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इतिहास

General Knowledge for Competitive Exams

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चोल काल में निर्मित मंदिरों की सूची

चोलकालीन मंदिरों का निर्माण चोल साम्राज्य के महान राजाओं द्वारा किया गया था| ये मंदिर सम्पूर्ण दक्षिण भारत के अलावा भारत के पड़ोसी द्वीपों पर भी फैले हुए हैं। इन मंदिरों में 11वीं और 12वीं शताब्दी में निर्मित तीन मंदिर दरासुरम का एरावतेश्वर मंदिर, गांगेयकोंडचोलपुरम के मंदिर और तंजौर का बृहदेश्वर मंदिर प्रमुख हैं|

शहीद भगत सिंह ने क्यों कहा कि "मैं नास्तिक हूँ"

भगत सिंह का जन्म सितम्बर 1907 में पंजाब में हुआ था और सैंडर्स की हत्या के आरोप में दोषी पाये जाने के कारण 23 मार्च 1931 को उन्हें लाहौर के सेंट्रल जेल में फांसी दे दी गयी थी | उन्होंने 5,6 अक्टूबर 1931 को लाहौर के सेंट्रल जेल से एक धार्मिक आदमी को जवाब देने के लिये एक निबंध लिखा था जिसने उनके ऊपर नास्तिक होने का आरोप लगाया था |  भगत सिंह की उम्र उस समय 23 वर्ष की थी|

जहाँगीर ने ऐसा ना किया होता तो भारत अंग्रेजों का गुलाम कभी ना बनता

1615 में जहांगीर के दरबार (मुगल सम्राट) में सर थॉमस रो की भारत यात्रा ने अंग्रेजों के लिए भारत में व्यापार के दरवाज़े खोल दिए, लेकिन जानने योग्य यह है कि भारतीय भूमि पर ऐसा क्या हुआ जिससे इस तुच्छ तथ्य ने जहांगीर के कदमो को भारतीय इतिहास में एक दिलचस्प झलक बना दी।  

जानें चाय का इतिहास जिसका सेवन आप रोज़ करते है !

चाय पीने का इतिहास 750 ईसा पूर्व से है आम तौर पर भारत में चाय उत्तर-पूर्वी भागों और नीलगिरि पहाड़ियों में उगायी जाती है। टी को चाय के नाम से भी जाना जाता है और भारत में हर जगह यह प्रसिद्ध है, आप इसे विभिन्न चाय की दुकानों और रेलवे प्लेटफॉर्म आदि में देख सकते हैं और यह आसानी से उपलब्ध हो जाती है।आज भारत दुनिया में चाय का सबसे बड़ा उत्पादक है।

क्या कभी सोचा है कि भारत देश का नाम “भारत” ही क्यों पड़ा?

विश्व में भारत सबसे पुरानी सभ्यता का एक जाना-माना देश है जहाँ वर्षों से कई प्रजातीय समूह एक साथ रहते हैं। भारत विविध सभ्यताओं का देश है जहाँ लोग अपने धर्म और इच्छा के अनुसार लगभग 1650 भाषाएँ और बोलियों का इस्तेमाल करते हैं। संस्कृति, परंपरा, धर्म, और भाषा से अलग होने के बावजूद भी लोग यहाँ पर एक-दूसरे का सम्मान करते हैं | प्राचीन काल से ही हमारे देश को भारत (संस्कृत का शब्द है) के नाम से पुकारा जाता है | भारत का नाम 'भारत' कैसे पड़ा इसके पीछे कई इतिहासकारों ने अपने अपने विचार रखे है|

जाने भारत ‌- पाकिस्तान के बीच कितने युद्ध हुए और उनके क्या कारण थे

वर्ष 1947 में ग्रेट ब्रिटेन से स्वतंत्र होने के बाद भारत से अलग कर पाकिस्तान बनाया गया था । भारत और पाकिस्तान के बीच युद्ध की श्रृंखला को भारत– पाकिस्तान युद्ध का नाम दिया जाता है । सबसे हिंसक युद्ध 1947-48, 1965, 1971 और 1999 में हुए। युद्ध के अन्य कई कारणों में सीमा विवाद, कश्मीर समस्या, जल विवाद और आतंकवाद के मुद्दे पर विवाद रहे हैं।

