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भारतीय वित्तीय प्रणाली के घटक

Last Updated: Jun 2, 2016, 17:22 IST

वित्तीय प्रणाली उस प्रणाली को कहते हैं जिसमें मुद्रा और वित्तीय परिसंपत्तियों का प्रवाह बचत करने वालों से निवेश करने वालों की तरफ होता है | वित्तीय प्रणाली के मुख्य घटक हैं : मुद्रा बाजार, पूंजी बाजार, विदेशी मुद्रा विनिमय बाजार, बैंक, सेबी और RBI हैं | ये वित्तीय घटक बचत कर्ता और निबेशकों के बीच एक कड़ी या मध्यस्थ का कार्य करते हैं |

भारतीय वित्तीय प्रणाली के घटक
भारतीय वित्तीय प्रणाली के घटक

वित्तीय प्रणाली से आशय संस्थाओं (institutions), घटकों (instruments) तथा बाजारों के एक सेट से हैI ये सभी एक साथ मिलकर अर्थव्यवस्था में बचतों को बढाकर उनके कुशलतम निवेश को बढ़ावा देते हैं I इस प्रकार ये सब मिलकर पूरी अर्थव्यवस्था में आर्थिक गतिविधियों को बढ़ाते है I इस प्रणाली में मुद्रा और वित्तीय परिसंपत्तियों का प्रवाह बचत करने वालों से निवेश करने वालों की तरफ होता हैI वित्तीय प्रणाली के मुख्य घटक हैं: मुद्रा बाजार, पूंजी बाजार, विदेशी मुद्रा विनिमय बाजार, बैंक, सेबी और RBI हैं I ये वित्तीय घटक बचत कर्ता और निबेशकों के बीच एक कड़ी या मध्यस्थ का कार्य करते हैं I

भारतीय वित्तीय प्रणाली को मुख्य रूप से दो भागों में बांटा जा सकता है I

  1. मुद्रा बाजार (अल्पकालिक ऋण)
  2. पूंजी बाजार (मध्यम और दीर्घकालिक ऋण)

भारतीय वित्तीय प्रणाली को इस प्रकार बर्गीकृत किया जा सकता है ...

Image Source:financeaccountingsimplified.com

वित्तीय प्रणाली का निर्माण वित्तीय संस्थानों द्वारा प्रदान किए गए उत्पादों और सेवाओं से हुआ है जिसमें बैंक, बीमा कंपनियां, पेंशन फंड, संगठित बाजार, और कई अन्य कंपनियां शामिल हैं जो आर्थिक लेनदेन की सुविधा प्रदान करती हैं। लगभग सभी आर्थिक लेनदेन एक या एक से अधिक वित्तीय संस्थानों द्वारा प्रभावित होते हैं। वे स्टॉक और बांड, जमाराशि पर ब्याज का भुगतान, उधार मांगने वालों और ऋण देने वालों को मिलाते हैं तथा आधुनिक अर्थव्यवस्था की भुगतान प्रणाली को बनाए रखते हैं।

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इस प्रकार के वित्तीय उत्पाद और सेवाएं किसी भी आधुनिक वित्तीय प्रणाली के निम्नलिखित मौलिक उद्देश्यों पर आधारित होती हैं:

  1. एक सुविधाजनक भुगतान प्रणाली की व्यवस्था
  2. मुद्रा को उसके समय का मूल्य दिया जाता है
  3. वित्तीय जोखिम को कम करने के लिए उत्पाद और सेवाओं को उपलब्ध कराती हैं या वांछनीय उद्देश्यों के लिए जोखिम लेने का साहस प्रदान करती हैं।
  4. एक वित्तीय बाजार के माध्यम से साधनों का अनुकूलतम आवंटन होता है साथ ही बाजार में आर्थिक उतार-चढ़ाव की समस्या से निजात मिलती है I

वित्तीय प्रणाली के घटक- एक वित्तीय प्रणाली का अर्थ उस प्रणाली से है जो निवेशकों और उधारकर्ताओं के बीच पैसे के हस्तांतरण को सक्षम बनाती है। एक वित्तीय प्रणाली को एक अंतरराष्ट्रीय, क्षेत्रीय या संगठनात्मक स्तर पर परिभाषित किया जा सकता है।  "वित्तीय प्रणाली" में "प्रणाली" शब्द एक जटिल समूह को संदर्भित करता है और अर्थव्यवस्था के अंदर संस्थानों, एजेंटों, प्रक्रियाओं, बाजारों, लेनदेन, दावों से नजदीकी रूप से जुडा होता है। वित्तीय प्रणाली के पांच घटक हैं, जिनका विवरण निम्नवत् है:

