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हिमालय पर्वत श्रंखला का विभाजन या वर्गीकरण

भू-वैज्ञानिक और संरचनात्मक रूप से हिमालय नवीन वलित पर्वत श्रंखला है, जिसका निर्माण यूरोपीय और भारतीय प्लेट के अभिसरण से टर्शियरी कल्प में हुआ था| हिमालय में उत्तर से दक्षिण क्रमशः वृहत हिमालय, मध्य हिमालय और शिवालिक नाम की तीन समानांतर पर्वत श्रेणियाँ पायी जाती हैं|

भारत में स्थित प्रमुख दर्रे

पर्वतों के आर-पार विस्तृत सँकरे और प्राकृतिक मार्ग, जिससे होकर पर्वतों को पार किया जा सकता है, दर्रे कहलाते हैं| परिवहन, व्यापार, युद्ध अभियानों और मानवीय प्रवास में इन दर्रों की महत्वपूर्ण भूमिका रही है| भारत के अधिकतर दर्रे हिमालय क्षेत्र में पाये जाते हैं|

नदियों के किनारे स्थित भारतीय शहर

उपजाऊ भूमि, जल की उपलब्धता, मछ्ली पकड़ने की सुविधा, जल परिवहन की सुविधा आदि के कारण प्राचीन काल से ही नदियाँ मानव निवास के अधिक अनुकूल रहीं है और अनेक प्राचीन सभ्यताओं का उदय नदियों के किनारे हुआ है| इसीलिए भारत के अनेक शहरों का विकास नदियों के किनारे हुआ है|

उत्तर भारत के मैदान का संरचनात्मक विभाजन

उत्तर भारत का मैदान हिमालय और प्रायद्वीपीय भारत के मध्य स्थित एक लगभग समतल व उपजाऊ मैदान है|हिमालयी व प्रायद्वीपीय नदियों द्वारा लाये गए जलोढ़ के निक्षेपण से निर्मित यह मैदान भारत का सर्वाधिक उपजाऊ क्षेत्र है| संरचना और ढाल के आधार पर उत्तर भारत के मैदान को भाबर, तराई, खादर और बांगर में बाँटा जाता है|

भारत के द्वीप समूह: अंडमान और निकोबार व लक्षद्वीप

भारत के द्वीप समूह को दो भागों में बांटा जाता है: अरब सागर में स्थित ‘अंडमान और निकोबार द्वीप समूह’ तथा बंगाल की खाड़ी में स्थित ‘लक्षद्वीप समूह’| अंडमान और निकोबार द्वीप समूह निमज्जित पर्वतीय चोटियों के उदाहरण हैं जबकि लक्षद्वीप प्रवाल निर्मित द्वीपों के उदाहरण हैं|

मानसून उत्पत्ति सम्बन्धी जेट-स्ट्रीम संकल्पना

ऊपरी वायुमंडल (9 से 18 किमी.) में प्रवाहित होने वाली तीव्र वायु-प्रणाली को ‘जेट स्ट्रीम’ कहा जाता है| गर्मियों के मौसम में पछुआ जेट स्ट्रीम के उत्तर की ओर खिसकने और भारत के ऊपर पूर्वी जेट स्ट्रीम के प्रवाहित होने का संबंध मानसून की उत्पत्ति से है|

भारत का पूर्वी तटीय मैदान

भारत के पूर्वी तटीय मैदान का विस्तार पूर्वी घाट और पूर्वी तट के मध्य सुवर्णरेखा नदी से लेकर कन्याकुमारी तक है| पूर्वी तटीय मैदान का विस्तार पश्चिम बंगाल, ओडिशा, आंध्र प्रदेश और तमिलनाडू राज्यों में है| इस मैदान में निक्षेपों की अधिकता है और बड़ी-बड़ी नदियां सागर में मिलने से पूर्व यहाँ डेल्टा का निर्माण करती हैं|

ब्रह्मांड के विषय में बदलता दृष्टिकोण व कृत्रिम उपग्रह

2000 वर्ष पहले, यूनानी खगोलविदों ने सोचा था कि पृथ्वी ब्रह्मांड के केंद्र में है और चंद्रमा, सूर्य व तारे इसकी परिक्रमा करते हैं।15वीं सदी में, पोलैंड के वैज्ञानिक निकोलस कॉपरनिकस ने बताया कि सूर्य सौरमंडल के केंद्र में है और ग्रह उसकी परिक्रमा करते हैं। इस तरह सूर्य ब्रह्मांड का केंद्र बन गया है।16वीं सदी में जोहानेस केप्लर ने ग्रहीय कक्षा के नियमों की खोज की|

