भारत में आज कई गगनचुंबी इमारतें मौजूद हैं, जो कि अपनी ऊंचाई के साथ-साथ वास्तुकला के लिए भी जानी जाती हैं। इन इमारतों को बनाने में कई करोड़ों रुपये का खर्च आता है, जो कि कई वर्षों में जाकर बनती हैं। हालांकि, क्या आप जानते हैं कि भारत की पहली सबसे ऊंची इमारत चेन्नई में स्थित LIC बिल्डिंग थी। इस बिल्डिंग को उस समय सिर्फ 87 लाख रुपये की लागत में बनाया गया था।
इमारत से जुड़ी एक खास बात यह है कि इसका निर्माण विदेशी आर्किटेक्ट्स की देखरेख में किया जा रहा था, लेकिन उन्होंने बीच में ही प्रोजेक्ट छोड़ दिया, जिसके बाद एक भारतीय आर्किटेक्ट ने इस बिल्डिंग का निर्माण किया था। बिल्डिंग जब बनकर तैयार हुई, तो इसे देखने के लिए लोगों का हुजूम लग गया था।
कब शुरू हुआ था बिल्डिंग का निर्माण
देश की पहली सबसे ऊंची बिल्डिंग का निर्माण 1952 में शुरू हुआ था। दरअसल, इस बिल्डिंग को बनाने का विचार 1952 में यूनाइटेड इंडिया लाइफ इंश्योरेंस कंपनी के चेयरमैन एम.सी.टी.एम चिदंबरम चेट्टि्यार के दिमाग में आया था। उस समय देश में इतनी ऊंची बिल्डिंग्स नहीं हुआ करती थीं।
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कितनी ऊंची है बिल्डिंग
देश की सबसे ऊंची बिल्डिंग कुल 14 मंजिला है, जिसकी ऊंचाई 177 फीट है। उस समय पूरे देश में कहीं भी इतनी अधिक ऊंची बिल्डिंग नहीं थी। यह बिल्डिंग कुल 52, 800 वर्ग फुट में फैली हुई है, जिसमें कुल 5 ऑटोमेटिक लिफ्ट लगाई गई थी। यह उस समय की सबसे मॉर्डन वर्क प्लेस बन गई थी, जहां 1500 से ज्यादा लोग काम के लिए पहुंचते थे।
1959 में बनकर तैयार हुई बिल्डिंग
LIC बिल्डिंग का उद्घाटन तत्कालीन वित्त मंत्री मोरारजी देसाई द्वारा 23 अगस्त, 1959 को किया गया था। उस समय इस बिल्डिंग का इतना नाम था कि इसके उद्घाटन के समय बिल्डिंग को देखने के लिए लोगों की बड़ी भीड़ जमा हो गई थी। पहले इस बिल्डिंग को बनाने की जिम्मेदारी लंदन के आर्किटेक्ट्स एच.जे ब्राउन और एल.सी मौलिन की थी, लेकिन उन्होंने खुद को प्रोजेक्ट से बाहर कर लिया था, जिसके बाद भारतीय आर्किटेक्ट एल.एम.चित्तले द्वारा बिल्डिंग का निर्माण कार्य पूरा किया गया था।
