यदि आप से पूछा जाए कि भारत का राष्ट्रीय पशु कौन-सा है, तो आपका जवाब बाघ यानि टाइगर होगा। हालांकि, यदि आपसे पूछा जाए कि इससे पहले भारत का राष्ट्रीय पशु कौन था, तो आप शायद ही बता पाएं। बहुत ही कम लोग हैं, जिन्हें इस बारे में जानकारी है कि टाइगर से पहले भारत का राष्ट्रीय पशु कौन था और बाद में टाइगर को राष्ट्रीय पशु क्यों बनाया गया? इस लेख में हम विस्तार से जानेंगे।
टाइगर से पहले कौन था राष्ट्रीय पशु
बाघ को राष्ट्रीय पशु घोषित करने से पहले एशियाई शेर यानि कि Lion भारत का राष्ट्रीय पशु हुआ करता था। दरअसल, 1969 में 'इंडियन बोर्ड फॉर वाइल्डलाइफ' (IBWL) की सिफारिश पर शेर को राष्ट्रीय पशु चुना गया था।
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बाघ कब बना राष्ट्रीय पशु
साल 1972 में 18 नवंबर को राष्ट्रीय पशु का दर्जा एशियाई शेर से बदलकर Bengal Tiger को दिया गया। इसके बाद अप्रैल 1973 में आधिकारिक रूप से Project Tiger की शुरुआत हुई।
क्यों बदला गया राष्ट्रीय पशु
राष्ट्रीय पशु को बाघ करने के पीछे वैज्ञानिक, भौगोलिक और संरक्षण से जुड़े महत्त्व पूर्ण कारण थे:
बाघों की उपस्थिति
एशियाई शेर भारत में केवल गुजरात के गिर जंगलों तक सीमित थे और आज भी यही पाए जाते हैं। वहीं, बंगाल टाइगर उत्तराखंड के जंगलों, उत्तर भारत के मैदानी इलाकों, मध्य भारत, पूर्वांचल, दक्षिण भारत और पूर्वोत्तर राज्यों के जंगलों तक मिलता है। ऐसे में यह देखा गया कि राष्ट्रीय प्रतीक किसी एक राज्य तक नहीं, बल्कि पूरे देश में पाए जाने वाला पशु होना चाहिए।
बाघों की घट रही थी संख्या
आपको बता दें कि 20वीं सदी की शुरुआत में भारत में 40,000 बाघ थे, लेकिन शिकार व राजा-महाराजाओं और अंग्रेजों के समय में खेल के लिए शिकार यानि कि Trooper Trophy के कारण 1972 में बाघों की संख्या घटकर महज 1,827 रह गई थी। ऐसे में बाघ को राष्ट्रीय पशु घोषित करने पर इसका संरक्षण बढ़ा।
1973 में हुई प्रोजेक्ट टाइगर की शुरुआत
बाघ को राष्ट्रीय पशु घोषित करने का लिंक सबसे बड़ी वन्यजीव संरक्षण योजना प्रोजेक्ट टाइगर से था। जंगल की फूड चेन में बाघ सबसे ऊपर होता है। ऐसे में विशेषज्ञों का मानना था कि यदि बाघ को बचा लिया जाएगा, तो पूरा जंगल, नदियां, शाकाहारी जीव और Ecosystem भी बच जाएगा।
