बिहार में हमें साल-दर-साल बाढ़ की खबरें सुनने को मिलती हैं। इससे हर साल बड़ी मात्रा में जान-माल का नुकसान होता है। इस कड़ी में यहां एक जिला ऐसी भी है, जो पूरी तरह बाढ़ से मुक्त जिला कहलाता है। यह अपनी ऊंचाई के लिए जाना जाता है, जिस वजह से यहां तक कभी बाढ़ का पानी पहुंच ही नहीं पाता है। कौन-सा है यह जिला, जानने के लिए पूरा लेख पढ़ें।
बिहार में कुल कितने जिले हैं
बिहार में कुल 38 जिले हैं, जो कि 9 प्रमंडलों में विभाजित हैं। इनमें क्षेत्रफल के हिसाब से सबसे बड़ा जिला पश्चिमी चंपारण है, जबकि क्षेत्रफल के मामले में सबसे छोटा जिला शिवहर है।
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बिहार का बाढ़-मुक्त जिला
बिहार के बाढ़-मुक्त जिले की बात करें, तो भौगोलिक और प्रशासनिक लिहाज से कैमूरजिला ऐसा क्षेत्र है, जिसे बिहार का सबसे सुरक्षित और बाढ़-मुक्त जिला माना जाता है। यह जिला उत्तर बिहार या अन्य मैदानी जिलों की तरह नदियों के पानी में नहीं डूबता है।
कैमूर जिला बाढ़-मुक्त क्यों है
कैमूर जिला अपनी भौगोलिक स्थिति की वजह से बाढ़-मुक्त है। यह विंध्याचल पर्वत श्रृंखला का पूर्वी हिस्सा है, जिसे 'कैमूर की पहाड़ियां'कहा जाता है। यहां की जमीन औसतन समुद्र तल से 300 से 450 मीटर तक ऊंची है। वहीं,पहाड़ी और ढलानदार इलाका होने के कारण यहां बारिश का पानी ठहरने के बजाय बहुत तेजी से बहकर कर्मनाशा और दुर्गावती जैसी नदियों के जरिए मैदानी हिस्सों की ओर निकल जाता है।
नहीं पड़ता है नेपाली नदियों का प्रभाव
उत्तर बिहार के जिले जैसेः दरभंगा, मधुबनी, सहरसा व सुपौल आदि में नेपाल से आने वाली कोसी, गंडक और बागमती जैसी नदियां तबाही मचाती हैं। वहीं, कैमूर दक्षिण-पश्चिम बिहार में स्थित है, जहां ऐसी किसी भी उफान मारने वाली बारहमासी नदी का प्रभाव नहीं पड़ता है।
नोटः अक्सर लोग पश्चिमी चंपारण को सबसे ऊंचा जिला मानकर बाढ़-मुक्त समझ लेते हैं। लेकिन, पश्चिम चंपारण में बिहार की सबसे ऊंची चोटी सोमेश्वर की पहाड़ी है, लेकिन गंडक नदी और नेपाल से आने वाली अन्य पहाड़ी नदियों के कारण इसके मैदानी व निचले इलाके हर साल भारी बाढ़ से प्रभावित होते हैं। वहीं, कैमूर पठारी ऊंचाई पर होने के कारण पूरी तरह से बाढ़ के खतरे से बाहर रहता है।
