राजस्थान देश का सबसे बड़ा राज्य है। यहां हमारा मतलब क्षेत्रफल से है, जो कि 34,22,39 वर्ग किलोमीटर में फैला हुआ है। यह राज्य भीषण गर्मी और शुष्क रेगिस्तान के लिए जाना जाता है। हालांकि, इसके सभी जिलों में से एक जिला ऐसा भी है, जो कि सर्वाधिक वर्षा के लिए भी विख्यात है। यह राजस्थान का झालावाड़ जिला है, जहां पूरे राज्य की तुलना में सबसे अधिक बारिश दर्ज की जाती है। इस लेख में हम विस्तार से जानेंगे।
राजस्थान में कुल कितने जिले और संभाग
राजस्थान में कुल जिलों की बात करें, तो इनकी संख्या 50 है। ये कुल 10 संभागों में आते हैं, जिनमें सीकर, पाली, बांसवाड़ा, जयपुर,जोधपुर, अजमेर, कोटा, उदयपुर, बीकानेर और भरतपुर शामिल है।
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झालावाड़ क्यों है सर्वाधिक वर्षा वाला जिला
झालावाड़ जिले का भौगिलिक स्वरूप और जलवायु परिस्थितियों की वजह से यहां वार्षिक रूप से औसत 95 से 100 सेंटीमीटर तक बारिश रिकॉर्ड की जाती है। इसके अतिरिक्त, यहां 40 दिनों तक बारिश होती है। इसे हम विस्तार से समझते हैंः
झालावाड़ जिले मानसून की बंगाल की खाड़ी की शाखा और अरब सागर की शाखा, दोनों का लाभ मिलता है।
बंगाल की खाड़ी की शाखा
बंगाल की खाड़ी वाली शाखा जब उत्तर-पूर्वी भारत होते हुए राजस्थान के दक्षिण-पूर्वी हिस्से में प्रवेश करती है, तो झालावाड़ के हाड़ौती पठार से टकराती है और हवाओं में नमी होने की वजह से बारिश होती है।
अरब सागर की शाखा
राजस्थान के पश्चिमी हिस्से में हमें अरावली पर्वतमाला देखने को मिलती है, जिससे अरब सागर से आने वाली मानसूनी हवाएं बिना टकराए आगे निकल जाती हैं और दक्षिण-पूर्वी हिस्से में स्थित झालावाड़ तक आते हुए अरवोध के कारण यहां बारिश का कारण बनती हैं।
भौगोलिक स्थिति का इस प्रकार पड़ता है प्रभाव
झालावाड़ जिला राजस्थान के दक्षिण-पूर्वी में स्थित है और अन्य जिलों की तुलना में इसकी अरब सागर से दूरी बहुत कम है। ऐसे में अरब सागर से आने वाली समुद्री हवाएं यहां अधिक नमी पहुंचाने का कारण बनती हैं, जिससे यहां बारिश की अनुकूल परिस्थितियां बनती हैं।
एक जरूरी स्पष्टीकरण
यहां एक चीज समझना जरूरी है। दरअसल, राजस्थान में सर्वाधिक वर्षा वाला स्थान माउंट आबू है, जहां 150 सेंटीमीटर तक बारिश होती है। वहीं, सर्वाधिक वर्षा वाला जिला झालावाड़ है। क्योंकि, यहां वार्षिक रूप से औसतन सबसे अधिक बारिश रिकॉर्ड की जाती है। यही वजह है कि कुछ लोग इसे ‘राजस्थान का मॉसिनराम’ या ‘राजस्थान का चेरापूंजी’ भी कहते हैं। क्योंकि, इन दोनों जिलों में ही भारत में सबसे अधिक वर्षा रिकॉर्ड की जाती है।
