भारत में कई ऐसी जगहें हैं जिनकी खूबसूरती दुनिया के बड़े-बड़े देशों को टक्कर देती है। यहां तक की उत्तराखंड में स्थित कई ऐसी जगहें है, जहां लोग और कॉलेज छात्र हर साल पहाड़ों के मजे और सुंदरता का आनंद लेने जाते है। क्या आप जानते है ऐसी ही एक जादुई और बेहद खूबसूरत जगह उत्तराखंड के बागेश्वर जिले में भी स्थित है, जिसे हम 'कौसानी' के नाम से जानते हैं।
कौसानी की बेहतरीन सुंदरता से काफी ज्यादा खुश होकर राष्ट्रपिता महात्मा गांधी ने इसे ‘भारत का मिनी स्विट्जरलैंड’ का नाम दिया। क्या आप जानना चाहते है, कि महात्मा गांधी ने इस जगह को ये नाम क्यो दिया? साथ ही, आइए जानते हैं कौसानी का इतिहास, इसकी खूबसूरती और छात्र यहां अपनी छुट्टियां कैसे बिता सकते हैं।
महात्मा गांधी और कौसानी का कनेक्शन
महात्मा गांधी साल 1929 में उत्तराखंड के दौरे पर गए थे। गांधी ने अपनी भागदौड़ और स्वतंत्रता संग्राम की व्यस्तता के बीच कुछ दिन कौसानी नाम की जगह पर आराम के लिए रूके थे। वह वहां केवल दो दिन के लिए रुकना चाहते थे। परंतु, कौसानी की शांति, साफ हवा और हिमालय की चोटियों की खूबसूरती को देखकर वह वहां करीब पूरे 14 दिनों के लिए रुक गए।
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महात्मा गांधी ने कौसानी को ‘भारत का स्विट्जरलैंड’ क्यो कहा?
कौसानी की खूबसूरती और शांति को देखते हुए गांधी ने आश्रम में प्रवास के दौरान अपनी एक किताब लिखी, जिसका नाम 'अनासक्ति योग' रखा था। उस किताब में गांधी ने वहां के पहाड़ों की तुलना स्विट्जरलैंड की खूबसूरत वादियों से की है। साथ ही, इसी कारण उन्होंने अपनी किताब में कौसानी को ‘भारत का स्विट्जरलैंड’ नाम देकर घोषित कर दिया था।
कौसानी की खूबसूरती को देख क्यों खिंचे चले आते हैं लोग?
क्या आप जानते है कौसानी समुद्र तल से लगभग 1890 मीटर की ऊंचाई पर स्थित एक शांत हिल स्टेशन है। इसकी खूबसूरती को देखने के लिए लोग काफी दूर-दराज से आना पसंद करते हैं। आइए जानते हैं इसकी खूबसूरती के कुछ मुख्य फैमस इलाके और नजारों के बारे में।
- हिमालय का भव्य/खूबसूरत नजारा: कौसानी से त्रिशूल, नंदा देवी और पंचचूली जैसी हिमालय की विशाल और बर्फ से ढकी चोटियों का 350 किलोमीटर लंबा स्पष्ट नजारा दिखाई देता है।
- सूर्योदय और सूर्यास्त का नजारा: क्या आप जानते है कौसानी में सुबह और शाम के समय जब सूरज की किरणें बर्फ से ढकी चोटियों पर पड़ती हैं, तो ऐसा लगता है, जैसे पहाड़ सोने के हो गए हों। इसे देखने के लिए लोग काफी दूर-दूर से आना पसंद करते है।
- घने देवदार और चाय के बागान: कौसानी के चारों ओर फैले देवदार के जंगल और हरी-भरी चाय के बागान इसकी सुंदरता में चार-चांद लगाते हैं। यहां की ताजी हवा में चाय की भीनी-भीनी खुशबू घुली रहती है, जो गांधी को काफी पसंद आई थी।
कौसानी में मुख्य घूमने वाले स्थल और जगहों की विशेषता
आप कौसानी यानी भारत का स्विट्जरलैंड घमने जा रहे है, तो आपके लिए यहां नीचे दी गई टेबल काफी काम की हो सकती है। इस टेबल में हमने आपके लिए कौसानी की खूबसूरत और फैमस जगहों के बारे में थोड़ा-थोड़ा विस्तार से बताया है।
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प्रमुख स्थल
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विशेषता / महत्व
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अनासक्ति आश्रम (गांधी आश्रम)
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यह आश्रम वह है जहां गांधी जी रुके थे। इसलिए इसका नाम गांधी आश्रम भी रखा गया था। आज यहां एक संग्रहालय और प्रार्थना कक्ष है, जहां शांति का अनुभव होता है।
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सुमित्रानंदन पंत वीथिका
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हिंदी साहित्य के महान कवि सुमित्रानंदन पंत की जन्मस्थली। यहां उनकी कविताओं और यादों को संजोया गया है।
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कौसानी चाय बागान
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यहां मीलों दूर तक फैले हरी चाय के बागान, जहां आप टहल सकते हैं। साथ ही, ताजी चाय का स्वाद ले सकते हैं।
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बैजनाथ मंदिर
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कौसानी से महज 16 किमी दूर गोमती नदी के तट पर स्थित 12वीं शताब्दी का ऐतिहासिक मंदिर समूह।
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स्टूडेंट्स और आम लोग कौसानी में वेकेशन कैसे प्लान करें?
