केंद्र सरकार ने संकटजनक कचरा प्रबंधन नियम, 2016 को अधिसूचित किया

Apr 5, 2016, 15:43 IST

यह पहली बार है जब नियम में जोखिम वाले कचरों और अन्य कचरों के बीच अंतर बताया गया है. अन्य कचरों में खराब टायर, कागज की रद्दी, धातु स्क्रैप, इस्तेमाल की जा चुकी इलेक्ट्रॉनिक वस्तुएं आदि को रखा गया है और इन्हें पुनर्चक्रण एवं पुनःउपयोग के संसाधन के तौर पर मान्यता दी गई है.

3 अप्रैल 2016 को केंद्रीय पर्यावरण मंत्रालय ने संकटजनक एवं अन्य कचरा (प्रबंधन एवं ट्रांसबाउंड्री मूवमेंट) नियम, 2016 जारी कर दिया. संकटजनक कचरों के प्रबंधन के लिए नए नियमों को पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन राज्य मंत्री ( स्वतंत्र प्रभार) श्री प्रकाश जावड़ेकर ने जारी किया.

यह पहली बार है जब नियम में जोखिम वाले कचरों और अन्य कचरों के बीच अंतर बताया गया है. अन्य कचरों में खराब टायर, कागज की रद्दी, धातु स्क्रैप, इस्तेमाल की जा चुकी इलेक्ट्रॉनिक वस्तुएं आदि को रखा गया है और इन्हें पुनर्चक्रण एवं पुनःउपयोग के संसाधन के तौर पर मान्यता दी गई है. ये संसाधन औद्योगिक प्रक्रियाओँ के पूरक हैं और देश के अछूते संसाधनों पर से बोझ को कम करेंगे.

संकटजनक  कचरा प्रबंधन नियम, 2016 की मुख्य विशेषताएं

• 'अन्य कचरा' को शामिल कर नियम के दायरे को बढ़ा दिया गया है.
• रोकथाम, न्यूनीकरण, पुनर्उपयोग, पुनर्चक्रण, रिकवरी, सह–प्रसंस्करण के क्रम में कचरा प्रबंधन पदानुक्रम तैयार किया गया है और इनका सुरक्षित निपटान किया जाएगा.
• अनुमति, आयात/ निर्यात, वार्षिक रिटर्न का भरा जाना और परिवहन आदि के लिए नियम के तहत सभी प्रारूपों में महत्वपूर्ण संशोधन किए गए हैं. इससे प्रक्रिया को सरल बनाने के साथ– साथ ऐसे खतरनाक कचरों और अन्य कचरों के प्रबंधन के लिए सख्त दृष्टिकोण अपनाए जाने का संकेत मिलता है.  
• कचरा प्रसंस्करण उद्योग से स्वास्थ्य एवं पर्यावरण को बचाने के लिए संरचनात्मक ढांचे की मूल आवश्यकता को स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर (एसओपी) के रूप में निर्धारित किया गया है, यह कचरे के प्रकार के अनुसार होगा, जिसे इस प्रकार का अधिकार देने के दौरान एसपीसीबी/ पीसीसी द्वारा सुनिश्चित और हितधारकों द्वारा संकलित किया जाएगा.

राज्य सरकार की जिम्मेदारी

• खतरनाक एवं अन्य कचरों के पर्यावरण के अनुकूल प्रबंधन के लिए राज्य सरकार की जिम्मेदारियां इस प्रकार होंगी–
क) खतरनाक या अन्य कचरों के पुनर्चक्रण, पूर्व– प्रसंस्करण औऱ अन्य उपयोग हेतु औद्योगिक स्थान या शेड्स की स्थापना/ आवंटन करना.


ख) पुनर्चक्रण, पूर्व– प्रसंस्करण औऱ अन्य उपयोग गतिविधियों में शामिल श्रमिकों को पंजीकृत करना.
ग) ऐसी सुविधाओं की स्थापना के लिए श्रमिकों के समूहों का गठन करना.
घ) औद्योगिक कौशल विकास गतिविधियां संचालित करना और श्रमिकों की सुरक्षा एवं स्वास्थ्य सुनिश्चित करना.
• इन प्रावधानों के प्रभावी कार्यान्वयन के लिए राज्य सरकार को एकीकृत योजना बनाने का अधिकार दिया जाता है और उन्हें पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय को वार्षिक रिपोर्ट देनी होगी.
• राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को पैदा हुए कचरे; सह– प्रसंस्करण समेत पुनर्चक्रित, रिकवर्ड, उपयोग किए जा चुके कचरे; फिर से निर्यात किए गए कचरे और निपटान किए गए कचरे की वार्षिक सूची तैयार करने का काम सौंपा गया है. बोर्ड अपनी रिपोर्ट प्रत्येक वर्ष सितंबर महीने के 30वें दिन केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड में जमा कराएगा.

आयात के लिए प्रतिबंधित संकटजनक  कचरे

सांद्रता सीमाओं के साथ कचरा घटकों की सूची अंतरराष्ट्रीय मानकों और पेयजयl  मानकों के अनुसार संशोधित किया गया है. निम्नलिखित वस्तुओं के आयात पर प्रतिबंध लगाया गया है–
क) पशुओं या वनस्पति मूल के कच्चा खाद्य वसा या तेल
ख) घरेलू कचरे
ग) क्रिटिकल केयर मेडिकल उपकरण
घ) सीधे पुनः–उपयोग उद्देश्य के लिए टायर
ङ) पेट बोतलों समेत ठोस प्लास्टिक वाले कचरे
च) इलेक्ट्रिकल कचरे और इलेक्ट्रॉनिक्स असेंबलियों के कचरे
छ) विशेष रूप से विलायक रूप वाले अन्य रसायनिक कचरे

संकटजनक कचरा क्या है?

• संकटजनक कचरा का अर्थ है वैसा कचरा जो अपने गुणों  जैसे भौतिक, रसायनिक, जैविक, प्रतिक्रियाशील, जहरीलेपन, ज्वलनशीलता, विस्फोटक या संक्षारक, की वजह से स्वास्थ्य या पर्यावरण के लिए खतरा बन सकता हो.
• इसमें रसायनिक उत्पादों जैसे पेट्रोलियम रिफाइनिंग, फार्मास्युटिकल्स के उत्पादन, पेट्रोलियम, पेंट, एल्युमीनियम, इलेक्ट्रॉनिक उत्पादों आदि के विनिर्माण प्रक्रिया के दौरान पैदा होने वाला कचरा आता है.
• वर्ष 2015 में सीपीसीबी द्वारा दी गई सूचना के अनुसार, देश में करीब 44000 उद्योगों से कुल 7.46 मिलियन मिट्रिक टन सालाना खतरनाक कचरा पैदा होता है.

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