Jaspal Rana: खुद बने चैंपियन, फिर तैयार किए चैंपियंस; पढ़ें भारतीय शूटिंग के महान गुरु की कहानी

दिग्गज निशानेबाज और मशहूर कोच जसपाल राणा का 49 वर्ष की उम्र में निधन हो गया। साल 1994 में महज 18 वर्ष की उम्र में उन्होंने हिरोशिमा एशियन गेम्स में 25 मीटर सेंटर फायर पिस्टल स्पर्धा में स्वर्ण पदक जीतकर इतिहास रच दिया था। उस समय वह शूटिंग में एशियाई खेलों का स्वर्ण जीतने वाले भारत के सबसे युवा खिलाड़ी बने थे।  

Jun 12, 2026, 13:55 IST
भारतीय पिस्टल शूटिंग के 'आर्किटेक्ट'
भारतीय पिस्टल शूटिंग के 'आर्किटेक्ट'

भारतीय खेल जगत को 12 जून 2026 को बड़ा झटका लगा, जब देश के दिग्गज निशानेबाज और मशहूर कोच जसपाल राणा का 49 वर्ष की उम्र में निधन हो गया। एशियन गेम्स में भारत को गौरव दिलाने वाले और बाद में मनु भाकर व सौरभ चौधरी जैसे स्टार खिलाड़ियों को तराशने वाले राणा अब हमारे बीच नहीं रहे। उनके निधन से भारतीय शूटिंग जगत में शोक की लहर है। 

18 साल की उम्र में बने देश के हीरो 

साल 1994 में महज 18 वर्ष की उम्र में उन्होंने हिरोशिमा एशियन गेम्स में 25 मीटर सेंटर फायर पिस्टल स्पर्धा में स्वर्ण पदक जीतकर इतिहास रच दिया। उस समय वह शूटिंग में एशियाई खेलों का स्वर्ण जीतने वाले भारत के सबसे युवा खिलाड़ी बने थे। इसी साल उन्होंने इटली के मिलान में जूनियर विश्व शूटिंग चैम्पियनशिप में विश्व रिकॉर्ड की बराबरी करते हुए गोल्ड मेडल भी जीता।

Related Stories

पदकों से भरा रहा शानदार करियर

जसपाल राणा का करियर उपलब्धियों से भरा रहा। उन्होंने एशियन गेम्स में 8 पदक जीते, जबकि कॉमनवेल्थ गेम्स में 15 पदक अपने नाम किए। खास बात यह रही कि कॉमनवेल्थ गेम्स में वह भारत के सबसे सफल खिलाड़ियों में गिने जाते हैं।

‘अर्जुन’ से लेकर ‘द्रोणाचार्य’ तक का सफ़र 

जून 1976 में उत्तराखंड के उत्तरकाशी में जन्मे जसपाल राणा का बचपन दिल्ली में बीता। उनके पिता नारायण सिंह राणा ने उन्हें निशानेबाजी से परिचित कराया। बहुत कम उम्र में ही उन्होंने अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाना शुरू कर दिया था।  

उनकी उपलब्धियों को देखते हुए भारत सरकार ने उन्हें 1994 में अर्जुन पुरस्कार और 1997 में पद्मश्री से सम्मानित किया। बाद में कोचिंग में उनके योगदान के लिए उन्हें 2020 में द्रोणाचार्य पुरस्कार भी मिला।

भारतीय पिस्टल शूटिंग का 'आर्किटेक्ट' 

खिलाड़ी के रूप में सफलता हासिल करने के बाद जसपाल राणा ने भारतीय शूटिंग को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने का जिम्मा उठाया। उन्होंने युवा निशानेबाजों को अंतरराष्ट्रीय स्तर के लेवल के लिए तैयार करने के लिए नए ट्रेनिंग सिस्टम विकसित किये।

उनकी कोचिंग में मनु भाकर ने पेरिस ओलंपिक 2024 में दो कांस्य पदक जीतकर इतिहास रचा, जबकि सौरभ चौधरी, अनीश भानवाला और चिंकी यादव जैसे कई युवा खिलाड़ी विश्व मंच पर अपना नाम किये।

यही वजह है कि उन्हें भारतीय पिस्टल शूटिंग का 'आर्किटेक्ट' कहा जाता है। उन्होंने सिर्फ खिलाड़ियों को नहीं बनाया, बल्कि भारत में आधुनिक शूटिंग की मजबूत नींव रखी।

हमेशा याद रहेगा उनका योगदान

600 से ज्यादा राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय पदकों के साथ-साथ अनेकों खिलाड़ियों के सपनों को उड़ान देने वाले जसपाल राणा का नाम भारतीय खेल इतिहास में हमेशा स्वर्ण अक्षरों में लिखा जाएगा। वह सिर्फ एक महान निशानेबाज नहीं थे, बल्कि भारतीय शूटिंग की उस मजबूत नींव के निर्माता थे, जिस पर आज देश की नई पीढ़ी विश्व मंच पर सफलता का पताका लहरा रही है। 

Bagesh Yadav

Senior Executive - Editorial

आप जागरण जोश पर भारत, विश्व समाचार, खेल के साथ-साथ प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए समसामयिक सामान्य ज्ञान, सूची, जीके हिंदी और क्विज प्राप्त कर सकते है. आप यहां से कर्रेंट अफेयर्स ऐप डाउनलोड करें.

Just Now

Result Updates