भारत के पश्चिमी हिस्से में स्थित महाराष्ट्र प्रमुख राज्यों में गिना जाता है। भारत के इस राज्य में यूं, तो कई बड़ी और प्रमुख नदियों का प्रवाह होता है। हालांकि, इनमें से एक नदी ऐसी भी है, जिसे महाराष्ट्र का सबसे बड़ी नदी होने का दर्जा प्राप्त है। यह नदी न सिर्फ अपनी लंबाई के लिए जानी जाती है, बल्कि इसका सामाजिक, आर्थिक, सांस्कृतिक और धार्मिक महत्त्व भी है।
महाराष्ट्र की सबसे बड़ी नदी
महाराष्ट्र की सबसे बड़ी और लंबी नदी की बात करें, तो यह गोदावरी नदी है। यह नदी कुल 1465 किलोमीटर लंबी है, जो कि अपने प्रवाह के कुल हिस्से का करीब 49 फीसदी हिस्सा महाराष्ट्र में ही तय करती है।
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गंगा की दूसरी सबसे बड़ी नदी
आपको बता दें कि गोदावरी नदी गंगा नदी के बाद भारत की दूसरी सबसे लंबी नदी है। इस नदी की प्राचीनता और विशालता के कारण इस नदी को दक्षिण गंगा या बूढ़ी गंगा भी कहा जाता है।
कहां से होता है गोदावरी नदी का उद्गम
गोदावरी नदी का उद्गम महाराष्ट्र के नासिक जिले के
त्र्यंबकेश्वर की पहाड़ियों से होता है। यह स्थान पश्चिमी घाट का एक हिस्सा है, जो 12 ज्योतिर्लिंगों में से एक ज्योतिर्लिंग भी है।
कितने राज्यों में बहती है गोदावरी नदी
नासिक से निकलने के बाद गोदावरी नदी अहमदनगर, छत्रपति संभाजीनगर, जालना, परभणी, बीड़ और नांदेड़ से होते हुए महाराष्ट्र की सीमा को लांघकर तेलंगाना और अंत में आंध्र प्रदेश में प्रवेश करती है। यहां से यह नदी एक बड़ा डेल्टा बनाते हुए बंगाल की खाड़ी में गिर जाती है।
गोदावरी की प्रमुख सहायक नदियां
गोदावरी की प्रमुख सहायक नदियों की बात करें, तो ये प्रवरा, पूर्णा, मंजरा, प्राणहिता, इंद्रावती और सबरी नदी है। मंजरा नदी दक्षिण से गोदावरी में मिलती है, जबकि प्राणहिता और इंद्रावती जैसी नदियां उत्तर से आकर इसमें मिलती है।
नदी का आर्थिक और कृषि महत्त्व
गोदावरी नदी महाराष्ट्र में कृषी के लिए बहुत ही महत्त्वपूर्ण नदी है। इस नदी को महाराष्ट्र की कृषि की रीढ़ भी कहा जाता है। इसकी मदद से चावल, गन्ना, तंबाकू, अंगूर और प्याज की खेती की जाती है।
गोदावरी नदी पर है जायकवाड़ी बांध
छत्रपति संभाजीनगर जिले में गोदावरी नदी पर जायकवाड़ी बांध बना हुआ है। यहां मौजूद जलाशय को नाथसागर के नाम से जाना जाता है। इस बांध के माध्यम से सिंचाई, पेयजल और उद्योगों के लिए पानी की आपूर्ति की जाती है।
नदी का धार्मिक और सांस्कृतिक महत्त्व
गोदावरी नदी का धार्मिक और सांस्कृतिक महत्त्व भी देखन को मिलता है। यहां नासिक जिले में गोदावरी के तट पर सिंहस्थ कुंभ मेला आयोजित किया जाता है। इस नदी के किनारे ही त्र्यंबकेश्वर में भगवान शिव के 12 ज्योतिर्लिंगों में से एक ज्योतिर्लिंग है।
