‘शरण कांबले’ यह केवल एक नाम नहीं, बल्कि सफलता की जीती-जागती मिसाल है, जिन्होंने यह बताया कि मुश्किल से मुश्किल हालातों में भी अपने सपनों को पूरा किया जा सकता है। बस कुछ कर गुजरने का हौंसला और कड़ी मेहनत चाहिए। शरण के घर के हालात कभी अच्छे नहीं रहे। पिता घर चलाने के लिए मजदूरी का काम करते थे और मां सब्जियां बेचती थीं।
इसके बावजूद शरण ने हार नहीं मानी और साल 2020 में यूपीएससी सिविल सेवा परीक्षा (UPSC CSE) पास कर 542वीं रैंक हासिल की और IPS ऑफिसर बन गए। आज बेटे के इस मुकाम पर पहुंचने से पिता की आंखों में खुशी के आंसू हैं। शरण कांबले अपने परिवार और समाज के लिए ही नहीं, बल्कि पूरे देश के लिए एक प्रेरणा बन गए हैं। आइए उनकी सफलता की कहानी के बारे में जानें।
शरण के पिता खोदते थे गटर
शरण कांबले का जन्म महाराष्ट्र के सोलापुर में हुआ। वह बेहद साधारण परिवार से ताल्लुक रखते हैं। उनका बचपन एक कच्चे मकान में बीता, जहां न तो बिजली थी और न ही संसाधन। इस बात से अंदाजा लगाया जा सकता है कि घर के हालात बिल्कुल भी ठीक नहीं थे। शरण के पिता परिवार का पेट पालने के लिए गटर खोदने और मजदूरी का काम करते थे और माता सब्जी बेचने का काम करती थी।
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साल 2020 में शरण बनें IPS ऑफिसर
शरण भी अपनी पढ़ाई के साथ-साथ समय निकालकर उनके साथ सब्जी बेचने के लिए जाते थे और यही से ही उन्हें IPS बनने की प्रेरणा मिली, जिसके बाद साल 2019 में पहले यूपीएससी सीएपीएफ की परीक्षा पास की और ऑल इंडिया रैंक 8 हासिल की। शरण यहीं नहीं रुके। साल 2020 में फिर यूपीएससी सिविल सेवा परीक्षा (UPSC CSE) पास की और 542वीं रैंक हासिल की और IPS बन गए।
जब मिला था 20 लाख रुपये का पैकेज
शरण के पिता बताते हैं कि बेटा शुरू से ही पढ़ाई में रहा है और उन्होंने कभी पढ़ाई से समझौता नहीं किया। शरण बीटेक पास है। अपनी मेहनत से उन्होंने स्कॉलरशिप भी प्राप्त की। अपनी बीटेक की पढ़ाई पूरी करने के बाद शरण को एक प्रतिष्ठित कंपनी में 20 लाख रुपये का पैकेज मिला। पर उन्होंने यह ऑफर स्वीकार नहीं किया क्योंकि उनके मन में सिर्फ और सिर्फ IPS बनने का सपना पल रहा था। और आज उनकी उसी मेहनत का परिणाम हमारे सामने है।
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