तमिलनाडू, भारत के दक्षिणी हिस्से में मौजूद प्रमुख राज्यों में से एक है। यह राज्य अपनी विविधतापूर्ण संस्कृति, अनूठी परंपराएं और मंदिरों के लिए जाना जाता है। इसके अतिरिक्त, यहां नदियों का भी अपना अपवाह तंत्र है। इस कड़ी में तमिलनाडू में विभिन्न नदियों का प्रवाह होता है। हालांकि, क्या आप जानते हैं कि तमिलनाडू की सबसे बड़ी नदी कौन-सी है, यदि नहीं, तो इस लेख के माध्यम से हम इस बारे में जानेंगे।
तमिलनाडू की सबसे बड़ी नदी
तमिलनाडू की सबसे बड़ी नदी कावेरी नदी है। इसे दक्षिण भारत की गंगा के रूप में भी जाना जाता है। इसका इतिहास उठाकर देखें, तो प्राचीन तमिल साहित्य से लेकर आधुनिक समय तक यह तमिलनाडू की संस्कृति, कृषि, इतिहास और अर्थव्यवस्था को दर्शाती है।
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कहां से होता है कावेरी नदी का उद्गम
कावेरी नदी का उद्गम तमिलनाडू नहीं, बल्कि इसके पड़ोसी राज्य कर्नाटक के पश्चिमी घाट में स्थित कोडागु जिले में कूर्ग की तलकावेरी पहाड़ियों से होता है। यह जगह समुद्र तल से करीब 1,341 मीटर की ऊंचाई पर स्थित है।
कहां से करती है तमिलनाडू में प्रवेश
कावेरी नदी कर्नाटक में अपना सफर पूरा करने के बाद धर्मपुरी जिले के होगेनक्कल फॉल्स नामक जगह से तमिलनाडू में प्रवेश करती है। आपको बता दें कि इस वॉटर फॉल को अपनी खूबसूरती की वजह से 'भारत का नियाग्रा फॉल्स' भी कहा जाता है।
कितनी लंबी है नदी
कावेरी नदी की कुल लंबाई 800 किलोमीटर है। इसमें यह 416 किलोमीटर तमिलनाडू में कवर करती है। अंत में यह त्रिची के पास दो मुख्य शाखाओं में बंट जाती है, जो कि कोलिटम और कावेरी नाम से जानी जाती हैं। इसके बाद यह एक उपजाऊ डेल्टा का निर्माण करते हुए पुडुचेरी के पास बंगाल की खाड़ी में गिर जाती है।
कृषि के लिए है बहुत उपयोगी
कावेरी नदी से बनना वाला डेल्टा तमिलानाडू का सबसे अधिक उपजाऊ इलाका है। राज्य का तंजावुर, तिरुवरूर और नागपट्टिनम जैसे जिले चावल की खेती के लिए जाने जाते हैं, जो कि कावेरी के पानी की वजह से ही संभव है। यहां बड़े पैमाने पर चावल, गन्ना और केले की खेती की जाती है, जिससे बड़ी संख्या में किसानों की आजीविका चलती है।
कावेरी नदी पर बने बांध
त्रिची के पास कावेरी नदी पर कल्लनई बांध बना है, जो कि दुनिया के सबसे पुराने पानी मोड़ने वाले ढांचों में से एक है। इस बांध का निर्माण चोल वंश के महान राजा रहे करिकाल चोल द्वारा करवाया गया था। इसके अतिरिक्त, नदी पर मेट्टूर बांध भी है, जो कि सेलम जिले में है। यह राज्य का सबसे बड़ा बांध है, जो कि कृषि क्षेत्र को नियंत्रित रूप से पानी देता है।
नदी का सांस्कृतिक और धार्मिक महत्त्व
कावेरी नदी का सांस्कृतिक और धार्मिक महत्त्व भी है। इस नदी की कावेरी अम्मन देवी के रूप में पूजा की जाती है। नदी के तट पर प्रसिद्ध श्रीरंगम मंदिर बना हुआ है।
