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जीव विज्ञान

General Knowledge for Competitive Exams

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पशुओं के प्रमुख रोग कौन-कौन से हैं?

Jul 18, 2016

गायों, भेड़ों और कभी-कभी मनुष्यों को प्रभावित करने वाला रोग ‘एंथ्रेक्स’ है | पालतू जानवरों के कुछ अन्य मुख्य रोग हैं, पोंकनी (Rinder Pest), स्तन की सूजन, निमोनिया, चेचक और तपेदिक आदि|  चूंकि ये जानवर बोल नहीं पाते हैं इस कारण से ये सभी रोग इनके लिए बहुत ही असाध्य होते हैं |

विज्ञानः जीवविज्ञान शब्दावली (सेट 2) पर प्रश्न और उत्तर

Jul 15, 2016

विज्ञानः जीवविज्ञान शब्दावली (सेट 2) में पोषण, पाचन, श्वसन आदि जैसी प्रक्रिया को समझने के लिए 10 बहुवैकल्पिक प्रश्न दिए गए हैं। ये प्रश्न आईएएस, पीएससी, एसएससी, रेलवे आदि जैसी प्रतियोगी परीक्षाओं में भी पूछे जाते हैं।

विज्ञानः जीवविज्ञान शब्दावली (सेट 1) पर प्रश्न और उत्तर

Jul 15, 2016

विज्ञानः जीवविज्ञान शब्दावली (सेट 1) में जैविक प्रक्रियाओं में इस्तेमाल किए जाने वाले विभिन्न शब्दों के विश्लेषण हेतु 10 वैकल्पिक प्रश्न दिए गए हैं। ये प्रश्न आईएएस, पीएससी, एसएससी, रेलवे आदि जैसी प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए महत्वपूर्ण हैं।

मानव शरीर में विभिन्न ग्रंथियां और हार्मोन्स

Jul 4, 2016

हमारे शरीर में कुछ विशेष ऊतक होते हैं जिन्हें अंतःस्रावी ग्रंथियां कहते हैं। ये ग्रंथियां रसायनिक पदार्थ स्रावित करती हैं जिन्हें हार्मोन्स कहा जाता है। ये हार्मोन जीवों और उनके विकास की गतिविधियों में समन्वय स्थापित करने में मदद करते हैं।

पुरुष प्रजनन प्रणाली

Jul 4, 2016

प्रजनन के लिए मनुष्य यौन रीति का प्रयोग करते हैं। मनुष्यों में प्रजनन प्रणाली एक निश्चित आयु में काम करना शुरु कर देती है, इसे यौवन कहते हैं। मनुष्य जैसी जटिल बहुकोशिकीय जीवों में शुक्राणु और अंडे बनाने, शुक्राणुओं और अंडों को निषेचन के लिए एक साथ लाने और शिशु के रूप में युग्मनज के विकास के लिए विशेष प्रजनन अंग होते हैं।

जैविक विज्ञान में आविष्कार और खोज की सूची

Jul 1, 2016

प्रधान भाग: समकालीन  समय  में कई कई विभिन्न खोजे और अविष्कार हुए जैसे  सेल बायोलॉजी , तंत्रिका विज्ञान और विकासवादी जीवविज्ञान जिससे  न केवल जीवन की गुणवत्ता में सुधार हुआ बल्कि जीवन प्रत्याशा भी बढ़ गई।

मनुष्य का उत्सर्जन तंत्र किस तरह से कार्य करता है?

May 10, 2016

किसी जीव के शरीर से विषाक्त अपशिष्ट (Toxic Wastes) को बाहर निकालने की प्रक्रिया उत्सर्जन (Excretion) कहलाती है। कार्बन डाईऑक्साइड और यूरिया मानव शरीर द्वारा उत्सर्जित किए जाने वाले प्रमुख अपशिष्ट है। वृक्क (kidney) मानव शरीर का मुख्य उत्सर्जक अंग है|

