अर्थव्यवस्था का वह क्षेत्र जो सेवा से सम्बंधित कार्यो में लगा हुआ है सेवा क्षेत्र कहलाता है| सेवा क्षेत्र में मुख्य रूप से शामिल होने वाली सेवाएं इस प्रकार हैं:- परिवहन, कूरियर, सूचना क्षेत्र की सेवाएं, प्रतिभूतियां, रियल एस्टेट,होटल एवं रेस्टोरेंट, वैज्ञानिक और तकनीकी सेवाएं, अपशिष्ट प्रबंधन, स्वास्थ्य कल्याण और सामाजिक सहायता; तथा कला, और मनोरंजन सेवाएं इत्यादि आतीं है। यह क्षेत्र भारतीय सकल घरेलू उत्पाद में करीब 60 फीसदी का योगदान देता है। इसे अर्थव्यवस्था के तीसरे क्षेत्र (Tertiary sector) के रूप में भी जाना जाता है।
हर अर्थव्यवस्था के तीन क्षेत्र होते हैं। जो इस प्रकार हैं: प्राथमिक क्षेत्र (जैसे खनन, कृषि और मछली पालन), द्वितीयक क्षेत्र (निर्माण) और तृतीयक क्षेत्र (सेवा क्षेत्र)। विभिन्न देशों की
अर्थव्यवस्थाएं के विकास के ट्रेंड का अध्ययन करने के बाद पता चलता है कि जो देश विकास की राह पर आगे बढ़ते हैं उन देशों की अर्थव्यस्थाएँ कृषि क्षेत्र से हटकर सेवा क्षेत्र की तरफ बढती हैं अर्थात उन देशों की अर्थव्यवस्था में कृषि क्षेत्र का योगदान बढ़ता जाता है और कृषि का घटता जाता है, भारत में मामले में भी यही तथ्य देखने को मिला है I 1951 में भारत की अर्थव्यवस्था में कृषि का योगदान लगभग 51% जो कि वर्तमान में केवल 14% के लगभग है I
भारत के सेवा क्षेत्र ने हमेशा से ही देश की अर्थव्यवस्था में प्रमुख रूप से सेवा की है। सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) में इसका योगदान लगभग 60 फीसदी तक है। इस संबंध में वित्तीय सेवाओं के क्षेत्र का एक महत्वपूर्ण योगदान रहा है।
उदारीकरण व विनियमतीकरण करने तथा उद्योगों को बढावा देने के लिए भारत सरकार ने सुधारों की शुरुआत की है। इसमें कोई शक नहीं है कि वर्तमान में भारत दुनिया के सबसे आकर्षक वाले पूंजी बाजारों में से एक है। हालांकि चुनौतियां भी हैं, लेकिन क्षेत्र का भविष्य उज्जवल प्रतीत होता है। प्रौद्योगिकी के आने से उद्योग के विकास में भी सहायता मिली है।
बीमा, पर्यटन, बैंकिंग, खुदरा, शिक्षा, और सामाजिक सेवाएं आदि जैसे सेवा क्षेत्र में अर्थव्यवस्था के नरम (सॉफ्ट) हिस्से होते हैं। नरम -क्षेत्र (सॉफ्ट सेक्टर) के रोजगार में लोग उत्पादकता, प्रभावशीलता, प्रदर्शन में सुधार क्षमता और स्थिरता बनाने के लिए अपने समय का प्रयोग संपति बनाने, संपति एकत्र करने तथा प्रकिया विनीयोजन के लिए करते हैं। सेवा उद्योग में कारोबार के लिए सेवाओं के प्रावधान के साथ- साथ अंतिम उपभोक्ता भी शामिल रहते हैं। सेवाओं को उत्पादक से एक ग्राहक तक पहुंचने में परिवहन, वितरण और माल की बिक्री शामिल हो सकती है जो एक थोक और खुदरा व्यापार के रूप में भी हो सकती/सकता है, अथवा पेस्ट कंट्रोल या मनोरंजन के रूप में भी एक सेवा का प्रावधान शामिल हो सकता है। थोक और खुदरा बिक्री में सेवा, एक उपभोक्ता के लिए निर्माता से परिवहन, वितरण और माल की बिक्री में शामिल हो सकती है। माल को एक सेवा प्रदान करने की प्रक्रिया में तब्दील किया जा सकता है, जैसे- रेस्तरां उद्योग में या उपकरणों की मरम्मत में होता है। हालांकि, भौतिक वस्तुओं को बदलने की बजाय मुख्य लक्ष्य, लोगों का एक दूसरे के साथ बातचीत करना तथा ग्राहक की सेवा करना होता है।
