भारत और जर्मनी ने 13 अप्रैल 2016 को गंगा नदी के संरंक्षण हेतु ‘नमामि गंगे कार्यक्रम’ के तहत एक क्रियान्वन समझौता पर हस्ताक्षर किए.
यह समझौता नई दिल्ली में केंद्रीय जल संसाधन, नदी विकास एवं गंगा संरक्षण मंत्रालय और जर्मनी के जर्मन इंटरनेशनल कोआपरेशन (जीआईजेड) के बीच किया गया.
इससे संबंधित मुख्य तथ्य:
• ये भारत और जर्मनी के बीच जानकारी के आदान-प्रदान और सामरिक नदी बेसिन प्रबंधन मामलों के व्यावहारिक अनुभव, प्रभावी डाटा प्रबंधन प्रणाली तथा जन भागीदारी पर आधारित होगा.
• यह परियोजना अन्य राष्ट्रीय एवं अंतर्राष्ट्रीय पहलों के साथ मिलकर काम करेगी.
• इसमें भारत और जर्मनी की ‘राष्ट्रीय शहरी नीति को समर्थन’ यानि एसएनयूएसपी और पर्यावरण अनुकूल सतत औद्योगिक उत्पादन (एसईआईपी) जैसी द्विपक्षीय परियोजनाएं शामिल हैं.
• इस परियोजना की अवधि तीन साल यानि 2016 से 2018 तक होगी.
• इस परियोजना में जर्मनी का अंशदान 22.5 करोड़ रूपये का होगा.
• शुरूआत में उत्ताराखंड पर ध्यान केंद्रित किया जाएगा और गंगा से जुड़े दूसरे राज्यों तक इसका दायरा बढ़ायेगा.
उद्देश्य:
इसका उद्देश्य नए वेग से गंगा नदी को प्रदूषण मुक्त करना और पावन गंगा का संरक्षण करना है. इस संबंध में भारत सरकार गंगा संरक्षण के लिए कई दूसरे देशों से सहायता ले रहा है.
जर्मनी के साथ क्रियान्वन समझौते पर हस्ताक्षर इसी का एक हिस्सा है, जिसका मुख्य उद्देश्य राइन और दान्यू्ब नदी के लिए इस्तेमाल की गई सफल नदी बेसिन प्रबंधन नीति को अपनाना है.
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