आगरा में मेट्रो का सफर आसान बनाने के लिए लगातार काम किया जा रहा है। इसी बीच MG रोड स्थित रावली पुलिया पर एक ऐसा मेट्रो पुल तैयार हो रहा है, जो अपनी लंबाई और आधुनिक तकनीक के कारण खास होगा। करीब 10 करोड़ रुपये की लागत से बन रहे इस पुल में 60 मीटर लंबे और 360 टन वजनी स्टील गर्डर का उपयोग किया जाएगा। यह उत्तर प्रदेश का दूसरा सबसे लंबा मेट्रो पुल होगा। सबसे खास बात यह है कि इसे बनाने के लिए आसपास के मकानों और दुकानों को तोड़ने की जरूरत नहीं पड़ेगी।
10 नवंबर को रखा जाएगा 60 मीटर लंबा गर्डर
बता दें कि रावली पुलिया पर मेट्रो पुल के निचले हिस्से का ढांचा तैयार हो चुका है। उत्तर प्रदेश मेट्रो रेल कॉरपोरेशन (यूपीएमआरसी) की टीम ने इसे बनाने में करीब तीन महीने का समय लगाया है। अब 10 नवंबर को यहां 60 मीटर लंबे विशेष स्टील गर्डर को स्थापित करने की तैयारी है।
इस गर्डर को फरीदाबाद में छह महीने की मेहनत से तैयार किया गया है। इसे सुरक्षित तरीके से अपनी जगह पर रखने के लिए नई दिल्ली से छह विशेष क्रेन मंगाई जा रही हैं। इससे पहले लखनऊ मेट्रो में भी इसी लंबाई के स्टील गर्डर का इस्तेमाल किया जा चुका है।
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संकरी पुलिया पर निर्माण करना बड़ी चुनौती
रावली पुलिया पर मेट्रो का पुल बनाना आसान नहीं है। यहां रेलवे ट्रैक गहराई में गुजरता है। इसके अलावा पानी की तीन और सीवर की दो राइजिंग लाइन भी मौजूद हैं। आसपास मकान बने हैं और करीब आधा दर्जन दुकानें भी हैं। ऐसे में निर्माण के दौरान इन सभी चीजों का ध्यान रखना जरूरी है।
आमतौर पर मेट्रो के दो पिलरों के बीच 28 मीटर की दूरी होती है, लेकिन यहां इसे बढ़ाकर 60 मीटर किया गया है। इससे मौजूदा मकानों और दुकानों को तोड़ने की जरूरत नहीं पड़ेगी।
सामान्य गर्डर से कहीं ज्यादा भारी
आगरा मेट्रो के परियोजना निदेशक अरविंद कुमार के अनुसार, सामान्य गर्डर का वजन करीब 160 टन, लंबाई 16 मीटर और चौड़ाई तीन मीटर होती है। वहीं, रावली पुलिया पर लगने वाला विशेष गर्डर 360 टन वजनी है। इसकी लंबाई 60 मीटर, चौड़ाई 11 मीटर और गहराई 8 मीटर है।
हरीपर्वत और भगवान टाकीज पर भी बनेगा पुल
रावली पुलिया के बाद हरीपर्वत पुलिया पर भी 60 मीटर लंबा मेट्रो पुल बनाया जाएगा। इसके लिए काम शुरू हो चुका है। वहीं, भगवान टाकीज चौराहे पर 58 मीटर लंबा स्टील गर्डर पुल तैयार किया जाएगा।
पुश जैक तकनीक से रखा जाएगा गर्डर
गर्डर को स्थापित करने में पांच से आठ घंटे लग सकते हैं। पहले इसे क्रेन से ऊपर उठाया जाएगा और फिर चार जैक की मदद से पुश जैक तकनीक के जरिए निर्धारित स्थान पर खिसकाया जाएगा।
