसानों तक सभी की नजरें मौसम के बदलते संकेतों पर टिकी हुई हैं। 

Bagesh Yadav

Senior Executive - Editorial

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