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इतिहास

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भारत के प्रमुख ऐतिहासिक शहर व स्थल

अहिछत्र - उ. प्र. के बरेली जिले में स्थिति यह स्थान एक समय पाँचालों की राजधानी थी।
आइहोल- यह स्थान कर्नाटक में स्थित है। इसकी मुख्य विशेषता चालुक्यों द्वारा बनवाए गए पाषाण के मंदिर हैं।

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कन्नौज के लिए त्रिपक्षीय संघर्ष

आठवी शताब्दी ईस्वी में कन्नौज पर अपने प्रभुत्व की स्थापना के लिए भारत के तीन क्षेत्रों में अपने साम्राज्य का पताका फहराने वाले साम्राज्यों के बीच संघर्ष हुआ.

पाल साम्राज्य

पाल साम्राज्य का संस्थापक गोपाल था. उसने इस साम्राज्य की स्थापना 750 ईस्वी में की की थी.

गुर्जर-प्रतिहार (छठी शताब्दी से लेकर 11वी शताब्दी)

गुर्जर-प्रतिहार साम्राज्य की स्थापना हरिश्चन्द्र के द्वारा छठी शताब्दी ईस्वी पूर्व में की गयी थी.

राजपूतों की उत्पत्ति

राजपूत शब्द की सर्वप्रथम उत्पत्ति 6ठी शताब्दी ईस्वी में हुई थी.

पैगंबर मुहम्मद का जीवन

हज़रत मुहम्मद, जिन्हें इश्वर का इस्लामी पैगंबर कहा जाता है का जन्म 570-571 ईस्वी में मक्का (सऊदी अरब में एक शहर) में पैदा हुआ था.

महमूद गजनवी

महमूद गजनवी, गजनी का राजा था जिसने 971 से 1030 ईस्वी तक शासन कार्य किया था.

पल्लव राज्य में वास्तुकला

शोर मंदिर और महाबलीपुरम के सप्तपगोडा मंदिर पल्लव कला के बेहतरीन उदाहरण थे.

अलबरूनी

अलबरुनी  का जन्म आधुनिक उज्बेकिस्तान में स्थित ख्व़ारिज्म में सन् 973 में हुआ था. वह फारस का एक प्रसिद्ध विद्वान था जोकि महमूद गज़नवी के भारत आक्रमण के दौरान उसके  साथ आया था.

पल्लव वंश

पल्लव, सातवाहनों के सामंत थे| इस वंश का प्रथम महत्वपूर्ण शासक शिव स्कन्द्वर्मन था|

चोल स्थापत्य कला

850 ईस्वी के पश्चात चोल स्थापत्य कला अपने सर्वोच्च स्तर पर पहुँची|

चोल प्रशासन

चोलों की राजधानी तँजौर थी | संपूर्ण चोल साम्राज्य प्रशासनिक तौर पर तीन भागों में विभक्त था केंद्रीय प्रशासन, प्रांतीय प्रशासन एवं स्थानीय प्रशासन |

चोल साम्राज्य: एक परिचय

चोल राजवंश ने 300 ई.पू. से बाद के 13 वीं सदी तक शासन कार्य किया था.

चेर राज्य

हमें चेर वंश के बारे में जानकारी संगम साहित्य से मिलता है. चेर शासकों के द्वारा शासित क्षेत्रों में कोचीन, उत्तर त्रावणकोर और दक्षिणी मालाबार शामिल थे.

कुषाण साम्राज्य

कुषाण यूची और युएझ़ी नामक उन पांच जनजातियों में से एक थे जिनका संबंध चाइना से था।

मथुरा कला विद्यालय

मथुरा कला शैली में लाल रंग के पत्थरों से बुद्ध और बोद्धिसत्व की सुन्दर मूर्तियाँ बनायी गयीं।

गांधार कला विद्यालय

गांधार कला की विषय-वस्तु भारतीय थी, परन्तु कला शैली यूनानी और रोमन थी।

सातवाहन वंश

द्वितीय शताब्दी ईसा पूर्व में सातवाहनों का साम्राज्य महाराष्ट्र के पुणे से लेकर आंध्र प्रदेश के तटीय क्षेत्रों तक था |

शुंग एवं कण्व वंश

उत्तर मौर्य युगीन युग में  शुंग एवं कण्व बहुत ही महत्वपूर्ण शासक माने जाते हैं|

शक़ राजवंश

शक़ प्राचीन ईरान के घुड़ सवार ख़ानाबदोश थे|

बौद्ध परिषदें

बौद्ध संघ के अंतर्गत कुल छः बौद्ध परिषदें आयोजित की गयी थीं।

महात्मा बुद्ध (563-483 ई. पू.)

गौतम बुद्ध को सिद्धार्थ, गौतम, शाक्य मुनि एवं बुद्ध के नामों से भी जाना जाता है|

बौद्ध साहित्य

त्रिपिटक ग्रंथों को अंग्रेजी भाषा में पाली सिद्धांत के रूप में जाना जाता है, जोकि बौद्ध धर्म ग्रंथों के लिए इस्तेमाल किया जाने वाला एक पारंपरिक शब्द है।

बौद्ध विद्वान

अश्वघोष कुषाण राजा कनिष्क की राज्यसभा में एक दरबारी  लेखक और धार्मिक सलाहकार के रूप में नियुक्त थे।

बुद्ध की शिक्षाएँ

चार सत्य तथा उसे प्राप्त करने के लिए अष्टांग मार्ग ही बुद्ध की शिक्षा के आधार माने जाते हैं|

जनपद और महाजनपद

वैदिक ग्रंथो के अनुसार आर्य जनजातियाँ जन के रूप में जानी जाती थी जोकि तत्कालीन समय में समाज की सबसे बड़ी इकाई थी।

मौर्य साम्राज्य: महत्वपूर्ण शासक

चंद्रगुप्त मौर्य, मौर्य वंश का प्रथम राजा और संस्थापक माना जाता है।. उसकी माता का नाम मूर था जिसका संस्कृत में अर्थ मौर्य होता है। इसलिए इस वंश का नाम मौर्य वंश पड़ा।

चालुक्य और पल्लव

चालुक्य शासको ने रायचूर दोआब के मध्य शासन किया था, जोकि कृष्णा और तुंगभद्रा नदियों के बीच स्थित था.

अजातशत्रु और बिम्बिसार की कहानी

जैसे-जैसे समय बीतता गया, मगध उत्तरी भारत के सभी राज्यों के बीच शक्तिशाली राजनीतिक गतिविधियों का केंद्र बन गया था.

मौर्य साम्राज्य : महत्व और साहित्यिक स्रोत

भारतीय इतिहास में मौर्य साम्राज्य की स्थापना एक नये युग की शुरुआत थी|

मौर्य साम्राज्य : प्रशासनिक संरचना

मौर्य साम्राज्य पाटलिपुत्र में शाही राजधानी के साथ चार प्रांतों में विभाजित किया गया था.

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