मेसाचुसेट्स इंस्टिट्यूट ऑफ़ टेक्नोलॉजी (एमआईटी) द्वारा कराये गये एक अध्ययन में पाया गया है कि भारत के ग्रीष्मकालीन मानसून में पिछले 15 वर्षों में मजबूती दर्ज की गयी.
यह अध्ययन रिपोर्ट जुलाई 2017 में पत्रिका नेचर क्लाइमेट चेंज में प्रकाशित हुई थी.

अध्ययन के मुख्य बिंदु
• भारत की इस मानसून बढ़त ने पिछले 50 वर्षों के सूखा प्रभावित जलवायु में बदल दिया है. अब उत्तरी एवं केन्द्रीय भारत के सूखा ग्रस्त माने जाने वाले क्षेत्रों में भी बारिश होने लगी है.
• शोधकर्ताओं ने पाया कि वर्ष 2002 से सूखे की अपेक्षा बारिश दर्ज होने लगी है. इसके साथ ही बाढ़ की प्रवृति भी बढ़ी है जिसके चलते भारत के विभिन्न क्षेत्रों में चल-अचल संपत्ति का भी भारी नुकसान होता है.
• शोधकर्ताओं का मानना है कि वर्ष 2002 में भारत से सभी क्षेत्रों में 0.1 से 1 डिग्री सेल्सियस की बढ़ोतरी दर्ज की गयी. इस दौरान हिन्द महासागर के तापमान में गिरावट दर्ज की गयी.
• स्थलीय क्षेत्रों में तापमान में वृद्धि तथा समुद्री क्षेत्र में तापमान में गिरावट से भारत में अधिक मानसून दर्ज किया गया.
• शोधकर्ताओं ने यह पाया कि वर्ष 2002 के बाद से भारत में वर्षा में प्रतिदिन 1.34 मिलीमीटर प्रति दशक के हिसाब से बढ़ोतरी दर्ज की गयी.
• शोधकर्ताओं का मानना है कि मानसून का कारण धरातल के गर्म मौसम का समुद्री ठंडे मौसम के साथ मिलकर वर्षा की स्थिति उत्पन्न करती है.

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