बाजार का आकार
भारत में बैंकिंग परिसंपत्तियों का आकार वित्त वर्ष 13 में 1.8 खरब अमेरिकी डॉलर का था और वित्त वर्ष 2025 तक इसके 28.5 खरब अमेरिकी डॉलर तक पहुंचने की उम्मीद है।
पेंशन फंड नियामक एवं विकास प्राधिकरण (पीएफआरडीए) अधिनियम 2013 के पारित होने के बाद, भारत में पेंशन बिजनेस पर CII–EY की एक संयुक्त रिपोर्ट के अनुसार, वित्त वर्ष 2013 के दौरान भारत में बीमा क्षेत्र के कुल बाजार का आकार 66.4 बिलियन अमेरिकी डॉलर का था और 2020 तक इसके 350-400 बिलियन अमेरिकी डॉलर के आंकड़े को पार करने की उम्मीद है। वर्तमान में भारत का बीमा बाजार16% प्रतिवर्ष की दर से बढ़ रहा है I
आय और रोजगार में सेवाओं की हिस्सेदारी: 2014-15 में कुल सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) (2004-05 के साधन लागत पर) में सेवा क्षेत्र की हिस्सेदारी 1990-91 के 42.7 फीसदी के मुकाबले बढकर 60 फीसदी हो गई थी। हालांकि रोजगार के मामले में हिस्सेदारी सिर्फ लगभग 25% रही।
भारत में सेवा क्षेत्र:
1. आजादी के बाद से सकल घरेलू उत्पाद में सेवा क्षेत्र की हिस्सेदारी लगभग दोगुनी हो गई है।
2. वित्त, बीमा और रियल एस्टेट के बाद व्यापार, होटल, रेस्तरां आदि सकल घरेलू उत्पाद में अधिकतम फीसदी का योगदान देते हैं।
3. टेली डेनसिटी (घनत्व) जो दूरसंचार के प्रसार का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है, में मार्च 2007 के 18 फीसदी के मुकाबले दिसम्बर 2012 में 74% की फीसदी की वृद्धि हुई है।
4. सेवा क्षेत्र में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश के प्रवाह (निर्माण सहित शीर्ष पांच क्षेत्र) में 37. 6 फीसदी की तेज गिरावट आई जो कुल कि अब 6.4 बिलियन डॉलर के स्तर पर आ गया है ।
मजबूत बैंकिंग और बीमा क्षेत्र के बूते पर भारत आज विश्व की सबसे आकर्षक अर्थव्यवस्थाओं में से एक है। KPMG-CII की एक संयुक्त रिपोर्ट के अनुसार, 2020 तक भारत के विश्व भर में पांचवां सबसे बड़ा बैंकिंग क्षेत्र बनने का अनुमान है। रिपोर्ट में यह भी उम्मीद जताई गई है कि बैंक ऋण के बेहतर माध्यम से मध्यम अवधि में 17 फीसदी की चक्रवृद्धि वार्षिक वृद्धि दर (सीएजीआर) से बढ़ने की उम्मीद है। देश में जीवन बीमा कंपनियों के उद्योग संगठन, जीवन बीमा परिषद ने भी वित्तीय सेवा क्षेत्र के लिए अगले कुछ वर्षों में 12-15 फीसदी की सीएजीआर (CAGR)का अनुमान व्यक्त किया है।
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