Passport की तरह इन डाक्यूमेंट्स को भी नागरिकता का प्रमाण समझने की न करें भूल

Citizenship Proof: 14वें पासपोर्ट सेवा दिवस के मौके पर आयोजित कार्यक्रम में अधिकारियों ने कहा कि पासपोर्ट का मुख्य उद्देश्य विदेश यात्रा के दौरान व्यक्ति की राष्ट्रीयता साबित नहीं करता है। यह नागरिकता साबित करने वाला अंतिम दस्तावेज नहीं है।

Jun 25, 2026, 17:39 IST
गैर-भारतीयों को भी जारी होता है पासपोर्ट, ऐसे में उठेगा सवाल
गैर-भारतीयों को भी जारी होता है पासपोर्ट, ऐसे में उठेगा सवाल

भारत में नागरिकता के प्रमाणपत्रों को लेकर अक्सर चर्चा होती रहती है, इस बार विदेश मंत्रालय द्वारा पासपोर्ट को लेकर दिए गए स्पष्टीकरण के कारण यह मुद्दा एक बार फिर से सुर्ख़ियों में छाया हुआ है, दरअसल हाल ही में विदेश मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बयान दिया कि पासपोर्ट एक महत्वपूर्ण डॉक्यूमेंट जरूर है, लेकिन इसे नागरिकता का अंतिम प्रमाण नहीं माना जा सकता।  

विदेश मंत्रालय ने क्यों दिया यह स्पष्टीकरण?

14वें पासपोर्ट सेवा दिवस के मौके पर आयोजित कार्यक्रम में अधिकारियों ने कहा कि पासपोर्ट का मुख्य उद्देश्य विदेश यात्रा के दौरान व्यक्ति की राष्ट्रीयता साबित नहीं करता है। यह नागरिकता साबित करने वाला अंतिम दस्तावेज नहीं है। 

विदेश मंत्रालय का यह भी कहना है कि यदि कोई व्यक्ति गलत जानकारी देकर पासपोर्ट हासिल करता है, तो उसे बाद में रद्द या जब्त किया जा सकता है। 

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गैर-भारतीयों को भी जारी होता है पासपोर्ट, ऐसे में उठेगा सवाल

पासपोर्ट ऐक्ट 1967 के अनुसार, भारतीय पासपोर्ट ऐसे लोगों को भी जारी किया जाता ही जो भारत ने नागरिक नहीं है ऐसे में यह सवाल उठना लाजमी है कि पासपोर्ट नागरिकता का प्रमाण है, ऐसे में यह कहना गलत है कि सरकार ने अभी ही यह स्पष्ट किया है कि पासपोर्ट नागरिकता का प्रमाण नहीं है।

इन डाक्यूमेंट्स को नागरिकता का प्रमाण समझने की न करें भूल

देश में बड़ी संख्या में लोग आधार कार्ड, वोटर आईडी, पैन कार्ड और राशन कार्ड को नागरिकता का सबूत मानते हैं। हालांकि इन सभी डाक्यूमेंट्स का उद्देश्य और उपयोगिता अलग-अलग है, जैसे- 

आधार कार्ड (पहचान और निवास का प्रमाण)

वोटर आईडी (मतदान का अधिकार)

पैन कार्ड  (टैक्स संबंधी कार्य)

राशन कार्ड (सरकारी योजनाओं के लाभ के लिए) 

भारत में नागरिकता का क्या है आधार? 

भारत में नागरिकता (Citizenship) साबित करने के लिए कोई एक ऐसा दस्तावेज नहीं है जिसे हर स्थिति में अंतिम प्रमाण माना जाए। नागरिकता का निर्धारण कई कानूनी आधारों और सरकारी रिकॉर्ड के जरिए किया जाता है। 

जरूरत पड़ने पर जन्म प्रमाणपत्र, पारिवारिक रिकॉर्ड और अन्य आधिकारिक दस्तावेजों की जांच की जा सकती है।

नागरिकता अधिनियम 1955 तय करता है नियम

गृह मंत्रालय के अनुसार, भारत में नागरिकता का निर्धारण नागरिकता अधिनियम 1955 के तहत किया जाता है। इस कानून के अनुसार नागरिकता जन्म, वंश, पंजीकरण, प्राकृतिककरण या किसी क्षेत्र के भारत में विलय जैसे आधारों पर प्राप्त की जा सकती है। 

Bagesh Yadav

Senior Executive - Editorial

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