दिल्ली सल्तनत के इतिहास में ऐसे कई सुल्तान हुए जिनका शासन केवल कुछ दिनों या महीनों का ही रहा, क्योंकि वे अक्सर दरबारियों या सेनापतियों के हाथों की कठपुतली थे। अपने इस लेख में हम भारत के उस सुल्तान के बारे में जानेंगे, जिसने सिर्फ 35 दिन ही शासन चलाया था।
सबसे कम समय शासन करने वाला सुल्तान
जनवरी 1316 में शक्तिशाली सुल्तान अलाउद्दीन खिलजी की मौत के बाद उसके महत्वाकांक्षी सेनापति मलिक काफूर ने अलाउद्दीन के 6 वर्षीय नाबालिग बेटे शिहाबुद्दीन उमर को सुल्तान घोषित कर दिया था। सत्ता की पूरी कमान वास्तव में मलिक काफूर के हाथों में थी। गद्दी पर बैठने के मात्र 35 दिन बाद ही दरबारियों ने मलिक काफूर की हत्या कर दी। इसके बाद अलाउद्दीन के दूसरे बेटे मुबारक शाह ने शिहाबुद्दीन उमर को अंधा करके गद्दी से हटा दिया। इसे दिल्ली सल्तनत के सबसे छोटे कार्यकालों में गिना जाता है।
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1 महीना 16 दिन शासन करने वाला सुल्तान
तुगलक वंश के सुल्तान मुहम्मद शाह तृतीय के निधन के बाद जनवरी 1394 में उनका बेटा हुमायूं खान 'अलाउद्दीन सिकंदर शाह' की उपाधि के साथ सुल्तान बना। हालांकि, गद्दी पर बैठने के सिर्फ 1 महीने और 16 दिन बाद ही वह गंभीर रूप से बीमार पड़ा और उसकी मौत हो गई।
करीब 3 महीने शासन करने वाला सुल्तान
यह गुलाम वंश का 11वां और आखिरी सुल्तान था। साल 1290 में जब इसे सुल्तान बनाया गया, तब इसकी उम्र केवल 3 साल थी। इसका शासन मुश्किल से 3 महीने चला, जिसके बाद जलालुद्दीन फिरोज खिलजी ने इसे गद्दी से हटाकर खिलजी वंश की स्थापना कर दी।
सबसे कम समय तक शासन करने वाला राजवंश
दिल्ली सल्तनत पर शासन करने वाले पांच प्रमुख राजवंशों में सबसे कम समय तक राज करने वाला वंश खिलजी वंश था। इसका शासनकाल 1290 ई. से 1320 ई. तक यानि सिर्फ केवल 30 साल था। भले ही खिलजी वंश का शासन इतिहास में सबसे छोटा रहा, लेकिन अलाउद्दीन खिलजी के नेतृत्व में इसी वंश ने दक्षिण भारत तक अपना साम्राज्य फैलाया और बाजार नियंत्रण जैसी प्रशासनिक नीतियां लागू कीं।
