असम सरकार ने पहली बार 01 सितंबर 2017 को सशस्त्र बल विशेषाधिकार कानून (अफस्पा) के तहत अपने अधिकारों का प्रयोग करते हुए समूचे राज्य को छह महीने के लिए अशांत घोषित किया.
राज्य के गृह और राजनीतिक विभाग द्वारा जारी अधिसूचना में असम को छह महीने के लिए अशांत घोषित कर दिया गया. अशांत क्षेत्रों में तैनात सुरक्षा बलों को बिना किसी वारंट के गिरफ्तारी, तलाशी लेने और यहां तक कि किसी को गोली मारने का अधिकार होता है.
अफस्पा की धारा तीन के अनुसार इसे उन जगहों पर लागू किया जा सकता है जहां नागरिक शक्तियों के साथ सशस्त्र बलों का प्रयोग जरूरी होता है.
केंद्र और राज्य सरकार, दोनों ही इस कानून के तहत किसी इलाके को अशांत क्षेत्र घोषित कर सकती है. असम को पहली बार 1990 में अशांत क्षेत्र घोषित किया गया था. उस समय राज्य में प्रतिबंधित उग्रवादी संगठन उल्फा की बड़े पैमाने पर हिंसा देखी गयी थी.
सशस्त्र बल विशेषाधिकार कानून (अफस्पा)
• सशस्त्र बल विशेषाधिकार कानून (अफ्सपा) 1958 में संसद द्वारा पारित किया गया था और तब से यह कानून के रूप में काम कर रही है.
• आरंभ में मणिपुर, मेघालय, मिज़ोरम, त्रिपुरा, अरुणाचल प्रदेश, असम में भी इसे लागू किया गया था लेकिन मणिपुर सरकार ने वर्ष 2004 में राज्य के कई हिस्सों से इसे हटा दिया गया.
• जम्मू-कश्मीर में सशस्त्र बल विशेषाधिकार कानून (अफ्सपा) 1990 में लागू किया गया था.
• इस कानून के तहत सेना को किसी भी व्यक्ति को बिना कोई वारंट के तलाशी या गिरफ्तार करने का विशेषाधिकार है.
• सशस्त्र बल विशेषाधिकार कानून (अफ्सपा) के तहत सेना के जवानों को कानून तोड़ने वाले व्यक्ति पर फायरिंग का भी पूरा अधिकार प्राप्त है.
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