कौसानी स्टूडेंट्स के लिए घुमने-फिरने और आम लोगों के लिए मानसिक शांति पाने का एक परफेक्ट डेस्टिनेशन है।
स्टूडेंट्स के लिए क्यों खास है यह जगह?
स्टूडेंट्स के लिए कौसानी एक बेहतरीन एजुकेशनल टूर के साथ-साथ घुमने के लिए एक बेहतरीन जगहों में से एक साबित होती है। छात्र यहां आकर घुमने के साछ महात्मा गांधी के विचारों, सुमित्रानंदन पंत के साहित्य और हिमालय की भौगोलिक संरचना को अच्छे से समझ सकते हैं। साथ ही, बजट-फ्रेंडली होने के कारण छात्र अपने ग्रुप के साथ यहां आसानी से आ कर घुम सकते हैं।
भारत के ‘मिनी स्विट्जरलैंड’ पर कैसे पहुंचें?
- हवाई मार्ग द्वारा: कौसानी जाने के लिए सबसे पास हवाई अड्डा पंतनगर का है। यह कौसानी से लगभग 165 किमी दूर है। वहां जाने के बाद आप वहां से टैक्सियां की सहायता से जा सकते हैं।
- रेल मार्ग द्वारा: भारत के ‘मिनी स्विट्जरलैंड’ पर जाने के लिए सबसे पास का रेलवे स्टेशन काठगोदाम है, जो लगभग 132 किमी दूर है। साथ ही, क्या आप जानते हैं दिल्ली और देश के अन्य हिस्सों से काठगोदाम के लिए सीधी ट्रेनें भी मौजूद हैं। रेलवे स्टेशन से आप बस या शेयरिंग कैब लेकर अल्मोड़ा होते हुए कौसानी पहुंच सकते हैं।
- सड़क मार्ग द्वारा: क्या आप जानते हैं दिल्ली से कौसानी की दूरी लगभग 400 किमी है। छात्र वहां जाने के लिए खुद की कार या आनंद विहार बस टर्मिनल से हल्द्वानी/काठगोदाम के लिए बस ले सकते हैं। साथ ही, वहां से आगे का सफर तय कर सकते हैं।
‘मिनी स्विट्जरलैंड’ जाने का सही समय
यदि आप भारत के ‘मिनी स्विट्जरलैंड’ जाना चाहते है, तो यहां हम आपके लिए परफेक्ट टाइम लेकर आए है। कौसानी जाने से पहले आप यहां देखें कि कब गर्मियों में जाना चाहिए और कब सर्दियों में जाना चाहिए।
- मार्च से जून - सुहावना मौसम
- सितंबर से दिसंबर - बर्फबारी और साफ हिमालय देखने के लिए
छात्र और लोग अपनी भागदौड़ से भरी जिंदगी से दूर, आराम और शांति पाने के लिए साथ ही, प्रकृति में कुछ पल आराम से आंनद लेने के लिए आप गांधी जी द्वारा फैमस भारत का ‘मिनी स्विट्जरलैंड’ यानी कौसानी घुम सकते हैं।
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