आपने उत्तर भारत के प्रमुख किलों के बारे में पढ़ा और सुना ही होगा। इनमें लाल किला और आगरा का किला प्रमुख हैं। हालांकि, क्या आपने कभी दक्षिण भारत के उस किले के बारे में पढ़ा है, जिसे मुगलों को जीतने में 8 साल का समय लग गया था।
उन्होंने लंबे समय तक किले की घेराबंदी की थी, तब जाकर मुगल इस किले को जीत सके थे। यह किला पूरे दक्षिण भारत का सबसे बड़ा किला है और आज भी अपनी ऐतिहासिक विरासत को बयां कर रहा है। इस लेख में हम किले के बारे में विस्तार से जानेंगे।
दक्षिण भारत का सबसे बड़ा किला
दक्षिण भारत का सबसे बड़ा किला जिंजी का किला है यह तमिलनाडू के विल्लुपुरम जिले में स्थित है, जो कि अपनी मजबूत दीवारों और छत्रपति शिवाजी महाराज से अपने संबंध के लिए जाना जाता है।
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तीन पहाड़ियों पर बना है यह किला
जिंजी का किला सिर्फ एक स्थान पर नहीं, बल्कि यह तीन पहाड़ियों को मिलाकर बनाया गया है, जो कि इस प्रकार हैंः
राजगिरी पहाड़ी
इसमें एक राजगिरी पहाड़ी है, जो कि सबसे ऊंची पहाड़ी है। इस पर चढ़ना बहुत मुश्किल होता है। यही वजह है कि यहां पर किले का राजा रहा करता था। पहाड़ी पर चढ़ने के लिए एक लकड़ी का पुल लगाया जाता था, जिसे युद्ध के समय हटा लिया जाता था।
कृष्णगिरी पहाड़ी
यह उत्तरी दिशा में मौजूद पहाड़ी है, जिस पर किले की रानी रहा करती थी।
चकलीदुर्ग
यह दक्षिण-पूर्व में तीसरी पहाड़ी है, जो कि मुख्य रूप से सैन्य छावनी और पहरेदारों के लिए थी।
किसने बनवाया था किला
जिंजी किले का निर्माण 11वीं-12वीं शताब्दी में कोणार्क के राजा आनंद कोन द्वारा करवाया गया था। हालांकि, बाद में यहां चोल और विजयनगर राजवंश ने राज किया।
मुगलों को जीतने में लग गए 8 साल
यह किला अपनी मजबूती के लिए जाना जाता है। 1677 में इस किले को छत्रपति शिवाजी महाराज ने अपने दक्षिण विजय अभियान के दौरान जीत लिया था और अपने दक्षिण साम्राज्य की राजधानी बनाया था। हालांकि, उनकी मौत के बाद शिवाजी के पुत्र राजाराम ने मुगलों से बचने के लिए इस किले में शरण ली थी। मुगलों की एक बड़ी सेना ने इस किले को 8 सालों तक घेरकर रखा था, जिसके बाद वे यह किला जीत सके थे।
मुगलों के बाद किसने किया शासन
मुगलों के बाद इस किले पर कर्नाटक के नवाबों का राज रहा, जिनमें तेज सिंह जैसे नाम शामिल हैं। इनके बाद फ्रांसीसी और आखिर में अंग्रेजों ने यहां शासन किया। अब यहां भारत सरकार का नियंत्रण है।
