पाकिस्तान, भारत के प्रमुख पड़ोसी देशों में आता है। यहां विभिन्न नदियों का प्रवाह होता है, जिनका आर्थिक, सामाजिक और कृषि रूप से बहुत ही महत्त्व है। इस कड़ी में एशिया महाद्वीप की सबसे लंबी नदी होने के साथ-साथ सिंधु पाकिस्तान की भी सबसे लंबी नदी है। यह नदी भारत के 2 जिलों से होकर गुजरती है। ऐसे में भारत में भी इस नदी का अधिक महत्त्व है। इस लेख में हम सिंधु नदी और इससे जुड़ी अन्य फैक्ट्स को विस्तार से जानेंगे।
कहां से निकलती है सिंधु नदी
सिंधु नदी का उद्गम तिब्बत में मानसरोवर झील के नजदीक कैलाश पर्वत रेंज में ‘बोखर-चू’ नाम के ग्लेशियर से होता है। तिब्बत में यह नदी ‘सिंगी खंबन’ नाम से जानी जाती है, जिसका अर्थ 'शेर का मुख' होता है।
Related Stories
सिंधु नदी कितनी लंबी है
सिंधु नदी की कुल लंबाई की बात करें, तो यह कुल 3,180 किलोमीटर लंबी है। वहीं, भारत में इसकी लंबाई 1,114 किलोमीटर है। इसका कुल बेसिन एरिया 11.65 लाख वर्ग किलोमीटर में फैला हुआ है, जिसमें भारत में इसका 3.21 लाख वर्ग किलोमीटर एरिया आता है। ऐसे में सिंधु नदी भारत में महत्त्वपूर्ण स्थान रखती है। इसका कृषि के क्षेत्र में अहम स्थान है।
सिंधु नदी का जलमार्ग क्या है?
सिंधु नदी तिब्बत के पठार से निकलने के बाद उत्तर-पश्चिम दिशा में बहती है। यह भारत के केंद्र शासित प्रदेस लद्दाख में दमचोक के पास से प्रवेश करती है और लेह व कारगिल जिले से होते हुए बहती है। भारत से निकलने के बाद यह नदी चिल्लास के पास पाकिस्तान के गिलगित-बाल्टिस्तान एरिया में इंट्री लेती है। यहां से होते हुए सिंधु नदी दक्षिण दिशा में मुड़ जाती है और कराची के पास डेल्टा बनाते हुए अरब सागर में गिर जाती है।
सिंधु की सहायक नदियां
सिंधु में बाईं तरफ से मिलने वाली नदियां
चिनाब-यह सिंधु की सबसे बड़ी सहायक नदी है।
सतलुज-यह सिंधु की सबसे पूर्वी सहायक नदी है।
झेलम-यह नदी पाकिस्तान में भी बहती है।
इनके अलावा रावी, ब्यास, जास्कर और सुरु नदी भी इसकी सहायक नदियां हैं।
दाईं ओर से मिलने वाली नदियां
श्योक, गिलगित, हुंजा, काबुल, गोमल, स्वात और कुर्रम।
क्या थी सिंधु जल संधि,1960?
सिंधु नदी को लेकर भारत और पाकिस्तान के बीच विश्व बैंक द्वारा 1960 में समझौता कराया गया था। इसके तहत रावी, ब्यास, सतलज के पानी का पूरा नियंत्रण भारत को दिया गया है। वहीं,सिंधु, झेलम, चिनाब नदियों के पानी का मुख्य उपयोग पाकिस्तान को सौंपा गया है, हालांकि भारत इन नदियों से सीमित मात्रा में कृषि, सिंचाई और पनबिजली परियोजनाओं के लिए पानी का उपयोग कर सकता है। हालांकि, सिंधु नदी समझौते को लेकर विवाद भी रहता है।