भारत का पश्चिमी तटीय मैदान

भारत के पश्चिमी तटीय मैदान का विस्तार गुजरात तट से लेकर केरल के तट तक है| ये मैदान वास्तव में पश्चिमी घाट के पश्चिम में विस्तृत निमज्जित तटीय मैदान हैं| इस मैदान को चार भागों में विभाजित किया जाता है- गुजरात का तटीय मैदान, कोंकण का तटीय मैदान, कन्नड़ का तटीय मैदान व मालाबार का तटीय मैदान |

भारत का पूर्वी घाट पर्वतीय क्षेत्र

पूर्वी घाट भारत में ओडिशा से लेकर तमिलनाडु तक विस्तृत पर्वतीय क्षेत्र है, जोकि वर्तमान में बड़ी-बड़ी नदियों द्वारा विच्छेदित होकर एक असतत श्रंखला के रूप में बदल गया है| चेन्नई के दक्षिण-पश्चिम में शेवरोय व पालनी पहाड़ियों के रूप में पूर्वी घाट पश्चिमी घाट से मिल जाता है|

भारत का पश्चिमी घाट पर्वतीय क्षेत्र

पश्चिमी घाट पर्वतीय क्षेत्र भारत के पश्चिमी तट के सहारे लगभग 1600 किमी. की लंबाई में महाराष्ट्र व गुजरात की सीमा से लेकर कुमारी अंतरीप तक विस्तृत है| पश्चिमी घाट पर्वत श्रेणी को यूनेस्को ने अपनी 'विश्व विरासत स्थल' सूची में शामिल किया है और यह विश्व के ‘जैवविविधता हॉटस्पॉट्स’ में से एक है|

भारतीय/थार मरुस्थल

भारतीय/थार मरुस्थल राजस्थान में अरावली पर्वतमाला के पश्चिम में अवस्थित गर्म/उष्ण मरुस्थल है| थार मरुस्थल में वार्षिक वर्षा 25 सेमी. से भी कम होती है, इसीलिए यहाँ शुष्क जलवायु व नाममात्र की प्राकृतिक वनस्पति पायी जाती है| इन्हीं विशेषताओं के कारण इसे ‘मरुस्थली’ के नाम से भी जाना जाता है| यह ‘विश्व का सर्वाधिक जनसंख्या घनत्व वाला मरुस्थल’ है|

अरावली पर्वतमाला

अरावली भारत के पश्चिमोत्तर भाग में स्थित वलित पर्वतमाला है,जोकि उत्तर-पूर्व से दक्षिण-पश्चिम दिशा में लगभग 1100 किमी. की लंबाई में विस्तृत है| अरावली पर्वतमाला विश्व के सर्वाधिक प्राचीन वलित पर्वतों में से एक है| माउंट आबू में स्थित ‘गुरुशिखर’ इसकी सर्वोच्च चोटी है|

ट्रांस/तिब्बत हिमालय पर्वतीय क्षेत्र

‘ट्रांस हिमालय’ या ‘तिब्बत हिमालय क्षेत्र’ महान हिमालय के उत्तर में स्थित है,और इसमें काराकोरम, लद्दाख, जास्कर और कैलाश नाम की पर्वत श्रेणियाँ शामिल हैं| ट्रांस हिमालय या तिब्बत हिमालय पर्वतीय क्षेत्र का काफी हिस्सा तिब्बत में भी पड़ता है, इसलिए इसे ‘तिब्बत हिमालय क्षेत्र’ भी कहा जाता है|

उत्तर भारत का मैदान

उत्तर भारत के मैदान का निर्माण मुख्यतः गंगा, ब्रह्मपुत्र तथा सिंधु नदी द्वारा लाये गए अवसादों के निक्षेपण से हुआ है| उत्तर भारत के मैदान को उत्तर से दक्षिण क्रमशः भाबर, तराई व जलोढ़ मैदानों में बांटा जाता है| जलोढ़ अवसादों की आयु के आधार पर जलोढ़ मैदान को पुनः बांगर व खादर नाम के उप-भागों में बांटा जाता है|

