राष्ट्रीय गीत या राष्ट्रगान किसे पहले गाना है? सरकार ने जारी किये नए दिशा निर्देश

हाल ही में केंद्रीय गृह मंत्रालय ने राष्ट्रगीत और राष्ट्रगान को लेकर नए निर्देश जारी किये है। मंत्रालय ने यह भी साफ किया है कि यदि किसी कार्यक्रम में राष्ट्रीय गीत और राष्ट्रगान दोनों की प्रस्तुति की जा रही है तब पहले राष्ट्रगीत उसके बाद राष्ट्रगान का वादन किया जायेगा। 

Jul 15, 2026, 15:55 IST
राष्ट्रपति / राज्यपाल कार्यक्रम में है मौजूद तब क्या है प्रक्रिया
राष्ट्रपति / राज्यपाल कार्यक्रम में है मौजूद तब क्या है प्रक्रिया

केंद्र सरकार ने राष्ट्रीय गान ‘जन गण मन’ और राष्ट्रीय गीत ‘वंदे मातरम्’ के गायन और वादन को लेकर सभी राज्यों, केंद्र शासित प्रदेशों और केंद्रीय मंत्रालयों को नए निर्देश जारी किए हैं। केंद्रीय गृह मंत्रालय (MHA) ने अपने बयान में कहा है कि दोनों के प्रस्तुतीकरण से जुड़े सभी नियमों का हर सरकारी संस्थान और संगठन में सख्ती से पालन सुनिश्चित किया जाए। 

मंत्रालय ने आदेश ने क्या कहा 

हाल ही में जारी आदेश में मंत्रालय ने कहा कि राष्ट्रीय गान और राष्ट्रीय गीत गाते या बजाते समय उनके शब्द, लय और उच्चारण पूरी तरह सही होने चाहिए। इसके लिए दोनों का सही गायन और सही उच्चारण संबंधी दिशा-निर्देश गृह मंत्रालय की वेबसाइट पर उपलब्ध हैं।

राज्यों और मंत्रालयों से कहा गया है कि वे अपने अधीन आने वाले सभी विभागों, संस्थानों और संगठनों को इस संबंध में स्पष्ट निर्देश जारी करें। 

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पहले राष्ट्रगीत या राष्ट्रगान!

गृह मंत्रालय ने यह भी साफ किया है कि यदि किसी कार्यक्रम में ‘वंदे मातरम्’ और ‘जन गण मन’ दोनों प्रस्तुत किए जाते हैं, तो सबसे पहले ‘वंदे मातरम्’ गाया या बजाया जाएगा और उसके बाद ‘जन गण मन’ होगा। जिन राज्यों में राज्य गीत भी गाया जाता है, वहां भी पहले ‘वंदे मातरम्’, फिर राष्ट्रीय गान और उसके बाद अन्य निर्धारित प्रस्तुति होगी।

राष्ट्रपति / राज्यपाल कार्यक्रम में है मौजूद तब क्या है प्रक्रिया 

निर्देशों के अनुसार, ‘वंदे मातरम्’ का गायन या वादन राष्ट्रपति के आगमन और प्रस्थान वाले औपचारिक सरकारी समारोहों, नागरिक सम्मान (Civil Investiture) कार्यक्रमों, राष्ट्रपति के राष्ट्र के नाम संबोधन से पहले और बाद, राज्यपाल एवं उपराज्यपाल के आधिकारिक कार्यक्रमों तथा परेड में राष्ट्रीय ध्वज लाए जाने के दौरान किया जाएगा। विशेष परिस्थितियों में केंद्र सरकार के निर्देश पर अन्य अवसरों पर भी इसे प्रस्तुत किया जा सकता है।

मंत्रालय ने यह भी दोहराया कि ‘वंदे मातरम्’ गाए जाने के दौरान सभी लोगों को सावधान की मुद्रा में खड़ा होना चाहिए। 

पहले जारी किया गया था डिटेल प्रोटोकॉल 

गौरतलब है कि गृह मंत्रालय ने इसी वर्ष 28 जनवरी को पहली बार राष्ट्रीय गीत के गायन को लेकर विस्तृत प्रोटोकॉल जारी किया था। इसमें कहा गया था कि आधिकारिक समारोहों में 'वंदे मातरम्' के सभी छह अंतरे, जिनकी अवधि लगभग 3 मिनट 10 सेकंड है, निर्धारित अवसरों पर गाए जाएंगे। 

'वंदे मातरम्' के 150 वर्ष पूरे होने का जश्न 

केंद्र सरकार इस वर्ष 'वंदे मातरम्' के 150 वर्ष पूरे होने का जश्न मना रही है। इसी के मद्देनज़र मंत्रालय ने संविधान सभा के 24 जनवरी 1950 के उस ऐतिहासिक प्रस्ताव का भी उल्लेख किया, जिसके तहत ‘जन गण मन’ को भारत का राष्ट्रीय गान और स्वतंत्रता संग्राम में उसकी ऐतिहासिक भूमिका को सम्मान देते हुए ‘वंदे मातरम्’ को समान आदर और प्रतिष्ठा प्रदान की गई थी।

Bagesh Yadav

Senior Executive - Editorial

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