पौधों में परिसंचरण तंत्र की क्रियाविधि

Apr 26, 2016

पौधों में परिसंचरण तंत्र का अर्थ है-किसी पौधे के द्वारा अवशोषित या निर्मित पदार्थों का पौधे के अन्य सभी हिस्सों तक पहुंचाना। पौधों में जल और खनिजों को उसके अन्य हिस्सों में तक पहुंचाने की जरूरत पड़ती है। पौधों को पत्तियों में बने भोजन को भी पौधे के अन्य हिस्सों तक पहुंचाने की जरूरत पड़ती है। जाइलम और फ्लोएम पौधे के परिसंचरण तंत्र में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं|

पुष्पीय पौधों में लैंगिक प्रजनन

Apr 12, 2016

जनक पौधों द्वारा अपनी सेक्स कोशिकाओं या युग्मकों (Gametes) का प्रयोग कर नए पौधे को जन्म देने की क्रिया ‘लैंगिक प्रजनन’ कहलाती है| पादपों या पौधों में भी नर और मादा जनन अंग होते हैं। पौधों के ये जनन अंग पुष्पों और फलों के भीतर पाए जाने वाले बीजों में पाये जाते हैं। पुष्प  का नर अंग ‘पुंकेसर’ (Stamen) और मादा अंग ‘अंडप/कार्पेल’ (Carpel) कहलाता है।

जंतुओं में लैंगिक प्रजनन

Apr 8, 2016

माता–पिता द्वारा अपनी सेक्स कोशिकाओं या युग्मकों (Gametes) का प्रयोग कर नए जीव या संतान को जन्म देने की क्रिया ‘लैंगिक प्रजनन’ कहलाती है| मनुष्य, मछलियाँ, मेढ़क, बिल्लियाँ और कुत्ते-ये सभी लैंगिक प्रजनन द्वारा संतान को जन्म देते हैं।

पादपों में पोषण किस तरह से होता है?

Apr 7, 2016

पादप प्रकाश संश्लेषण की क्रिया द्वारा अपना भोजन स्वयं तैयार करते हैं, इसलिए उन्हें ‘स्वपोषी’ कहा जाता है| वे क्लोरोफिल की उपस्थिति में कार्बन डाइ ऑक्साइड, जल और सूर्य के प्रकाश के माध्यम से अपना भोजन निर्मित करते हैं| पादपों में पोषण समभोजी व विषमभोजी, दो तरह से होता है|

पुरुष प्रजनन प्रणाली

Apr 5, 2016

मानव प्रजनन की लैंगिक पद्धति का प्रयोग करते हैं। मानव एक निश्चित उम्र के बाद ही प्रजनन क्रिया को सम्पन्न कर सकने में सक्षम हो पाता है, इसे ‘यौवन’ (Puberty) कहते हैं। मानवों जैसे जटिल बहुकोशिकीय जीवों में शुक्राणु और अंडाणु के निर्माण, शुक्राणुओं एवं अंडाणु के निषेचन और शिशु के रूप में युग्मनज (Zygote) की वृद्धि और विकास के लिए विशेष प्रजनन अंग पाये जाते हैं।

जंतुओं में पोषण किस तरह से होता है?

Apr 4, 2016

भोजन को ग्रहण करना तथा उसका ऊर्जा प्राप्ति और शारीरिक वृद्धि व मरम्मत के लिए उपयोग करना ‘पोषण’ कहलाता है| वे पदार्थ जो जंतुओं की जैविक क्रियाओं के संचालन के लिए आवश्यक होते हैं, ‘पोषक पदार्थ’ कहलाते हैं| पोषण प्रणाली दो तरह की होती है: ‘स्वपोषी’ व ‘परपोषी’|जंतुओं में पोषण प्रणाली के पाँच चरण पाये जाते हैं|

कोशिका विभाजन: असूत्री, समसूत्री व अर्द्धसूत्री विभाजन

Mar 31, 2016

पुरानी कोशिका का विभाजित होकर नयी कोशिकाओं का निर्माण करना कोशिका विभाजन कहलाता है| कोशिका विभाजन को सर्वप्रथम 1955 ई. में विरचाऊ ने देखा था| कोशिकाओं का विभाजन तीन तरीकों- असूत्री (Amitosis ),समसूत्री (Mitosis) और अर्द्धसूत्री (Meiosis) से होता है|

पौधों में अलैंगिक प्रजनन क्या है और यह किन विधियों से होता है?