  1. वित्तीय संस्थान: यह निवेशकों और बचत कर्ताओं को मिलाकर वित्तीय प्रणाली को गतिमान बनाये रखते हैं। इस संस्थानों का मुख्य कार्य बचत कर्ताओं से मुद्रा इकठ्ठा करके उन निवेशकों को उधार देना है जो कि उस मुद्रा को बाजार में निवेश कर लाभ कमाना चाहते है अतः ये वित्तीय संस्थान उधार देने वालों और उधार लेने वालों के बीच मध्यस्थ की भूमिका निभाते हैं I इस संस्थानों के उदहारण हैं :- बैंक, गैर बैंकिंग वित्तीय संस्थान, स्वयं सहायता समूह, मर्चेंट बैंकर इत्यादि हैं I
  2. वित्तीय बाजार: एक वित्तीय बाजार को एक ऐसे बाजार के रुप में परिभाषित किया जा सकता है जहां वित्तीय परिसंपत्तियों का निर्माण या हस्तानान्तरण होता है। इस प्रकार के बाजार में मुद्रा को उधार देना या लेना और एक निश्चित अवधि के बाद उस ब्याज देना या लेना शामिल होता है I इस प्रकार के बाजार में विनिमय पत्र, एडहोक ट्रेज़री बिल्स, जमा प्रमाण पत्र, म्यूच्यूअल फण्ड और वाणिज्यिक पत्र इत्यादि लेन  देन  किया जाता है I वित्तीय बाजार के चार घटक हैं जिनका विवरण इस प्रकार है:
  1. मुद्रा बाज़ार: मुद्रा बाजार भारतीय वित्तीय प्रणाली का एक महत्वपूर्ण अंग है I यह सामान्यतः एक वर्ष से कम अवधि के फण्ड तथा ऐसी वित्तीय संपत्तियों, जो मुद्रा की नजदीकी स्थानापन्न है, के क्रय और विक्रय के लिए बाजार है I मुद्रा बाजार वह माध्यम है जिसके द्वारा रिज़र्व बैंक अर्थव्यवस्था में तरलता की मात्रा नियंत्रित करता है I

इस तरह के बाजारों में ज्यादातर सरकारी बैंकों और वित्तीय संस्थानों का दबदबा रहता है। इस बाजार में कम जोखिम वाले, अत्यधिक तरल, लघु अवधि के साधनों वित्तीय साधनों का लेन देन होता है।

  1. पूंजी बाजार: पूंजी बाजार को लंबी अवधि के वित्तपोषण के लिए बनाया गया है। इस बाजार में लेन-देन एक वर्ष से अधिक की अवधि के लिए किया जाता है।
  2. विदेशी मुद्रा विनिमय बाजार: विदेशी मुद्रा विनिमय बाजार बहु-मुद्रा आवश्यकताओं से संबंधित होता है। जहां पर मुद्राओं का विनिमय होता है। विनिमय दर पर निर्भरता, बाजार में हो रहे धन के हस्तांतरण पर निर्भर रहती है। यह दुनिया भर में सबसे अधिक विकसित और एकीकृत बाजारों में से एक है।
  3. ऋण बाजार (क्रेडिट मार्केट): क्रेडिट मार्केट एक ऐसा स्थान है जहां बैंक, वित्तीय संस्थान (FI) और गैर बैंक वित्तीय संस्थाएं NBFCs) कॉर्पोरेट और आम लोगों को लघु, मध्यम और लंबी अवधि के ऋण प्रदान किये जाते हैं।

निष्कर्ष: उपरोक्त विवेचन के आधार पर यह कहा जा सकता है कि एक वित्तीय प्रणाली उधारदाताओं और उधारकर्ताओं को अपने आपसी हितों के लिए एक दूसरे के साथ संवाद स्थापित करने के लिए एक मंच प्रदान करता है। इस संवाद का अंतिम फायदा मुनाफा पूंजी संचय (जो भारत जैसे विकासशील देशों के लिए बहुत जरूरी है जो धन की कमी की समस्या का सामना कर रहे हैं) और देश के आर्थिक विकास के रूप में सामने आता है।

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First Published: Jun 2, 2016, 17:22 IST

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