राजस्थान राज्य क्षेत्रफल के हिसाब से भारत का सबसे बड़ा राज्य है। यहां का गौरवशाली और समृद्ध इतिहास इसे अन्य राज्यों से अलग बनाता है। इस राज्य को राजाओं का गढ़ भी कहा जाता है, जहां आज भी ऐतिहासिक और प्रसिद्ध किले देखे जा सकते हैं। राज्य में अलग-अलग जिले अपनी विशेषताओं की वजह से जाने जाते हैं। हालांकि, इनमें एक जिला ऐसा भी है, जहां सबसे पहले सूर्योदय और सूर्यास्त होता है।
सबसे पहले सूर्योदय और सूर्यास्त वाला जिला
राजस्थान का धौलपुर ऐसा इकलौता जिला है, जहां सबसे पहले सूर्योदय और सूर्यास्त होता है। यह
राजस्थान के पूर्वी छोर पर स्थित एक ऐतिहासिक और भौगोलिक रूप से महत्त्वपूर्ण जिला है, जो कि उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश की सीमाओं से सटा हुआ है। यह जिला राज्य की पूर्वी सीमा का द्वार माना जाता है।
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सबसे पहले सूर्योदय और सूर्यास्त का भौगोलिक कारण
धौलपुर राजस्थान का सबसे पूर्वी जिला है, जहां 77 डिग्री 53 मिनट पूर्वी देशांतर पर स्थित सिलौना गांव है। पृथ्वी पश्चिम से पूर्व दिशा की ओर घूमती है, इसलिए जो स्थान जितना पूर्व में होगा, सूर्य की किरणें सबसे पहले वहीं पड़ेंगी।
जैसलमेर से समय का अंतर
धौलपुर पूर्वी छोर पर है, जबकि जैसलमेर पश्चिमी छोर पर है। इनके बीच लगभग 36 मिनट का समय अंतर होता है। यानी, धौलपुर में जैसलमेर से लगभग 36 मिनट पहले सूरज उगता है और ढलता है। यदि धौलपुर में सुबह 6:00 बजे सूर्योदय होता है, तो जैसलमेर में सूर्योदय लगभग सुबह 6:35 से 6:36 बजे होगा।
कहा जाता है 'रेड डायमंड सिटी'
आपको बता दें कि धौलपुर को पूरे भारत में 'रेड डायमंड' के नाम से जाना जाता है। यहां पाया जाने वाला विशेष प्रकार का लाल बलुआ पत्थर बेहद प्रसिद्ध है। आपको बता दें कि दिल्ली का लाल किला, आगरा का किला, राष्ट्रपति भवन और पुराना संसद भवन जैसी ऐतिहासिक इमारतों के निर्माण में धौलपुर के लाल पत्थर का ही इस्तेमाल किया गया है। आज भी यह पत्थर इन इमारतों की शान बना हुआ है। दिल्ली का लाल किला लाल बलुआ पत्थर की वजह से ही कहा जाता है, जो कि राजस्थान के धौलपुर का पत्थर है। यह पत्थर अपनी मजबूती और रंग, दोनों के लिए ही प्रसिद्ध है।य़
धौलपुर का इतिहास और रियासत
धौलपुर को लेकर माना जाता है कि इसकी स्थापना 11वीं शताब्दी में तोमर वंश के राजा धवल देव ने की थी। उनके नाम पर ही इसका नाम 'धौलपुर' पड़ा। ब्रिटिश काल में यह एक प्रमुख जाट रियासत हुआ करती थी, जिसके अंतिम शासक महाराजा राणा उदयभान सिंह थे।
आजादी के बाद धौलपुर रियासत का विलय मत्स्य संघ में हुआ और बाद में यह राजस्थान का हिस्सा बनी। 15 अप्रैल 1982 को भरतपुर से अलग करके धौलपुर को राजस्थान का 27वां जिला बनाया गया था। धौलपुर में कुल 7 तहसीलें आती हैं, जो कि इस प्रकार हैंः
-धौलपुर
-बाड़ी
-बासेड़ी
-राजाखेड़ा
-सैपऊ
-सरमथुरा
-मनियां
इनमें यदि सबसे बड़ी तहसील की बात करें, तो यह राजाखेड़ा है। यह चंबल नदी कि किनारे बसी हुहै, जो कि धौलपुर जिला मुख्यालय से करीब 36 किलोमीटर दूर है।
राजस्थान का इतिहास
प्राचीन काल में यह क्षेत्र सिंधु घाटी सभ्यता के प्रमुख केंद्रों (जैसे कालीबंगा) में से एक था। मध्यकाल में यहां मेवाड़, मारवाड़ और आमेर जैसे कई राजपूत राजवंशों का शासन रहा। महाराणा प्रताप और पृथ्वीराज चौहान जैसे पराक्रमी योद्धाओं ने अपनी मातृभूमि की रक्षा के लिए अद्वितीय साहस दिखाया।
मुगल और ब्रिटिश काल के दौरान भी यहां की रियासतों ने अपनी सांस्कृतिक पहचान बनाए रखी। आजादी के बाद मार्च 1948 से अप्रैल 1956 के बीच 7 चरणों में 19 देशी रियासतों और 3 ठिकानों के एकीकरण से आधुनिक राजस्थान राज्य का गठन हुआ।
राजस्थान में चार दिशाओं के चार जिले
राजस्थान के चारों भौगोलिक छोरों पर स्थित अंतिम चार जिले इस प्रकार हैं:
सबसे पूर्वी जिला: धौलपुर, जहां राज्य में सबसे पहले सूर्योदय और सूर्यास्त होता है।
सबसे पश्चिमी जिला: जैसलमेर, क्षेत्रफल की दृष्टि से राज्य का सबसे बड़ा जिला।
सबसे उत्तरी जिला: श्रीगंगानगर, इसे राजस्थान का 'अन्न का कटोरा' भी कहा जाता है।
सबसे दक्षिणी जिला: बांसवाड़ा, इसे 'सौ द्वीपों का शहर' भी कहा जाता है।
