‘जैनेंद्र कुमार’ यह महज एक नाम नहीं, बल्कि संघर्ष की दुनिया में एक ऐसा नाम है, जिसने यह साबित कर दिया कि इंसान चाहें, तो कुछ भी हासिल कर सकता है। बस कड़ी मेहनत, लगन और जीतने का जुनून चाहिए। जैनेंद्र कुमार ने क्या कुछ नहीं देखा। परिवार जब आर्थिक तंगी से जूझ रहा था, तो उन्होंने घर की पूरी-पूरी जिम्मेदारी उठाई। उन्हें और उनके परिवार को झूठे मुकदमों में फंसाकर कई बार जेल भेजा गया। जमीन हड़पने की मंशा में कुछ बाहुबली लोगों ने जैनेंद्र के पिता पर NSA तक लगवा दी थी। जैनेंद्र बताते हैं कि जब वे गांव के मौहाल से दूर गर्वनमेंट जॉब की तैयारी के लिए इंदौर चले गए थे, उस वक्त उनका घर तक जला दिया गया था।
जब DSP बनने की कसम खाई
जैनेंद्र दिल्ली आए और दिल्ली में उन्होंने अपनी मां का हाथ थामा और कसम खाई कि चाहे जमीन-आसमान एक क्यों न करना पड़े, वे DSP बनकर ही लौटेंगे। साल 2024 में जैनेंद्र का सपना पूरा हुआ और MPPSC परीक्षा में 12वीं रैंक हासिल कर और DSP बन दुनिया को यह बता दिया कि हौंसले और इरादे अगर मजबूत हो, तो कुछ भी पाना नामुमकिन नहीं।
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आखिर कौन है जैनेंद्र कुमार निगम?
जैनेंद्र कुमार निगम का जन्म मध्य प्रदेश के भिंड जिले के छोटे से गांव में हुआ था। वह एक किसान परिवार से ताल्लुक रखते हैं। जैनेंद्र के पिता का नाम केशव कुमार निगम हैं, जो एक किसान हैं और मां का नाम कुसुम देवी हैं, जो घर की जिम्मेदारियां निभाती है। जैनेंद्र कुमार एक इंटरव्यू में बताते हैं कि पिताजी भी राज्य सिविल सेवा परीक्षा क्रैक करना चाहते थे, लेकिन परिवार की जिम्मेदारियों और आर्थिक तंगी की वजह से सपना पूरा न कर सकें। आज मैंने अपने पिता के सपने को पूरा किया और मुझे इस बात पर गर्व है। हालांकि जैनेंद्र कुमार का DSP बनने का सफर बिल्कुल भी आसान नहीं रहा।
झूठे मुकदमों में दो बार जा चुके हैं जेल
जैनेंद्र बताते हैं कि वे अलग-अलग झूठे मुकदमों में दो बार जेल जा चुके हैं। उन्होंने कई रातें दर्जनों अपराधियों के बीच जेल में गुजारी हैं। जेल का खाना और गंदा कंबल आज भी उन्हें याद हैं। जैनेंद्र ने मध्य प्रदेश सिविल सेवा परीक्षा (MPPSC) का फॉर्म भरा था। जब उनक प्रीलिम्स होना था, तो वे जेल में थे।
हथकड़ी पहनकर दिया था एग्जाम
जैनेंद्र अपना कड़वा अनुभव साझा करते हुए बताते हैं कि एग्जाम वाले दिन कुछ पुलिसकर्मियों हथकड़ी पहनाकर उन्हें एग्जाम सेंटर ले गए थे। उनके एक हाथ में हथकड़ी थी और दूसरे में पेन था। एग्जाम सेंटर पर सभी की निगाहें मुझे घूर रही थीं। साल 2021 में जेल से बेल पर बाहर आने के बाद उन्होंने इंदौर जाकर पढ़ाई की। साल 2024 में उन्हें सभी केस से बरी कर दिया गया और इसी साल उनका चयन DSP के पद पर भी हो गया था।
