दिल्ली का वह इलाका, जो कहलाता था राजाओं का द्वार, जानें नाम
दिल्ली का इतिहास उठाकर देखें, तो हमें यहां अतीत के पन्नों में कई सदियों का इतिहास लिखा हुआ मिलता है। इस कड़ी में यहां एक जिला भी है, जिसे राजाओं का द्वार भी कहा जाता था। कौन-सा है यह जिला, जानने के लिए यह लेख पढ़ें।
यदि पूरे भारत के दिल की बात करें, तो यह दिल्ली में आकर बसता है। दिल्ली को भारतीय दिलों की जान कहा जाता है। भारत का यह शहर इतिहास के पन्नों में स्वर्ण अक्षरों में दर्ज है। दिल्ली को 7 बार बसाया गया और 7 बार ही उजाड़ा गया।
इस दौरान समय के साथ दिल्ली ने कई बड़े बदलावों का सामना किया। इस दौरान यहां के रंग, संस्कृति और परंपराओं में भी बदलाव देखा गया। आपने दिल्ली के अलग-अलग शहरों के बारे में पढ़ा और सुना होगा। हालांकि, क्या आप जानते हैं कि दिल्ली में एक जिला ऐसा भी है, जिसे राजाओं का द्वार भी कहा जाता था। कौन-सा है यह जिला, जानने के लिए यह लेख पढ़ें।
किस जिले को कहा जाता है राजाओं का द्वार
सबसे पहले हम यह जान लेते हैं कि दिल्ली का वह कौन-सा इलाका है, जिसे राजाओं का द्वार कहा जाता है। आपको बता दें कि यह दिल्ली के पूर्वी हिस्से में यमुना किनारे बसा हुआ शाहदरा जिला है। इस जिले को राजाओं का द्वार कहा जाता था।
क्यों कहा जाता था राजाओं का द्वार
अब हम यह जान लेते हैं कि शाहदरा को राजाओं का द्वार क्यों कहा जाता है। दरअसल, शाहदरा शब्द फारसी भाषा का शब्द है, जिसका अर्थ शाह का द्वार या शाह का दरा होता है। मुगल काल में यह इलाका दिल्ली के शाहजहांनाबाद यानि कि पुरानी दिल्ली इलाके में पूर्वी हिस्से से प्रवेश करने का मुख्य रास्ता हुआ करता था।
व्यापारियों और सेना के लिए होता था पहला पड़ाव
एक समय में दिल्ली का शाहदरा इलाका पश्चिमी उत्तर प्रदेश से आने वाले व्यापारियों और सेना के लिए मुख्य पड़ाव हुआ करता था। ऐसे में यहां मुगलों द्वारा शाही बाग और सराय का निर्माण करवाया गया था, जिससे व्यापारी और सेना दिल्ली में प्रवेश से पहले थोड़ा आराम कर सके।
पहले मेरठ मंडल का हुआ करता था हिस्सा
शाहदरा पहले दिल्ली का हिस्सा नहीं हुआ करता था। यह जिला पहले उत्तर प्रदेश के मेरठ मंडल में हुआ करता था। हालांकि, बाद में ब्रिटिश द्वारा 1912 में दिल्ली को राजधानी बनाने पर दिल्ली का विस्तार किया गया। इस दौरान 1920 के बाद शाहदरा को मेरठ मंडल से अलग कर दिल्ली का हिस्सा बनाया गया।
1947 के बाद बढ़ी आबादी
भारत की आजादी के समय दिल्ली की आबादी करीब 10 लाख हुआ करती थी, लेकिन विभाजन के समय यह आबादी घटकर करीब 6 लाख रह गई थी। हालांकि, आजादी के बाद दिल्ली में तेजी से लोगों का पलायन हुआ और यह आबादी 16 लाख के आकड़े को पार कर गई।
वहीं, तेजी से आबादी बढ़ने के कारण दिल्ली का विस्तार किया गया और इस कड़ी में यमुना के पास शाहदरा में कॉलोनियों को बसाया गया। इससे यहां पर लोगों की आबादी बढ़ी और आज यह घनी आबादी वाला जिला है।
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