फ़िरोज़ शाह तुगलक 45 वर्ष की उम्र में दिल्ली सल्तनत की गद्दी पर बैठा. उसके पिता का नाम रज्ज़ब था जोकि गियासुद्दीन तुगलक का छोटा भाई था जबकि उसकी माता दीपालपुर की राजकुमारी थी. गद्दी पर बैठने के बाद उसने बहुत सारे उन निर्णयों को वापस ले लिया जोकि उसके पूर्व के शासक के द्वारा लिए गए थे. उसने शरियत के अनुसार शासन किया और शरियत में जिन करों का उल्लेख नहीं किया गया था उसे बंद कर दिया.
लोक-कल्याणकारी कार्य
फ़िरोज़ शाह तुगलक ने अनेक लोक-कल्याणकारी कार्यो को सम्पादित किया. इसके अंतर्गत स्कूल,अस्पताल,बाँध,और नहरे इत्यदि थीं. उसने सतलज से यमुना नदियों को दोहरे नहर व्यवस्था से जोड़ने का भी कार्य किया.
शहरों का संस्थापक
फ़िरोज़ शाह तुगलक ने अपने पुत्र फ़तेह खान के जन्मदिवस पर फतेहाबाद शहर की स्थापना की. उसने जौनपुर शहर की भी स्थापना अपने बड़े भाई जौना खान की याद में बनवाया. यमुना नदी के किनारे फिरोजाबाद शहर की स्थापना भी उसी ने करवाया था. उसने अशोक के स्तंभ को भी उसके मूल स्थान से हटाकर दुसरे स्थान पर स्थापित किया था. उसने हिसार-ए-फिरोजा की भी स्थापना की थी.
फ़िरोज़ शाह तुगलक के सन्दर्भ में कुछ विशेष तथ्य निम्नवत हैं.
- उसने चुंगी को समाप्त किया.
- इसने जिन लोगो ने इस्लाम को अपना लिया था उससे जजिया लेना बंद कर दिया.
- इसने उन मुश्लिम औरतो को घर से बाहर जाने या आने से मना कर दिया.
- इसने उन कृषि भूमियों पर जल कर लगाया जिनकी सिंचाई राज्य के संसाधनों से होती थी.
मृत्यु और उत्तराधिकार
इसके मृत्यु 1388 ईस्वी में हुई थी. उसके काल में ही उसके सभी पुत्रो की मृत्यु हो चुकी थी. उसका पोता गियासुद्दीन अगला शासक बना लेकिन 5 महीने के अल्प शासन के बाद उसकी हत्या कर दी गयी. उसके बाद नाशिरुद्दीन मुहम्मद शाह तृतीय शासक बना लेकिन उसने सिर्फ 4 साल तक ही शासन कार्य किया. उसके बाद उसका भाई नाशिरुद्दीन मुहम्मद गद्दी पर बैठा. इसी के काल में भारत पर तैमूर का आक्रमण हुआ.
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