जब भी हम दिल्ली का नाम पढ़ते हैं, तो हमें इसके साथ NCT भी लिखा दिखता है। कई लोग इसके बारे में जानते हैं, जबकि कई लोगों को इस नाम की जानकारी नहीं है। क्या आप जानते हैं कि आखिर दिल्ली के साथ NCT क्यों लिखा जाता है ? यदि नहीं, तो इस लेख में हम इसकी फुल फॉर्म और इसके लिखने के पीछे के कारण के बारे में जानेंगे।
क्या होता है NCT का मतलब
सबसे पहले हम NCT के मतलब के बारे में जान लेते हैं। दरअसल, NCT का पूरा नाम National Capital Territory है। इसे हिंदी में 'राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र' के नाम से जाना जाता है। यदि कहीं पर 'दिल्ली एनसीटी'(NCT of Delhi) लिखा है, तो यहां दिल्ली की उस प्रशासनिक और भौगोलिक सीमा की बात हो रही है, जिसे भारत की राजधानी होने का विशेष दर्जा प्राप्त है।
हालांकि, कई बार लोग दिल्ली, नई दिल्ली और एनसीटी को एक ही समझ लेते हैं, लेकिन वास्तविक तौर पर प्रशासनिक और कानूनी नजरिए से इनमें अंतर है।
दरअसल, भारतीय संविधान के 69वें संशोधन अधिनियम (1991)के तहत दिल्ली को एक विशेष दर्जा दिया गया था। इसके तहत दिल्ली को आधिकारिक तौर पर "राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र दिल्ली" (NCT of Delhi) घोषित किया गया था। दिल्ली एक केंद्र शासित प्रदेश है, लेकिन अन्य केंद्र शासित प्रदेशों से अलग है। क्योंकि, इसके पास अपनी चुनी हुई विधानसभा, मुख्यमंत्री और मंत्रीपरिषद् होती है।
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किस प्रकार है शक्तियों का बंटवारा
दिल्ली में खुद की सरकार होती है, लेकिन यहां शक्तियों का बंटवारा है। यहां की पुलिस, लोक व्यवस्था और भूमि पर नियंत्रण केंद्र सरकार का है। केंद्र सरकार की तरफ से यहां एक उपराज्यपाल होता है।
नई दिल्ली, NCT और NCR में अंतर
नई दिल्ली पूरे भारत की राजधानी है, जो कि एनसीटी दिल्ली का हिस्सा है। यह दिल्ली का एक छोटा जिला है, जिसमें संसद भवन, राष्ट्रपति भवन और विदेशी दूतावास मौजूद हैं। वहीं, एनसीटी दिल्ली पूरा दिल्ली शहर है, जिसमें दिल्ली के सभी 11 जिले आते हैं। इसके अलावा एनसीआर एक बड़ा क्षेत्र है, जिसमें यूपी, हरियाणा और राजस्थान के कुछ जिलों को शामिल किया गया है।
क्यों बनाया गया था NCT?
दिल्ली को एनसीटी बनाने के पीछे का कारण प्रशासनिक जरूरत और लोगों की लोकतांत्रिक आकांक्षाएं थी। दिल्ली पूरे देश की राजधानी है। वहीं, यहां पीएम और राष्ट्रपति से लेकर विदेशी दूतावास तक मौजूद हैं। ऐसे में यहां की सुरक्षा बहुत जरूरी है। यदि दिल्ली को पूर्ण राज्य के रूप में रहने दिया जाता, तो राजनीतिक दलों और केंद्र के बीच टकराव की वजह से देश की प्रतिष्ठा और सुरक्षा को खतरा हो सकता था।
ऐसे में केंद्र सरकार ने दिल्ली की मुख्य शक्तियों को अपने पास रखा। वहीं, दूसरी तरफ 1956 से 1961 तक दिल्ली में कोई विधानसभा नहीं होती थी और यह केंद्र द्वारा शासित होती थी।
हालांकि, दिल्ली की बढ़ती आबादी के कारण उत्पन्न हुई समस्याओं के लिए स्थानीय सरकार की मांग हुई, जिसके बाद 'बालकृष्णन समिति' की सिफारिश पर एनसीटी का गठन किया गया। इससे दिल्ली के लोगों को अपने मन की सरकार चुनने का लोकतांत्रिक अधिकार मिला।
