असम में कब-कब किसने संभाली सत्ता की कमान? यहां देखें पूरी सीएम लिस्ट
असम में 1950 से अब तक कई नेताओं ने सत्ता संभाली है। राज्य के पहले सीएम गोपीनाथ बोरदोलोई थे, जबकि तरुण गोगोई सबसे लंबे समय तक मुख्यमंत्री रहे। वर्तमान में हिमंत बिस्व सरमा नेतृत्व कर रहे हैं, बीच-बीच में राष्ट्रपति शासन भी लागू हुआ।
असम में 1950 से अब तक कई राजनीतिक बदलाव हुए। पहले मुख्यमंत्री गोपीनाथ बोरदोलोई (Gopinath Bordoloi) थे, जिन्होंने राज्य की नींव मजबूत की। सबसे लंबे समय तक मुख्यमंत्री तरुण गोगोई (Tarun Gogoi) रहे (2001–2016)। वर्तमान में हिमंत बिस्व सरमा (Himanta Biswa Sarma) राज्य का नेतृत्व कर रहे हैं, जो विकास और प्रशासनिक सुधारों पर जोर दे रहे हैं।
गोपीनाथ बोरदोलोई थे राज्य के पहले सीएम
असम राज्य के गठन के बाद 1950 से अब तक 17 मुख्यमंत्री रहे हैं, जो इसकी जटिल और उतार-चढ़ाव भरी राजनीति को दर्शाता है। पहले मुख्यमंत्री गोपीनाथ बोरदोलोई (Gopinath Bordoloi) ने विभाजन के बाद राज्य के एकीकरण और प्रशासन की नींव रखी।
कांग्रेस का प्रभुत्व और शुरुआती दौर
1950 से 1970 के दशक तक कांग्रेस का दबदबा रहा। बिष्णुराम मेधी और बिमला प्रसाद चालिहा जैसे नेताओं ने प्रशासन को स्थिर किया, जबकि भाषा आंदोलनों और सामाजिक असंतोष जैसी चुनौतियों का सामना किया।
असम के मुख्यमंत्री: 1950 से 2026 तक का सफर
असम में 1950 से 2026 तक कई मुख्यमंत्री रहे। पहले गोपीनाथ बारदोलोई थे, जबकि तरुण गोगोई सबसे लंबे समय तक रहे। वर्तमान में हिमंत बिस्वा सरमा राज्य का नेतृत्व कर रहे हैं।
| क्रम | नाम | कार्यकाल |
| 1 | गोपीनाथ बोरदोलोई | 26 जनवरी 1950 – 6 अगस्त 1950 |
| 2 | बिष्णुराम मेधी | 9 अगस्त 1950 – 28 दिसंबर 1957 |
| 3 | बिमला प्रसाद चालिहा | 28 दिसंबर 1957 – 7 नवंबर 1970 |
| 4 | महेंद्र मोहन चौधरी | 11 नवंबर 1970 – 30 जनवरी 1972 |
| 5 | सरत चंद्र सिन्हा | 31 जनवरी 1972 – 12 मार्च 1978 |
| 6 | गोलाप बोरबोरा | 12 मार्च 1978 – 4 सितंबर 1979 |
| 7 | जोगेन्द्र नाथ हजारिका | 9 सितंबर 1979 – 12 दिसंबर 1979 |
| - | राष्ट्रपति शासन | 12 दिसंबर 1979 – 6 दिसंबर 1980 |
| 8 | सैयदा अनवरा तैमूर | 6 दिसंबर 1980 – 30 जून 1981 |
| - | राष्ट्रपति शासन | 30 जून 1981 – 13 जनवरी 1982 |
| 9 | केशब चंद्र गोगोई | 13 जनवरी 1982 – 19 मार्च 1982 |
| - | राष्ट्रपति शासन | 19 मार्च 1982 – 27 फरवरी 1983 |
| 10 | हितेश्वर सैकिया | 27 फरवरी 1983 – 23 दिसंबर 1985 |
| 11 | प्रफुल्ल कुमार महंता | 24 दिसंबर 1985 – 28 नवंबर 1990 |
| - | राष्ट्रपति शासन | 28 नवंबर 1990 – 30 जून 1991 |
| 12 | हितेश्वर सैकिया | 30 जून 1991 – 22 अप्रैल 1996 |
| 13 | भूमिधर बर्मन | 22 अप्रैल 1996 – 14 मई 1996 |
| 14 | प्रफुल्ल कुमार महंता | 15 मई 1996 – 17 मई 2001 |
| 15 | तरुण गोगोई | 18 मई 2001 – 23 मई 2016 |
| 16 | सर्बानंद सोनोवाल | 24 मई 2016 – 10 मई 2021 |
| 17 | हिमंत बिस्वा सरमा | 10 मई 2021 – वर्तमान (2026) |
असम आंदोलन और राजनीतिक बदलाव
1979–80 के असम आंदोलन ने राजनीति में बड़ा बदलाव लाया। इसके परिणामस्वरूप असम गण परिषद (AGP) का उदय हुआ और प्रफुल्ल कुमार महंता (Prafulla Kumar Mahanta) जैसे क्षेत्रीय नेता सत्ता में आए। इस दौर में राष्ट्रपति शासन भी लागू हुआ।
स्थिरता, विकास और नए नेतृत्व का दौर
साल 2001 से 2016 तक तरुण गोगोई (Tarun Gogoi) ने सबसे लंबे समय (15 साल) तक शासन किया और आर्थिक विकास को बढ़ावा दिया। 2016 के बाद भाजपा का उदय हुआ, जहां सर्बानंद सोनोवाल और वर्तमान मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने विकास और सुरक्षा पर जोर दिया।
असम की एकमात्र महिला मुख्यमंत्री
असम की एकमात्र महिला मुख्यमंत्री सैयदा अनवरा तैमूर थीं। उन्होंने 1980 से 1981 तक संक्षिप्त कार्यकाल संभाला। वे भारत की पहली मुस्लिम महिला मुख्यमंत्री भी बनीं। उनका कार्यकाल राजनीतिक अस्थिरता के दौर में रहा, फिर भी उनका योगदान ऐतिहासिक माना जाता है।
प्रमुख योगदान
असम की राजनीति में कई महत्वपूर्ण योगदान देखने को मिले, बॉर्डोलोई ने जनजातीय अधिकारों की रक्षा की, चालीहा ने भाषा विवाद संभाले, और सरमा डिजिटल गवर्नेंस व बाढ़ प्रबंधन पर काम कर रहे हैं। अनवरा तैमूर (Anwara Taimur) जैसी नेता ने राज्य की राजनीति में विविधता को भी दर्शाया।
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