केंद्रीय मंत्रिमंडल ने 16 अगस्त 2017 को झारखंड और बिहार में उत्तरी कोयल जलाशय परियोजना के बकाया काम को फिर से प्रारंभ करने के लिए 1622.27 करोड़ रुपये की मंजूरी दी है. यह परियोजना तीन वर्षों में पूरी होगी. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में केंद्रीय कैबिनेट की हुई बैठक में यह फैसला हुआ.
मंत्रिमंडल ने बांध के जल स्तार को पहले के परिकल्पित स्तखर के मुकाबले सीमित करने का भी फैसला किया ताकि कम इलाका बांध के डूब क्षेत्र में आए और बेतला राष्ट्री य उद्यान और पलामू टाइगर रिजर्व को बचाया जा सके. यह परियोजना सोन नदी की सहायक उत्तडरी कोयल नदी पर स्थित है जो बाद में गंगा नदी में जाकर मिलती है. उत्त री कोयल जलाशय झारखंड राज्यै में पलामू और गढ़वा जिलों के अत्यंलत पिछड़े जनजातीय इलाके में स्थित है. इसका निर्माण कार्य मूलत: वर्ष 1972 में प्रारंभ हुआ और वर्ष 1993 में बिहार सरकार के वन विभाग ने इसे रुकवा दिया. तब से बांध का निर्माण कार्य ठप्प पड़ा हुआ था.
इस परियोजना के तहत 67.86 मीटर ऊंचे और 343.33 मीटर लंबे कंक्रीट बांध (मंडल बांध) का निर्माण कराया जाना था.. इसकी क्षमता 1160 मिलियन क्यूेबिक मीटर (एमसीएम) जल संग्रह करने की निर्धारित की गयी थी. इसके अलावा परियोजना के तहत नदी के बहाव की निचली दिशा में मोहनगंज में 819.6 मीटर लंबा बैराज और बैराज के दांये और बांये तट से दो नहरें सिंचाई के लिए वितरण प्रणालियों समेत बनायी जानी थीं. बांध की ऊंचाई घटाकर 341 मीटर किये जाने से मंडल बांध की जल संग्रहण क्षमता अब 190 एमसीएम होगी. फैसले के तहत शेष बचे कार्यों के 1013.11 करोड़ रुपये के सामान्य घटकों का वित्त पोषण केंद्र सरकार द्वारा पीएमकेएसवाइ कोष से अनुदान के रूप में किया जायेगा.
परियोजना के पूरा हो जाने पर झारखंड के पलामू और गढ़वा जिलों के साथ-साथ बिहार के औरंगाबाद और गया जिलों के सबसे पिछड़े और सूखे की आशंका वाले इलाकों में 111,521 हैक्टेायर जमीन की सिंचाई की व्यरवस्थाव की जा सकेगी. फिलहाल अधूरी परियोजना से 71,720 हैक्टेायर जमीन की पहले ही सिंचाई हो रही है. पूर्ण हो जाने पर इससे 39,801 हैक्टेययर अतिरिक्तै भूमि की सिंचाई होने लगेगी. इसकी कुल सिंचाई क्षमता 1,11,521 हेक्टेयर है. जिसमें बिहार में सिंचाई क्षमता 91,917 हेक्टेयर है और झारखंड में सिंचाई क्षमता 19,604 हेक्टेयर है.
परियोजना की कुल लागत अभी तक 2391.36 करोड़ रुपये आंकी गई है. अभी तक 769.09 करोड़ रुपये की राशि इस परियोजना पर खर्च की गई है. केन्द्रीय मंत्रिमंडल ने तीन वित्त वर्षों के दौरान 1622.27 करोड़ रुपये की अनुमानित लागत से झारखंड और बिहार में उत्तरी कोयल जलाशय परियोजना के शेष बचे कार्यों को पूरा करने के प्रस्ताव को मंजूरी दी है. शेष बचे कार्यों के 1013.11 करोड़ रुपये के सामान्य घटकों का वित्त पोषण केन्द्र सरकार द्वारा पीएमकेएसवाई कोष से अनुदान के रूप में किया जाएगा.
केन्द्र सरकार बिहार और झारखंड राज्यों से अनुदान के रूप में प्राप्त पीएमकेएसवाई के तहत दीर्घकालिक सिंचाई कोष (एलटीआईएफ) से 365.5 करोड़ रुपये तक (बिहार-318.64 करोड़ रुपये और झारखंड-46.86 करोड़ रुपये) के शेष बचे कार्यों की कुल लागत के 60 प्रतिशत का भी वित्त पोषण करेगी. कैबिनेट ने परियोजना प्रबंधन सलाहकार (पीएमसी) के रूप में जल संसाधन, नदी विकास एवं गंगा संरक्षण मंत्रालय के अधीनस्थ एक केन्द्रीय सार्वजनिक क्षेत्र उपक्रम (सीपीएसयू) मेसर्स वापकॉस लिमिटेड द्वारा टर्नकी आधार पर परियोजना के शेष बचे कार्यों के क्रियान्वयन को भी मंजूरी दी.
स्रोत(पीआईबी)
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