Indian Railways: अब इन 7 बड़े रेल रूटों पर बिछेंगी 4-4 पटरियां, बढ़ेगी ट्रेनों की रफ्तार, देखें कौन-से रूट शामिल

भारतीय रेलवे करीब 11000 किलोमीटर लंबे हाई-डेंसिटी रेल नेटवर्क को चार ट्रैक में बदलने की योजना पर काम कर रहा है। रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव के मुताबिक, जिन सात रूटों को इस योजना में शामिल किया गया है, वे देश के कुल रेलवे ट्रैफिक का करीब 41 फीसदी हिस्सा संभालते हैं, जबकि पूरे रेल नेटवर्क में इनकी हिस्सेदारी लगभग 16 फीसदी है। 

Sep 1, 2026, 14:05 IST
आखिर रेलवे को चार ट्रैक की जरूरत क्यों पड़ी?
आखिर रेलवे को चार ट्रैक की जरूरत क्यों पड़ी?

Indian Railways Hindi: ट्रेन से सफर करने वालों के लिए रेलवे जल्द एक बड़ा बदलाव करने जा रहा है। देश के जिन रेल रूटों पर हर दिन सबसे ज्यादा ट्रेनें दौड़ती हैं, वहां अब ट्रैक की संख्या बढ़ाने की तैयारी है। भारतीय रेलवे करीब 11000 किलोमीटर लंबे हाई-डेंसिटी रेल नेटवर्क को चार ट्रैक में बदलने की योजना पर काम कर रहा है।

इसका उद्देश्य ट्रैक पर बढ़ती भीड़ कम करना, ज्यादा ट्रेनें चलाने की गुंजाइश बनाना और यात्रियों के साथ मालगाड़ियों की आवाजाही को आसान करना। चलिए इस खबर के बारे में विस्तार से पढ़ते है।  

रेल मंत्री ने क्या कहा 

रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव के मुताबिक, जिन सात रूटों को इस योजना में शामिल किया गया है, वे देश के कुल रेलवे ट्रैफिक का करीब 41 फीसदी हिस्सा संभालते हैं, जबकि पूरे रेल नेटवर्क में इनकी हिस्सेदारी लगभग 16 फीसदी है। यानी कम नेटवर्क पर ट्रेनों का दबाव काफी ज्यादा है।

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किन 7 रूटों पर बढ़ेंगे ट्रैक?

बात दें की रेलवे ने चार-ट्रैकिंग के लिए सात प्रमुख हाई-डेंसिटी कॉरिडोर चिन्हित किए हैं, जिनके नाम आप यहां देख सकते है- 

-दिल्ली-हावड़ा

- हावड़ा-चेन्नई

- चेन्नई-मुंबई

- मुंबई-दिल्ली

- दिल्ली-चेन्नई

- मुंबई-हावड़ा

- दिल्ली-गुवाहाटी

इन रूटों से देश की राजधानी, बड़े महानगरों, औद्योगिक शहरों और पूर्वोत्तर भारत के महत्वपूर्ण हिस्सों के बीच रेल कनेक्टिविटी जुड़ी हुई है।

आखिर रेलवे को चार ट्रैक की जरूरत क्यों पड़ी?

यात्रियों की जरूरत के अनुसार जिस तरह से ट्रेनें बढ़ रही हैं जिस कारण मौजूदा ट्रैक पर दबाव भी बढ़ रहा है। इसके चलते ट्रैक की संख्या बढ़ाने कि तैयारी की जा रही है। 

इन कॉरिडोर पर यात्री ट्रेनों के साथ बड़ी संख्या में मालगाड़ियां भी चलती हैं। ऐसे में एक ही नेटवर्क पर बढ़ते ट्रैफिक को संभालना रेलवे के लिए चुनौती बन जाता है।

दिल्ली-हावड़ा: राजधानी से पूर्वी भारत तक बड़ा कॉरिडोर

दिल्ली से हावड़ा जाने वाला रूट उत्तर प्रदेश, बिहार, झारखंड और पश्चिम बंगाल को जोड़ता है। इस मार्ग पर दिल्ली, अलीगढ़, कानपुर, प्रयागराज, डीडीयू, गया, पटना, धनबाद, आसनसोल और हावड़ा जैसे बड़े स्टेशन आते हैं।

हावड़ा-चेन्नई: पूर्व से दक्षिण भारत तक कनेक्शन

हावड़ा-चेन्नई रूट पूर्वी और दक्षिण-पूर्वी भारत के कई महत्वपूर्ण शहरों को जोड़ता है।

चेन्नई-मुंबई: चेन्नई से मुंबई तक का यह कॉरिडोर दक्षिण भारत को पश्चिमी भारत से जोड़ता है।

मुंबई-दिल्ली: दो बड़े आर्थिक केंद्रों के बीच कनेक्शन

मुंबई और दिल्ली के बीच का रेल रूट यात्रियों के साथ-साथ माल ढुलाई के लिए भी बेहद महत्वपूर्ण है। सूरत, वडोदरा, रतलाम, कोटा, सवाई माधोपुर, मथुरा और दिल्ली इसके प्रमुख पड़ाव हैं।

दिल्ली-चेन्नई: यह रूट देश के उत्तरी हिस्से को दक्षिण भारत से जोड़ता है।

मुंबई-हावड़ा: पश्चिम से पूर्व भारत तक रेल कनेक्शन

दिल्ली-गुवाहाटी: पूर्वोत्तर भारत की अहम रेल लाइन

यात्रियों को क्या फायदा होगा?

चार ट्रैक होने का सबसे बड़ा फायदा यह होगा कि रेलवे के पास ट्रेनों के संचालन के लिए अतिरिक्त क्षमता उपलब्ध होगी। इससे भविष्य में बढ़ती मांग के अनुसार ज्यादा ट्रेनें चलाने, यात्री और मालगाड़ियों को बेहतर तरीके से मैनेज करने और व्यस्त समय में ट्रैफिक का दबाव संभालने में मदद मिल सकती है।

Bagesh Yadav

Senior Executive - Editorial

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