वैदिक साहित्य की सूची

वेद शब्द का अर्थ "ज्ञान" होता है | वैदिक साहित्य आर्य और वैदिक काल के बारे में जानने का सबसे महत्वपूर्ण स्रोत हैं| इन साहित्यों का  विकास कई शताब्दियों में हुआ है और इनका आदान प्रदान एक पीढ़ी से दूसरे पीढ़ी के बीच मौखिक रूप से हुआ है जिस कारण इन्हें  "श्रुति" भी कहा जाता है |वैदिक साहित्य की सूची दी जा रही है जो यूपीएससी, एसएससी, सीडीएस, एनडीए, राज्य सेवाओं, और रेलवे आदि जैसी प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए बहुत महत्वपूर्ण है|

भारत के महान मुगल सम्राटों की सूची

मुगल राजवंश की स्थापना बाबर ने की थी जिसके पिता तैमुर वंश के थे जबकि माता चंगेज खां की वंशज थी| यहाँ भारत के महान मुग़ल शासकों की सूची दी जा रही है जो UPSC, PCS, SSC, NDA, CDS और रेलवे जैसी प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए बहुत ही उपयोगी है|

भारतीय आधुनिक इतिहास की महत्वपूर्ण घटनाओं और तारीखों की सूची

पर्सी बिशे शेली के अनुसार- 'इतिहास एक चक्रि‍य कविता, समय से लिखा आदमी की यादों पर है'| यहाँ हम आधुनिक इतिहास की महत्वपूर्ण तारीखों और घटनाओं की सूची दे रहे हैं, एक कालानुक्रमिक ढंग से साथ ही साथ महत्वपूर्ण घटनाएं जो भारत के आधुनिक इतिहास में हुआ हैं जो की यूपीएससी - पहले सत्र, आईएएस - पहला सत्र, सीपीएफ, सीडीएस, एनडीए और विभिन्‍न राज्यों के पीएससी परिक्षाओं में बहुत मददगार रहेगा|

भारत में ब्रिटिश शासन के दौरान विभिन्न शैक्षिक समितियों की सूची

ब्रिटिशों ने शिक्षा के क्षेत्र में एक दोहरी नीति अपनाई जिससे प्राच्य प्रचलित शिक्षा प्रणाली हतोत्साहित हुई और पश्चिमी शिक्षा और अंग्रेजी भाषा को महत्व मिला| यहाँ हम 'भारत में ब्रिटिश शासन के दौरान विभिन्न शैक्षिक समितियों की सूची' दे रहे हैं जिससे छात्रों को यूपीएससी, एसएससी, राज्य सेवाओं, एनडीए, सीडीएस और रेलवे आदि में परीक्षाओं की तैयारी के लिए मदद मिलेगी|

ब्रिटिश शासन के दौरान भारत में विभिन्न सुधारों और अधिनियमों की सूची

भारतीय प्रदेशों पर पूर्ण नियंत्रण स्थापित करने के बाद, अंग्रेजों ने व्यापार को प्रोत्साहित करने के लिए भारत में विभिन्न सुधार और अधिनियम लाये ताकि वो  ना सिर्फ  प्रशासनिक तौर से बल्कि सामाजिक व्यवस्था में भी उनकी पकड़ मजबूत हो सके | इस संबंध में, उन्‍होंने लोगों के सामाजिक जीवन को सुधारने के लिए बहुत सारे ऐसे कदम उठाए| हम यहाँ  ब्रिटिश भारत के दौरान विभिन्न सुधारों और अधिनियमों की सूची दे रहे हैं|

भारतीय इतिहास में महत्वपूर्ण हस्तियों और उनके योगदान की सूची

भारत की राजनितिक, सामाजिक और आर्थिक संरचना में कही न कही हमारे स्वतंत्रता सेनानी और नेताओं का महत्पूर्ण योगदान रहा है । हम यहाँ हमारे स्वतंत्रता सेनानी और नेताओं के महत्पूर्ण योगदान की सूचि दे रहे हैं जो परीक्षार्थी के  लिए बहुत लाभ प्रद सिद्ध हो सकता है |

