भारत के दक्षिण में जब भी प्रमुख राज्यों की बात होती है, तो इसमें आंध्र प्रदेश का नाम भी प्रमुखता से लिया जाता है। यह राज्य अपनी विविध संस्कृति और अनूठी परंपराओं के लिए जाना जाता है, जहां एक मजबूत नदी तंत्र प्रणाली भी है। खास बात यह है कि यहां बहने वाली नदी न सिर्फ राज्य की, बल्कि पूरे दक्षिण भारत की सबसे लंबी और बड़ी नदी प्रणाली है। इस नदी को ‘दक्षिण गंगा’ या ‘वृद्ध गंगा’ भी कहा जाता है। कौन-सी है यह नदी, जानने के लिए यह लेख पढ़ें।
आंध्र प्रदेश की सबसे बड़ी नदी
आंध्र प्रदेश की सबसे बड़ी नदी की बात करें, तो यह गोदावरी नदी है। यह गंगा नदी के बाद भारत की दूसरी सबसे बड़ी नदी है। इसका आंध्र प्रदेश की संस्कृति और इतिहास में महत्त्वपूर्ण योगदान रहा है।
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कहां से होता है नदी का उद्गम
गोदावरी नदी का उद्गम महाराष्ट्र के नासिक जिले की त्रयंबकेश्वर पहाड़ियों से होता है। यह नदी यहां से निकलने के बाद तेलंगाना होते हुए आंध्र प्रदेश में प्रवेश करती है।
कितनी लंबी है नदी
गोदावरी नदी की कुल लंबाई 1465 किलोमीटर है, जो कि प्रदेश के अल्लुरी सीतारामा राजू और एलुरु जैसे जिलों से होकर गुजरती है। यह नदी शहर के पार होने के बाद दो मुख्य शाखाओं में बंट जाती है, जिसमें एक ‘गौतमी’ और दूसरी ‘वशिष्ठ’ कहलाती है। इनके बीच का उपजाऊ इलाका 'गोदावरी डेल्टा' कहलाता है। अंत में यह नदी आंध्र प्रदेश के अंतर्वेदी और पुडुचेरी के पास बंगाल की खाड़ी में गिर जाती है।
राज्य में कृषि की है जीवनरेखा
आंध्र प्रदेश को ‘चावल का कटोरा’ कहा जाता है, जिसके पीछे इस नदी का महत्त्व है। इसके द्वारा बनाए गए उपजाऊ डेल्टा क्षेत्र में चावल की खेती होती है, जिससे आंध्र प्रदेश समेत अन्य राज्यों में चावलों की आपूर्ति की जाती है। यही वजह है इस राज्य को चावल उत्पादन में शीर्ष पर स्थान मिलता है। इसके अलावा यहां नारियल, गन्ना और केले की कृषि होती है।
नदी पर बनी हैं कई प्रमुख योजनाएं
आंध्र प्रदेश की गोदावरी नदी पर कई प्रमुख योजनाएं बनी हुई हैं, जो कि इस प्रकार हैंः
सर ऑर्थर कॉटन बैराज
यह बैराज राजमहेंद्रवरम के पास धवलेश्वरम में बना हुआ है, जिसे 19वीं शताब्दी में ब्रिटिश इंजीनियर सर ऑर्थर कॉटन ने डिजाइन किया था।
पोलावरम परियोजना
यह एक बहुउद्देशीय राष्ट्रीय सिंचाई परियोजना है, जिसका उद्देश्य राज्य के सूख इलाकों तक पानी की आपूर्ति करने के साथ पनबिजली का निर्माण करना है।
नदी का सांस्कृतिक और धार्मिक महत्त्व
अब हम नदी के सांस्कृतिक और धार्मिक महत्त्व के बारे में जान लेते हैं। आपको बता दें कि तेलुगु संस्कृति में गोदावरी नदी को पवित्र माना जाता है, जिसे गोदावरी माता नाम से पुकारा जाता है। इसके तट पर प्रत्येक 12 वर्ष में एक बार ‘गोदावरी पुष्करम’ पर्व मनाया जाता है, जो कि कुंभ मेले की तरह होता है।
