भारत में आपने अलग-अलग प्रसिद्ध व्यक्तियों के बारे में पढ़ा और सुना होगा। हालांकि, क्या आप जानते हैं कि भारत में एक व्यक्ति ऐसे भी हैं, जिन्हें भारत का ‘Sparrow Man’ भी कहा जाता है। इन्होंने अपना पूरा जीवन घरेलू गौरैया के लिए समर्पित कर दिया था। कौन हैं यह व्यक्ति, जानने के लिए पूरा लेख पढ़ें।
किसे कहा जाता है ‘Sparrow Man’
अब हम यह जान लेते हैं कि आखिर किस व्यक्ति को ‘Sparrow Man’ कहा जाता है। आपको बता दें कि
भारत में मोहम्मद दिलावर (Mohammed Dilawar) को Sparrow Man of India या 'गौरैया पुरुष' के नाम से भी जाना जाता है। उनका पूरा जीवन हमारे घरों के आंगनों में फुदकने वाली छोटी-सी चिड़िया, यानी घरेलू गौरैया को विलुप्त होने से बचाने के लिए समर्पित रहा है।
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दिलावर को क्यों कहते हैं ‘Sparrow Man’
मोहम्मद दिलावर को यह उपाधि उनके प्रमुख कार्यों की वजह से मिली है, जिसे इन बिंदुओं से समझा जा सकता है:
विलुप्त होती गौरैया को बचाने की शुरुआत
कभी हर घर की बालकनी और छतों पर दिखने वाली गौरैया की संख्या तेजी से कम होने लगी थी। इसके मुख्य कारण शहरीकरण, पक्के मकानों का निर्माण, खेतों में कीटनाशकों का अधिक उपयोग और मोबाइल टावरों का रेडिएशन थे। महाराष्ट्र के नासिक में रहने वाले मोहम्मद दिलावर ने इस खतरे को बहुत करीब से महसूस किया और इस छोटे से पक्षी को बचाने की एक बड़ी मुहिम शुरू कर दी।
'नेचर फॉरएवर सोसाइटी' की स्थापना
गौरैया संरक्षण को एक राष्ट्रीय स्तर का अभियान बनाने के लिए साल 2005 में उन्होंने 'नेचर फॉरएवर सोसाइटी' नामक गैर-सरकारी संगठन की स्थापना की। उन्होंने लोगों को जागरूक किया कि वे अपने घरों की बालकनी और खिड़कियों पर दाना-पानी के बर्तन और लकड़ी के Birdhouses लगाएं, ताकि गौरैया को सुरक्षित रहने की जगह मिल सके।
विश्व गौरैया दिवस (World Sparrow Day) की शुरुआत
प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए उनका सबसे महत्त्वपूर्ण योगदान 'विश्व गौरैया दिवस' की शुरुआत करना है। उन्हीं के अथक प्रयासों से पहली बार 20 मार्च 2010 को यह दिवस मनाया गया था। आज पूरी दुनिया में हर साल 20 मार्च को गौरैया संरक्षण के प्रति जागरूकता फैलाने के लिए यह दिवस मनाया जाता है।
क्या मिला है अंतरराष्ट्रीय सम्मान
बाघ या हाथी जैसे बड़े जानवरों को बचाने के लिए कई लोग काम करते हैं, लेकिन शहर के एक आम पक्षी को बचाने के लिए किए गए उनके इस निस्वार्थ प्रयास को वैश्विक स्तर पर सराहा गया। साल 2008 में प्रसिद्ध अंतरराष्ट्रीय पत्रिका 'टाइम' ने उन्हें अपने प्रतिष्ठित 'हीरोज ऑफ द एनवायरनमेंट' की लिस्ट में शामिल किया था।