पूर्वी या पूर्वांचल पहाड़ियाँ

दिहांग गॉर्ज के बाद हिमालय दक्षिण की ओर मुड़ जाता है और भारत की पूर्वी सीमा का निर्धारण करता है| हिमालय के इस भाग को ‘पूर्वी या पूर्वांचल पहाड़ियाँ’ कहा जाता है| डफला, अबोर, मिश्मी, पटकई बूम, नागा, मणिपुर, गारो, ख़ासी, जयंतिया व मिज़ो पहाड़ियाँ पूर्वांचल की पहाड़ियों का ही भाग हैं|

भारत का भौतिक विभाजन

भारत में लगभग सभी प्रकार के भौगोलिक उच्चावच पाये जाते हैं| इसका कारण भारत का वृहद विस्तार व तटीय अवस्थिति है| भौगोलिक रूप से भारत को पाँच इकाईयों में बांटा जाता है- उत्तर का पर्वतीय भाग, उत्तरी मैदान, दक्षिणी पठार, तटीय मैदान व द्वीपीय भाग| इन सभी भौगोलिक इकाईयों की निर्माण प्रक्रिया व संरचना अलग-अलग प्रकार की है|

भारत की खनिज पेटियाँ

भारत विश्व के खनिज सम्पन्न देशों में से एक है, लेकिन भारत के सभी क्षेत्रों में खनिज नहीं पाये जाते हैं| भारत के खनिज कुछ खास क्षेत्रों में ही पाये जाते हैं और खनिज सम्पन्न इन क्षेत्रों को ‘भारत की खनिज पेटियाँ’ कहा जाता है| भारत में मुख्य रूप से उत्तरी-पूर्वी पठारी क्षेत्र, दक्षिण-पश्चिम पठारी क्षेत्र और उत्तर-पश्चिमी क्षेत्र नाम की खनिज पेटियाँ पायी जाती हैं|

भारत में परमाणु/आण्विक ऊर्जा

परमाणु ऊर्जा प्लांटों के माध्यम से आण्विक खनिजों से प्राप्त होने वाली ऊर्जा को ‘परमाणु/आण्विक ऊर्जा’ कहा जाता है| भारत का पहला परमाणु ऊर्जा प्लांट तारापुर (महाराष्ट्र) में 1969 ई. में संयुक्त राज्य अमेरिका के सहयोग से स्थापित किया गया था|

भारत में आण्विक खनिज

आण्विक खनिज नवीन एवं महत्वपूर्ण ऊर्जा स्रोत हैं, जिनके प्रयोग द्वारा आण्विक ऊर्जा प्राप्त की जा सकती है| परमाणु ऊर्जा प्लांटों में आण्विक खनिजों से आण्विक ऊर्जा का उत्पादन किया जाता है| यूरेनियम, थोरियम, बेरीलियम, जिरकन, एंटीमनी और ग्रेफ़ाइट महत्वपूर्ण आण्विक खनिज हैं|

मानसून का भूमध्यरेखीय पछुआ पवन सिद्धान्त

मानसून उत्पत्ति के भूमध्यरेखीय पछुआ पवन सिद्धान्त का प्रतिपादन फ्लोन महोदय ने किया था| उनका मानना था कि भूमध्यरेखीय पछुआ पवनें ही अत्यधिक ताप के कारण उत्तर-पश्चिमी भारत में निर्मित निम्न दाब की ओर आकर्षित होकर भारत में दक्षिण-पश्चिम मानसूनी पवनों  के रूप में प्रवेश करती हैं

मानसून का आगमन और निवर्तन

भारत में मानसून के पहुँचने को ‘मानसून का आगमन’ और भारत से मानसून के वापस लौटने को ‘मानसून का निवर्तन’ कहा जाता है| मानसून जून के प्रथम सप्ताह में भारत में प्रवेश करता है और नवंबर के अंत तक तक यह सम्पूर्ण भारत से वापस लौट जाता है|

भारत का प्रशासनिक विभाजन

भारत को प्रशासनिक रूप से 29 राज्यों व 7 संघ राज्य क्षेत्रों में बांटा गया है| भारत की राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली स्वयं एक संघ राज्य क्षेत्र है| इसके अतिरिक्त प्रत्येक राज्य की एक राजधानी है, जो सामान्यतः उस राज्य का सबसे प्रमुख शहर होता है| भारत का नवीनतम राज्य तेलंगाना है|

