भारत को नदियों का घर कहा जाता है। यहां प्रत्येक राज्य में हमें नदियों का प्रवाह देखने को मिलता है। इस कड़ी में कुछ नदियां ऐसी हैं, जिन्हें भारत की प्रमुख नदियों में शामिल किया गया है। इन नदियों में उत्तर भारत से लेकर दक्षिण भारत की नदियां शामिल हैं।
आपने उत्तर भारत में बहने वाली गंगा नदी के बारे में पढ़ा या सुना ही होगा। हालांकि, क्या आप जानते हैं कि दक्षिण भारत की सबसे बड़ी नदी कौन-सी है, जिसे ‘दक्षिण गंगा’ के नाम से भी जाना जाता है। इस लेख में हम विस्तार से जानेंगे।
दक्षिण भारत की सबसे बड़ी नदी
अब हम दक्षिण भारत की सबसे बड़ी नदी के बारे में जान लेते हैं। आपको बता दें कि आकार, विस्तार और सांस्कृतिक महत्त्व की वजह से गोदावरी नदी, दक्षिण भारत की सबसे बड़ी नदी है। इस नदी को ‘वृद्ध गंगा’ के नाम से भी जाना जाता है।
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कहां से होता है उद्गम
गोदावरी नदी का उद्गम महाराष्ट्र के नासिक जिले के त्र्यंबकेश्वर से होता है। यह एक बड़ा तीर्थ स्थल है, जो कि 12 ज्योतिर्लिंगों में शामिल है। यहां से निकलने के बाद यह नदी पूर्व दिशा में बहती है और 1465 किलोमीटर की यात्रा करने के बाद यह आंध्र प्रदेश के राजमहेंद्री के पास अलग-अलग धाराओं में बंटने पर अंत में बंगाल की खाड़ी में मिल जाती है।
नदी का ड्रेनेज सिस्टम
गोदावरी नदी भारत के कुल भौगोलिक एरिया का करीब 10 फीसदी हिस्सा कवर करती है। इसका अधिकांश भाग महाराष्ट्र में है, जो कि करीब 50 फीसदी है। यहां से निकलने के बाद यह नदी तेलंगाना और आंध्र प्रदेश में पहुंचती है, जहां यह उपजाऊ मैदान का निर्माण करती है। आपको बता दें कि छत्तीसगढ़, ओडिसा और मध्य प्रदेश के कुछ इलाकों से इसकी सहायक नदियां आती हैं।
गोदावरी की प्रमुख सहायक नदियां
गोदावरी की सहायक नदियों के लेकर अक्सर परीक्षाओं में पूछा जाता है। इसकी सहायक नदियां इस प्रकार हैंः
बाएं से मिलने वाली नदियांः पूर्णा, प्राणहिता, पेनगंगा, वेनगंगा, इंद्रवती और सबरी
दाएं से मिलने वाली नदियांः मूला, मंजीरा, प्रवर और मानैर आदि।
गोदावरी का आर्थिक और कृषि महत्त्व
गोदावरी नदी को दक्षिण भारत की जीवनरेखा कहा जाता है। यह नदी आंध्र प्रदेश और तेलंगाना में उपजाऊ क्षेत्र बनाती है, जहां चावल की अधिक खेती होती है। इसके अलावा यहां गन्ना और कपास की भी खेती की जाती है।
गोदावरी नदी का सांस्कृतिक महत्त्व
हिंदू धर्म में गोदावरी नदी का अधिक महत्त्व है। यहां हर 12 साल में सिंहस्थ कुंभ मेले का आयोजन किया जाता है। इसके अलावा इसके तट पर समय-समय पर विभिन्न धार्मिक कार्यक्रमों का आयोजन किया जाता है। इसके तट पर नासिक, पैठन, नांदेड़, भद्राचलम और राजमहेंद्री जैसे प्रमुख शहर बसे हुए हैं।