भारत में ब्रिटिश काल के दौरान ब्रिटिश गवर्नर्स जनरल की सूची

ब्रिटिश गवर्नर् जनरल मूल रूप से भारत में ब्रिटिश प्रशासन के मुखिया थे । ये कार्यालय फोर्ट विलियम के प्रेसीडेंसी के गवर्नर जनरल के शीर्षक के साथ 1773 में बनाया गया था। हम यहाँ भारत में ब्रिटिश काल के दौरान ब्रिटिश गवर्नर् जनरल की सूची दी जा रही है जिससे परीक्षार्थी आसानी से कालक्रम और उनके योगदान के बारे में याद रख सकते हैं।

ब्रिटिश भारत के दौरान ब्रिटिश वायसराय की सूची

1857 के विद्रोह के बाद, अगस्त 1858 को ब्रिटिश संसद ने एक अधिनियम पारित जिसके द्वारा कंपनी के शासन को समाप्त कर दिया गया था । भारत में ब्रिटिश सरकार का नियंत्रण ब्रिटिश क्राउन को हस्तांतरित किया गया और लार्ड कैनिंग को भारत का पहला वायसराय बनाया गया था। यहाँ हम ब्रिटिश भारत के दौरान ब्रिटिश वायसराय की सूची दे रहे है जिससे परीक्षार्थी आसानी से कालक्रम और उनके योगदान के बारे में याद रख सकते हैं ।

अंग्रेज़ों के शासन के दौरान गैर-आदिवासी, आदिवासी और किसान आंदोलनों की सूची

अंग्रेज भारत में व्यापर करने के लिए आये थे परन्तु यहाँ की राजनैतिक फूट की वजह से वो शासक बन गए और यहाँ की प्रशासनिक, कानूनी और सामाजिक ढांचा ही बदल कर रख दी | इस नए स्वरूप से स्थानीय लोगों के गौरव को चोट पहुंची और क्रांतिकारियों के विद्रोह ने अपनी मातृभूमि से अंग्रेजी नियमों को निष्कासित करवा दिया| इस आर्टिकल में  अंग्रेजी शासकों के दौरान गैर आदिवासी, आदिवासी और किसान आंदोलनों की सूची है जो यूपीएससी, एसएससी, स्टेट सर्विसेज, सीडीएस, NDA, रेलवेज जैसी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे उम्मीदवारों की मदद करेगी|

1857 के विद्रोह के साथ जुड़े महत्वपूर्ण नेताओं की सूची

1857 का विद्रोह उपमहाद्वीप पर ब्रिटिश कब्जे के खिलाफ  भारत में उत्तरी हिस्से और मध्य हिस्से में एक लंबे समय तक चलने वाला एक सशस्त्र विद्रोह था। 1857 के विद्रोह के साथ जुड़े महत्वपूर्ण नेताओं की सूची जिससे परीक्षार्थी आसानी से यह याद रख  सकते है।

1857 के विद्रोह के सम्बंधित ब्रिटिश अधिकारियों की सूची

ब्रिटिश अधिकारियों ने संसाधनों में बढ़ोत्तरी की और विद्रोह को दबाने में सफल रहे। उनके पास विशाल संसाधनों की व्यवस्था थी और परिवहन और संचार के तेजी से तरीकों से उन्हें ओर मदद मिल जाती थी । हम यहाँ 1857 के विद्रोह के साथ सम्बंधित ब्रिटिश अधिकारियों की सूची दे रहे है जिससे आकांक्षी आराम से जान सकते है।

सिंधु घाटी सभ्यता के पुरातात्विक स्थलों की सूची

सिंधु घाटी सभ्यता दुनिया के चार प्राचीनतम सभ्यताओं में से एक है । रेडियो कार्बन डेटिंग के अनुसार सभ्यता 2500-1750 ई.पू. के आसपास में सभ्यता का विकाश हुआ था । हम , यहाँ सिंधु घाटी सभ्यता के पुरातात्विक स्थलों की सूची है दे रहे हैं  जो यूपीएससी, एसएससी, राज्य सेवाओं, एनडीए, सीडीएस, और रेलवे आदि जैसी प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए बहुत उपयोगी है |

