उत्तर प्रदेश देश का चौथा सबसे बड़ा राज्य है। यह राज्य जितना आर्थिक और सामाजिक रूप से महत्त्वपूर्ण है, उतना ही इसका राजनीतिक महत्त्व भी है। ऐसा कहा भी जाता है कि केंद्र की राजनीति का रास्ता उत्तर प्रदेश से ही होकर गुजरता है। इस कड़ी में राज्य स्तर पर पंचायत चुनाव बहुत ही अहम माने जाते हैं।
पंचायत चुनाव को लेकर यहां के गांवों में सियासत एक बार फिर गरमाना शुरू हो गई है। ग्राम प्रधान, क्षेत्र पंचायत और जिला पंचायत सदस्य पदों के लिए संभावित दावेदार अपने-अपने इलाके में एक्टिव हो रहे हैं। हालांकि, यहां यह जानना जरूरी है कि यूपी में ग्राम पंचायत चुनाव के लिए कम से कम उम्र और योग्यताएं क्या हैं? इस लेख में हम विस्तार से जानेंगे।
ग्राम प्रधान बनने के लिए न्यूनतम उम्र
उत्तर प्रदेश में ग्राम प्रधान का चुनाव लड़ने और पद संभालने के लिए न्यूनतम आयु 21 वर्ष निर्धारित की गई है। उत्तर प्रदेश पंचायती राज अधिनियम के तहत केवल उम्र ही नहीं, बल्कि ग्राम प्रधान बनने के लिए कई अन्य शैक्षणिक, सामाजिक और कानूनी योग्यताएं होना अनिवार्य है।
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ग्राम प्रधान बनने के लिए मुख्य योग्यताएं
-ग्राम प्रधान चुनाव लड़ने की कोई अधिकतम आयु सीमा नहीं है।
-उम्मीदवार का नाम उसी ग्राम पंचायत की आधिकारिक Voter List में पंजीकृत होना अनिवार्य है, जहां से उसे चुनाव लड़ना है।
क्या है शैक्षणिक योग्यता
-वर्तमान नियमों के मुताबिक, उत्तर प्रदेश में ग्राम प्रधान बनने के लिए कोई न्यूनतम शैक्षणिक योग्यता जैसे 8वीं या 10वीं पास होना अनिवार्य नहीं है। कोई भी पढ़ना-लिखना जानने वाला व्यक्ति भी चुनाव लड़ सकता है। हालांकि, उम्मीदवार का भारत का नागरिक होना अनिवार्य है।
श्रेणी और आरक्षण संबंधी नियम
यदि कोई सीट किसी विशेष वर्ग,जैसे SC,ST, OBC या महिला के लिए आरक्षित है, तो उम्मीदवार का उस वर्ग से संबंधित होना और वैध जाति प्रमाण पत्र जमा करना अनिवार्य होता है। वहीं, सामान्य सीट से किसी भी वर्ग का 21 वर्ष से अधिक आयु का पात्र व्यक्ति चुनाव लड़ सकता है।
कौन चुनाव नहीं लड़ सकता
अह सवाल है कि आखिर कौन पंचायत चुनाव नहीं लड़ सकता है ? उत्तर प्रदेश पंचायती राज अधिनियम के तहत नीचे गए कारणों से व्यक्ति ग्राम प्रधान का चुनाव लड़ने के लिए अयोग्य माना जाता है:
-केंद्र या राज्य सरकार, किसी सरकारी निकाय या पंचायत के अधीन किसी लाभ के पद पर कार्यरत व्यक्ति चुनाव नहीं लड़ सकता। पहले उसे पहले पद से इस्तीफा देना होगा।
-यदि व्यक्ति को किसी सक्षम न्यायालय द्वारा मानसिक रूप से अस्वस्थ या दिवालिया घोषित किया गया हो।
-यदि व्यक्ति को किसी गंभीर आपराधिक मामले में अदालत द्वारा 6 महीने या उससे अधिक की सजा सुनाई गई हो।
-यदि उम्मीदवार पर ग्राम पंचायत या सरकार का कोई Tax या शुल्क बकाया हो और उसने उसका भुगतान न किया हो।
-यदि व्यक्ति ने ग्राम सभा या ग्राम ग्राम पंचायत की जमीन पर अवैध कब्जा किया हो।
