उत्तर प्रदेश का वह जिला, जिसे कहा जाता है ‘भारत की आध्यात्मिक राजधानी’
उत्तर प्रदेश में आपने अलग-अलग जिलों के बारे में पढ़ा और सुना होगा। इनमें एक जिला ऐसा भी है, जिसे ‘भारत की आध्यात्मिक राजधानी’ भी कहा जाता है। कौन-सा है यह जिला, जानने के लिए पूरा लेख पढ़ें।
भारत के उत्तर में जब भी धर्म,ज्ञान,संस्कृति और इतिहास की बात होती है, तो इसमें उत्तर प्रदेश का नाम भी प्रमुखता से लिया जाता है। भारत का यह राज्य अपनी विविध संस्कृति और अनूठी परंपराओं के लिए पूरी दुनिया में जाना जाता है। यहां के प्रत्येक जिले की अपनी पहचान है, जिससे पूरे उत्तर प्रदेश को विशेष पहचान मिलती है। इस कड़ी में यहां एक जिला ऐसा भी है, जिसे ‘भारत की आध्यात्मिक राजधानी’ भी कहा जाता है। कौन-सा है यह जिला, जानने के लिए पूरा लेख पढ़ें।
किस जिले को कहते हैं ‘भारत की आध्यात्मिक राजधानी’
उत्तर प्रदेश के वाराणसी जिले को ‘भारत की आध्यात्मिक राजधानी’ कहा जाता है, जिसे काशी या बनारस के नाम से भी जाना जाता है।
इतिहास से भी पुराना शहर
गंगा नदी के पश्चिमी तट पर बसा वाराणसी दुनिया के सबसे प्राचीन और लगातार आबाद रहने वाले शहरों में से एक है। महान अमेरिकी लेखक मार्क ट्वेन ने इसके बारे में कहा था कि बनारस इतिहास से भी पुराना है, परंपराओं से भी पुराना है और किंवदंतियों से भी पुराना है। हिंदू मान्यताओं में इस शहर का अधिक महत्त्व है। इसे धर्म, आध्यात्म और मोक्ष की नगरी कहा जाता है।
सभी धर्मों का रहा है केंद्र
वाराणसी केवल हिंदू धर्म का ही नहीं, बल्कि बौद्ध और जैन धर्म का भी एक पवित्र केंद्र है। हिंदू धर्म के लिए यहां भगवान शिव का पवित्र काशी विश्वनाथ मंदिर स्थित है, जो 12 ज्योतिर्लिंगों में से एक है। बौद्ध धर्म की बात करें, तो वाराणसी से 10 किलोमीटर दूर सारनाथ स्थित है। यह वही स्थान है, जहां भगवान बुद्ध ने ज्ञान प्राप्ति के बाद अपना पहला उपदेश दिया था। इसके साथ ही, यह शहर जैन धर्म के 23वें तीर्थंकर भगवान पार्श्वनाथ की जन्मस्थली भी है।
शहर के घाट हैं प्रसिद्ध
इस शहर की असली आध्यात्मिक आत्मा गंगा के ऐतिहासिक घाटों में बसती है। यहां का दशाश्वमेध घाट अपनी शाम की गंगा आरती के लिए पूरी दुनिया में प्रसिद्ध है, जिसे देखने लाखों पर्यटक आते हैं। वहीं, मणिकर्णिका घाट और हरिश्चंद्र घाट को महाश्मशान कहा जाता है।
शहर का साहित्य, कला और संस्कृति
यह शहर संतों, कवियों और संगीतकारों की तपोभूमि रहा है। संत कबीर और संत रविदास यहीं पले-बढ़े थे। गोस्वामी तुलसीदास ने इसी शहर में महान महाकाव्य रामचरितमानस की रचना की थी। भारतीय शास्त्रीय संगीत का मशहूर बनारस घराना भी इसी शहर की देन है। शिक्षा के क्षेत्र में यहां स्थित बनारस हिंदू विश्वविद्यालय एशिया के सबसे बड़े आवासीय विश्वविद्यालयों में से एक है।
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