केंद्र सरकार ने 16 अगस्त 2017 को अंडमान निकोबार द्वीप समूह के वन और बागान विकास निगम लिमिटेड (एएनआईएफपीडीसीएल) को बंद करने का फैसला किया है. प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की अध्यक्षता में यहां हुई केंद्रीय मंत्रिमंडल की आर्थिक मामलों की समिति ने यह फैसला किया. केंद्रीय मंत्रिमंडल की बैठक में एएनआईएफपीडीसीएल को बंद करने के प्रस्ताव को मंजूरी देने के साथ ही कर्मचारियों की देनदारियों के निपटारे का भी निर्णय लिया गया.
उपर्युक्त उपक्रम को बंद कर देने से भारत सरकार की ओर से एएनआईएफपीडीसीएल को मिलने वाले अनुत्पादक ऋणों को बंद करने में मदद मिलेगी तथा इससे परिसंपत्तियों का और ज्यादा उत्पादक इस्तेमाल करना संभव हो पाएगा.
जो कर्मचारी स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति योजना (वीआरएस) अथवा स्वैच्छिक पृथक्करण योजना (वीएसएस) के इच्छुक हैं उनकी देनदारी का निपटारा औद्योगिक विवाद अधिनियम 1947 के तहत किया जाएगा. फिलहाल, मौजूदा समय में 836 कर्मचारी कार्यरत हैं. यह उद्यम वर्ष 2001 के बाद से हानि वाला उद्यम बन गया था. नतीजतन यह अपने कर्मचारियों के वेतन और भत्तों का भुगतान करने में सक्षम नही रह गया था. केंद्र ने इसे वित्तीय मदद भी दी फिर भी इसका घाटा बढता ही जा रहा था.
इसमें धनराशि डालकर निम्नालिखित तरीके से इसे बंद किया जाएगा:
• वर्ष 2007 के अनुमानित वेतनमान पर कार्यरत समस्त कर्मचारियों की वीएसएस के वित्तन पोषण और अन्य देनदारियों की अदायगी के लिए भारत सरकार की ओर से बजटीय सहायता के जरिए 125.72 करोड़ रुपये की राशि डाली जाएगी.
• निगम को बंद करने के बाद 31 मार्च 2017 को देय ब्याज पर रोक लगाने के साथ-साथ एएनआईएफपीडीसीएल को भारत सरकार की ओर से दिए गए 186.83 करोड़ रुपये के ऋणों और 185.18 करोड़ रुपये के अर्जित ब्यााज को बट्टे खाते में डालना.
• मेटल स्क्रैप ट्रेडिंग कॉरपोरेशन लिमिटेड (एमएसटीसी लिमिटेड) के जरिए एएनआईएफपीडीसीएल की चल परिसंपत्तियों (संयंत्र एवं मशीनरी, विद्युत उपकरण, वाहन एवं कार्यालय उपकरण, फर्नीचर एवं फिक्सचर, हाथी एवं पशुधन, बागान एवं अन्यी तैयार माल इत्याादि) की नीलामी करना.
पृष्ठभूमिः
भारत सरकार के एक सार्वजनिक क्षेत्र उपक्रम एएनआईएफपीडीसीएल की स्थापना इस द्वीप समूह में वानिकी संबंधी बागानों के विकास एवं प्रबंधन के उद्देश्य के साथ वर्ष 1977 में हुई थी. एएनआईएफपीडीसीएल तीन मुख्य परियोजनाओं यथा वानिकी परियोजना, रेड ऑयल पाम (आरओपी) और कटछल रबर परियोजना (केआरपी) का संचालन करता रहा है. वानिकी परिचालन इस निगम की मुख्य गतिविधियों में शामिल थे और इसने कुल राजस्व में लगभग 75 प्रतिशत का योगदान दिया.
उच्चतम न्यायालय द्वारा 10 अक्टूबर 2001 और 7 मई 2002 को सुनाए गए फैसले के मद्देनजर वानिकी गतिविधियों पर रोक लगाए जाने के कारण एएनआईएफपीडीसीएल वर्ष 2001 से ही घाटे वाले उद्यम में तब्दील हो गया है. निगम के कर्मचारियों को वेतन वितरण के साथ-साथ वैधानिक भुगतान सुनिश्चित करने के लिए भारत सरकार ने ब्याज वाले ऋण के रूप में एएनआईएफपीडीसीएल को वित्तीय सहायता मुहैया कराई.
पिछले कुछ वर्षों के दौरान विभिन्न समितियां गठित की गईं और मंत्रालय द्वारा समय-समय पर प्रोफेशनल एजेंसियों की सेवाएं ली गईं और उन्होंने कर्मचारियों की उचित संख्या तय करने सहित उन सभी संभावनाओं पर व्यापक दृष्टि से गौर किया है जिनका उपयोग वन निगम के पुनरुद्धार के लिए किया जा सकता है.
स्रोत(पीआईबी)
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