कुमारी कंदम की अनकही कहानी: हिंद महासागर में मानव सभ्यता का उद्गम स्थल

क्या आप जानते हैं कि आधुनिक मानव सभ्यता का उद्गम स्थल भारतीय उपमहाद्वीप में ‘कुमारी कंदम’ नाम के एक द्वीप से हुआ माना जाता है I हालाँकि यह महाद्वीप अब हिन्द महासागर में कई सो साल पहले विलुप्त हो चुका है I इस महाद्वीप को ‘Lemuria’  नाम से भी जाना जाता है | कुछ लोग इस सभ्यता को रावण के साम्राज्य से जोड़कर भी देखते हैं |

मौर्य साम्राज्य: विस्तृत सारांश

इस सरांश में यूपीएससी-प्रारंभिक, एसएससी, राज्य सेवाओं, एनडीए, सीडीएस और रेलवे आदि प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए मौर्य साम्राज्य से सम्बंधित उपयोगी जानकारी दी गयी है, जैसे की चंद्रगुप्त मौर्य राजवंश के संस्थापक थे इत्यादि|

आधुनिक भारतीय इतिहास के संक्षिप्त या व्यक्तित्व वैकल्पिक नामों की सूची

व्यक्ति के व्यक्तित्व के वैकल्पिक नाम की सूची दी जा रही है जिनका योगदान भारत के स्वतंत्रता संग्राम में  अनमोल है ।

भारतीय इतिहास में विदेश यात्रिओ और राजदूतों की पूर्ण सूची

प्रधान भाग: भारत के हर क्षेत्र की अपनी सांस्कृतिक और ऐतिहासिक पहचान है। विदेशी यात्रियों की यात्रा और उनके अनुभव हम यात्रा वृत्तांत में पढ़ सकते है जिसमे स्थानीय प्रथाओ, परंपराओं और उनकी जीवन शैली को शामिल किया जाता है और इसी कारण से हमें पहले के समय युग के बारे में जानने का एक विशेष अवसर प्राप्त होता है। यात्री या राजदूत वो घरेलू प्रतिनिधि होते थे जो सदियों से अपने विचारों, वृत्तांतो या ग्रंथो के माध्यम से शासकों और राष्ट्रों की सेवा करते थे ।

भारतीय राष्ट्रीय आंदोलन का सारांश

भारतीय राष्ट्रीय आंदोलन भारत के लोगों के हित से संबंधित जन आंदोलन था जो पूरे देश में फैल गया था। देश भर में कई बड़े और छोटे विद्रोह हुए थे और कई क्रांतिकारियों ने ब्रिटिशों को बल से या अहिंसक उपायों से देश से बाहर करने के लिए मिल कर लड़ाई लड़ी और देश भर में राष्ट्रवाद को बढ़ावा दिया।

मध्यकालीन भारत का इतिहास: एक समग्र अध्ययन सामग्री

भारत के मध्यकालीन इतिहास का दौर 8 वीं सदी से लेकर 12 वीं सदी तक माना जाता है I इस काल में हम पाल, प्रतिहार और राष्ट्रकूट से लेकर दिल्ली सल्तनत और शक्तिशाली मुग़ल साम्राज्य के बारे में विस्तार से अध्ययन करेंगे I इस आधार पर हम यह कह सकते हैं कि यह अध्ययन सामग्री न सिर्फ प्रतियोगी छात्रों के लिए बल्कि स्कूल जाने वाले विद्यार्थियों और ग्रेजुएशन कर रहे विद्यार्थियों के लिए भी लाभदायक सिद्ध होगी I

प्राचीन भारत का इतिहास: एक समग्र अध्ययन सामग्री

“प्राचीन भारत के इतिहास” की अध्ययन सामग्री को घटनाओं के कालक्रम के अनुसार 5 मुख्य भागों में बांटा गया है I हमें यह यकीन है यह सामग्री न केवल स्कूल जाने वाले छात्रों/छात्राओं बल्कि प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे प्रतिभागियों के लिए भी बहुत ही महत्वपूर्ण होगी I

