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भारत के प्रमुख ऐतिहासिक शहर व स्थल

अहिछत्र - उ. प्र. के बरेली जिले में स्थिति यह स्थान एक समय पाँचालों की राजधानी थी।
आइहोल- यह स्थान कर्नाटक में स्थित है। इसकी मुख्य विशेषता चालुक्यों द्वारा बनवाए गए पाषाण के मंदिर हैं।

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अबुल फजल: अकबरनामा के लेखक

अबुल फजल अपने छोटे भाई फैजी की तरह सम्राट अकबर के दरबार में नवरत्नों की सूची में से एक था.

अकबर के नवरत्न

अकबर के नवरत्नों में प्रमुख है, राजा बीरबल, मियां तानसेन, अबुल फजल, फैजी, राजा मान सिंह, राजा टोडर मल, मुल्ला दो प्याजा, फकीर अज़ुद्दीन, अब्दुल रहीम खान-ए-खाना.

दहसाला व्यावस्था

अकबर के वित्त मंत्री के रूप मे राजा टोडरमल ने राजस्व एकत्र करने की नयी व्यावस्था शुरू की जोकि ज़ब्ती व्यवस्था या दहसाला व्यवस्था के नाम से जानी गयी।

करोड़ी व्यवस्था

इतिहासकारों द्वारा राजा टोडरमल भारत में पहले सांख्यिकीविद के रूप में चिन्हित किये जाते हैं.

मुगल प्रशासन में मनसबदारी व्यवस्था

मुग़ल साम्राज्य के अंतर्गत मनसबदारी प्रणाली की औपचारिक रूप से शुरुवात मुग़ल सम्राट अकबर नें की थी.

अकबर: साम्राज्य निर्माता

अकबर एक महान विस्तारवादी शासक था. उसने अपने साम्राज्य का विस्तार पूर्व में बंगाल की खाड़ी से लेकर पश्चिम में कंधार तक और उत्तर में कश्मीर से लेकर दक्षिण में नर्मदा तक किया था.

जोधाबाई

जोधाबाई अकबर की तीसरी पत्नी थीं. उनका वास्तविक नाम हीरा कुंवारी था.

अकबर और राजपूत

मुगल साम्राज्य के समेकित विकास और ठोस नींव प्रदान करने के सन्दर्भ में अकबर की राजपूत नीति को समझा जा सकता है.

हेमू (1501-1556)

हेमू अफगान शासक इब्राहीम आदिल शाह का जनरल और प्रधानमंत्री था.

अकबर महान

अकबर को मुग़ल साम्राज्य का वास्तविक संस्थापक माना जाता है.

शेरशाह सूरी

शेरशाह  सूरी का असली नाम फरीद था. वह 1486 ईस्वी में पैदा हुआ था.

हुमायूँ

अपने पिता बाबर की मृत्यु के बाद हुमायूं 1530 ईस्वी में सिंहासन पर बैठा.

घाघरा की लड़ाई

1529 ईस्वी में घाघरा की लड़ाई में मुहम्मद लोदी और बाबर की सेना के बीच एक युद्ध हुआ.

पानीपत का प्रथम युद्ध और खानवा की लड़ाई

पानीपत के युद्ध ने मुग़ल साम्राज्य की स्थापना के लिए नया मार्ग प्रदान किया और दिल्ली सल्तनत के युग को पूरी तरह से समाप्त कर दिया.

जहीरुद्दीन मुहम्मद बाबर

बाबर का पूरा नाम जहीरुद्दीन मुहम्मद बाबर था. वह अपनी माँ की तरफ से चंगेज़  खान और  अपने पिता की तरफ से  तैमूर का वंशज था.

लोदी वंश

लोदी वंश दिल्ली सल्तनत का आखिरी वंश था। इसकी स्थापना बहलोल लोदी ने की थी.

सैय्यद वंश

तैमूर के हमले के बाद ,1414 ई मे तुगलक वंश का अंत हो गया और खिज्र खान ने सैय्यद वंश की स्थापना की।

फ़िरोज़ शाह तुगलक

फ़िरोज़ शाह तुगलक 45 वर्ष की उम्र में दिल्ली सल्तनत की गद्दी पर बैठा. उसके पिता का नाम रज्ज़ब था जोकि गियासुद्दीन तुगलक का छोटा भाई था.

मुहम्मद बिन तुगलक

मुहम्मद बिन तुगलक, दिल्ली सल्तनत का बहुत ही विलक्षण एवं शानदार शासक था. वह न केवल बुद्धिमान था बल्कि गणित और विज्ञान का जानकार था.

ग्यासुद्दीन तुगलक

ग्यासुद्दीन का असली नाम ग़ाज़ी मलिक था। वो अलाउद्दीन खिलजी का सेनानायक था।

अलाउद्दीन के उत्तराधिकारी

अलाउद्दीन की मृत्यु के बाद उसका 6 वर्ष छोटा पुत्र दिल्ली की गद्दी पर मालिक काफूर के द्वारा बैठाया गया.

अलाउद्दीन खिलजी (1296-1316)

अलाउद्दीन खिलजी का मूल नाम अली गुर्शप्प था. उसने अपने चाचा और ओहदे में ससुर जलाल-उद-दीन फिरोज खिलजी की हत्या करने के बाद 1296 ईस्वी में दिल्ली सल्तनत की गद्दी पर बैठ गया.

खिलजी वंश: जलाल-उद-दीन फिरोज खिलजी

गुलाम या मामलूक वंश भारत के शासक वंश के रूप में खिलजी वंश द्वारा विस्थापित कर दिया गया था.

मामलूक वंश: बलबन

बलबन दिल्ली सल्तनत के शासक इल्तुतमिश का एक गुलाम था और तुर्कों की प्रमुख जनजाति इल्बरी से सम्बंधित था.

मामलूक वंश: रजिया सुल्तान

इल्तुतमिश की मृत्यु के बाद, रजिया दिल्ली सल्तनत की नयी सुल्तान बन गयी.

मामलुक वंश: कुतुब-उद-दीन ऐबक

कुतुब-उद-दीन ऐबक मोहम्मद गोरी का प्रमुख सिपहसालार और उसका प्रमुख दास था. उसका जन्म मध्य एशिया के तुर्की परिवार में हुआ था.

मामलूक वंश: इल्तुतमिश

इल्तुतमिश तुर्कों की प्रमुख जनजाति इल्बरी से सम्बंधित था.

महत्वपूर्ण राजपूत शासक

उपलब्ध कई स्रोतों के मुताबिक, राजपूत उत्तर भारत के हिंदू योद्धा थे. उनकी वीरगाथाओ से इतिहास के पन्ने भरे पड़े हैं. उन्होंने नवी सदी से लेकर 12 वीं सदी तक के काल में शासन कार्य किया था.

कन्नौज के लिए त्रिपक्षीय संघर्ष

आठवी शताब्दी ईस्वी में कन्नौज पर अपने प्रभुत्व की स्थापना के लिए भारत के तीन क्षेत्रों में अपने साम्राज्य का पताका फहराने वाले साम्राज्यों के बीच संघर्ष हुआ.

पाल साम्राज्य

पाल साम्राज्य का संस्थापक गोपाल था. उसने इस साम्राज्य की स्थापना 750 ईस्वी में की की थी.

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