भारतीय चट्टानों का वर्गीकरण

भारत में पृथ्वी के सभी भूवैज्ञानिक कालों में निर्मित चट्टानें पायी जाती हैं| भारत में पायी जाने वाली चट्टानों को उनके निर्माण क्रम (प्राचीन से नवीन) के आधार पर क्रमशः आर्कियन, धारवाड़, कडप्पा, विंध्यन, गोंडवाना, दक्कन ट्रेप, टर्शियरी व क्वार्टनरी क्रम की चट्टानों में वर्गीकृत किया गया है|

मानसून की तापीय संकल्पना

मानसून उत्पत्ति की तापीय संकल्पना का प्रतिपादन ब्रिटिश विद्वानों द्वारा किया गया था, जिसमें डडले स्टांप और बेकर की महत्वपूर्ण भूमिका थी| इस संकल्पना के अनुसार तापमान, मानसून की उत्पत्ति का मुख्य कारण है और दक्षिणी गोलार्द्ध में बहने वाली दक्षिण-पूर्वी व्यापारिक पवनें ही भारत में दक्षिण-पश्चिम मानसून के रूप में प्रवेश करती हैं|

पृथ्वी का भूवैज्ञानिक इतिहास

पृथ्वी के भूवैज्ञानिक इतिहास को अजोइक, पैलियोजोइक, मेसोजोइक, सेनोजोइक, और नियोजोइक नाम के पांच महाकल्पों में बांटा गया है| अजोइक महाकल्प सर्वाधिक प्राचीन महाकल्प है, जिसमें पृथ्वी पर किसी तरह का जीवन नहीं पाया जाता था| महाद्वीप और महासागरों का निर्माण प्री-कैम्ब्रियन युग में हुआ था तथा आधुनिक मानव या ‘होमोसेपियंस’ की उत्पत्ति क्वार्टनरी युग में हुई थी|

भारत की अवस्थिति एवं विस्तार

भारत अक्षांशीय दृष्टि से उत्तरी गोलार्द्ध और देशांतरीय दृष्टि से पूर्वी गोलार्द्ध में स्थित देश है| भारत का अक्षांशीय विस्तार 804’ उ. से 3706’ उ. तक तथा देशांतरीय विस्तार 6807’ पू. से 97025’ पू. तक है| इसकी स्थलीय सीमा 15,200 किमी. लंबी है और मुख्य भूमि व द्वीपों सहित तटीय सीमा की लंबाई 7516 किमी. है|

भारत के पड़ोसी देशों व स्थलीय सीमा रेखाओं के नाम

क्षेत्रफल व जनसंख्या की दृष्टि से भारत दक्षिण एशिया का सबसे बड़ा देश है,जिसकी सीमाएँ सात देशों से मिलती हैं| भारत के 17 राज्यों की सीमाएँ इन पड़ोसी देशों से मिलती हैं| रेडक्लिफ रेखा भारत व पाकिस्तान और भारत व बांग्लादेश को, मैकमोहन रेखा भारत और चीन को तथा डूरंड रेखा भारत और अफगानिस्तान को अलग करती है|

भारत की जलवायु को कौन से कारक प्रभावित करते हैं ?

विश्व की जलवायु कई कारकों द्वारा प्रभावित होती है, जिसकी वजह से पृथ्वी के अलग-अलग हिस्सों का अलग–अलग जलवायु का जन्म होता है। इसी तरह भारत की जलवायु को भी अक्षांश, ऊंचाई, दाब और पवन आदि कारक प्रभावित करते हैं | कर्क रेखा पश्चिम में कच्छ के रन और पूर्व में मिजोरम तक भारत के मध्य भाग से होकर गुजरती है।

भारतीय मानसून को कौन से कारक प्रभावित करते हैं?

भारत में वायु प्रणाली के मौसमी उलट–फेर को अरब व्यापारियों ने 'मानसून' नाम दिया था। भारत के मानसून को प्रभावित करने वाले कारकों में स्थल व जल के गर्म व ठंडे होने की दर में अंतर, अंतरा उष्णकटिबंधीय अभिसरण क्षेत्र का विस्थापन, मेडागास्कर के पूर्व में उच्च दाब वाले क्षेत्र की उपस्थिति, तिब्बत के पठार का गर्म होना, पूर्वी जेट धारा का प्रवाह व एल-निनो की घटना आदि शामिल हैं |

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