आधुनिक भारत का इतिहास: सम्पूर्ण अध्ययन सामग्री

“आधुनिक भारत का इतिहास” की अध्ययन सामग्री के अंतर्गत हमने न केवल स्कूल जाने वाले विद्यार्थियों बल्कि ग्रेजुएशन की पढाई कर रहे विद्यार्थियों की जरूरतों को भी पूरा करने के साथ-साथ प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे प्रतिभागियों की आवश्यकता के अनुसार अध्ययन सामग्री देने का प्रयास किया है I

माउंटबेटन योजना और भारत के विभाजन

लॉर्ड माउंटबेटन, भारत के विभाजन और सत्ता के त्वरित हस्तांतरण के लिए भारत आये। प्रारम्भ में यह सत्ता हस्तांतरण विभाजित भारत की भारतीय सरकारों को डोमिनियन के दर्जे के रूप में दी जानी थीं। 3 जून 1947 को लॉर्ड माउंटबेटन ने अपनी योजना प्रस्तुत की जिसमे भारत की राजनीतिक समस्या को हल करने के विभिन्न चरणों की रुपरेखा प्रस्तुत की गयी थी। प्रारम्भ में यह सत्ता हस्तांतरण विभाजित भारत की भारतीय सरकारों को डोमिनियन के दर्जे के रूप में दी जानी थीं।

कैबिनेट मिशन प्लान

22 जनवरी को कैबिनेट मिशन को भेजने का निर्णय लिया गया था और 19 फरवरी, 1946 को ब्रिटिश प्रधानमंत्री सी.आर.एटली की सरकार ने हाउस ऑफ़ लॉर्ड्स में कैबिनेट मिशन के गठन और भारत छोड़ने की योजना की घोषणा की| तीन ब्रिटिश कैबिनेट सदस्यों का उच्च शक्ति सम्पन्न मिशन,जिसमे भारत सचिव लॉर्ड पैथिक लारेंस, बोर्ड ऑफ़ ट्रेड के अध्यक्ष सर स्टैफोर्ड क्रिप्स और नौसेना प्रमुख ए.वी.अलेक्जेंडर शामिल थे, 24 मार्च,1946 को दिल्ली पहुँचा|

अराजक और रिवोल्यूशनरी अपराध अधिनियम, 1919

गवर्नर जनरल चेम्सफोर्ड ने 1917 में जस्टिस सिडनी रौलट की अध्यक्षता में एक समिति गठित की| इस समिति का गठन विद्रोह की प्रकृति को समझने और सुझाव देने के लिए किया गया था| इसे ‘रौलट समिति’ के नाम से भी जाना जाता है| इस अधिनियम, जोकि किसी भी क्षेत्र/भाग पर लागू किया जा सकता था, में किसी भी व्यक्ति को कार्यपालिका के नियंत्रण में लाने के लिए दो तरह के उपाय शामिल थे- दंडात्मक और प्रतिबंधात्मक| इस अधिनियम के तहत सरकार किसी भी व्यक्ति को बिना वारंट के गिरफ्तार कर सकती थी और बिना सुनवाई के दो साल तक कैद में रख सकती थी|

संवैधानिक सभा

कैबिनेट मिशन योजना के तहत 16 मई 1946 को संविधान सभा का गठन किया गया|इसके सदस्यों का चुनाव आनुपातिक प्रतिनिधित्व पद्धति के तहत एकल हस्तान्तरणीय मत प्रणाली द्वारा किया गया था| संविधान सभा की प्रथम बैठक 9 दिसंबर 1946 को दिल्ली कौंसिल चैंबर के पुस्तकालय में हुई थी जिसमे 205 सदस्यों ने भाग लिया था|लीग के प्रतिनिधि और रियासतों द्वारा नामित सदस्य इसमें शामिल नहीं हुए| 11 दिसंबर को सभा ने डॉ. राजेंद्र प्रसाद को इसके स्थायी अध्यक्ष के रूप में चुना|

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