Mar 31, 2016

अलैंगिक प्रजनन ऐसी प्रक्रिया है, जिसमें नया जीव एकल जनक से बनता है और इसमें युग्मक या जनन कोशिकाओं की कोई भूमिका नहीं होती। कई एककोशिकीय और बहुकोशिकीय जीव अलैंगिक प्रजनन करते हैं। इस प्रक्रिया में, जनक जीव या तो विभाजित हो जाता है या फिर जनक जीव का एक हिस्सा नया जीव बनाने के लिए अलग हो जाता है। अलैंगिक प्रजनन छह प्रकार का होता है।

आनुवांशिकी मानव के वंशानुगत गुणों को कैसे परिभाषित करती है?

Mar 16, 2016

माता–पिता से पीढ़ी–दर–पीढ़ी आसानी से संचरित होने वाले मौलिक गुण ‘आनुवांशिक गुण’ कहलाते हैं और आनुवांशिक गुणों के संचरण की प्रक्रिया एवं उसके कारणों का अध्ययन को ‘आनुवांशिकी’ कहा जाता है। ग्रेगर जॉन मेंडल को ‘आनुवांशिकी का जनक’ कहा जाता है। उन्होंने अलगाव, प्रभुत्व और स्वतंत्र वर्गीकरण का सिद्धांत दिया, जो आनुवांशिकी के विज्ञान का मौलिक आधार बन गया।

पादप जगत का वर्गीकरण किस तरह से किया जाता है ?

Mar 14, 2016

वर्गिकी (Taxonomy) वर्गीकरण का विज्ञान है, जो जीवों की व्यापक विविधता के अध्ययन को आसान बनाता है और जीवों के विभिन्न समूहों के बीच अंतर्संबंधों को समझने में हमारी मदद करता है। पादप जगत में प्रथम स्तर का वर्गीकरण पादप शरीर के अंतर, परिवहन के लिए विशेष ऊतकों की उपस्थिति, बीज धारण करने की क्षमता और बीज के फलों के अंदर पाये जाने पर निर्भर करता है।

उद्विकास : अर्थ, प्रमाण और सिद्धान्त

Feb 17, 2016

प्रारम्भिक व आदिम जीवों में लाखों-करोड़ों वर्षों के दौरान क्रमिक रूप से कुछ ऐसे परिवर्तन आ जाते हैं कि प्रारम्भिक प्रजाति से अलग एक नयी प्रजाति उत्पन्न हो जाती है, इस प्रक्रिया को ही उद्विकास (Evolution) कहा जाता है | जीवों के संबंध में इसे ‘जैव उद्विकास’ का नाम दिया जाता है |

जीवों का पाँच जगत वर्गीकरण

Feb 4, 2016

अध्ययन की दृष्टि से जीवों को उनकी शारीरिक रचना,रूप व कार्य के आधार पर अलग-अलग वर्गों में बाँटा गया है | लीनियस को ‘आधुनिक वर्गीकरण प्रणाली का पिता’ कहा जाता है क्योंकि उनके द्वारा की गयी वर्गीकरण प्रणाली के आधार पर ही आधुनिक वर्गीकरण प्रणाली की नींव पड़ी है| जीवों का ये वर्गीकरण एक निश्चित पदानुक्रमिक दृष्टि से  किया जाता है |

कोशिका : संरचना एवं कार्य

Feb 3, 2016

कोशिका जीवों की संरचनात्मक एवं कार्यात्मक इकाई है, जिसकी खोज रॉबर्ट हुक ने 1665 ई. में की थी | एक ही कोशिका वाले जीवों, जैसे- जीवाणु, प्रोटोज़ोआ और यीस्ट्स, आदि को एककोशिकीय प्राणी (Unicellular Organisms) और एक से अधिक कोशिका वाले जटिल जीवों को बहुकोशिकीय जीव (Multicellular Organisms) कहा जाता है |

पादप व जंतु कोशिका का वर्गीकरण

Feb 2, 2016

कोशिका जीवन की सबसे छोटी कार्यात्मक व संरचनात्मक इकाई है, जिसके अध्ययन को ‘साइटोलॉजी (Cytology)’ कहा जाता है | किसी भी जीव, चाहे वह पादप हो या जंतु, के जीव  विज्ञान (Biology) को समझने के लिए कोशिका की संरचना व उसकी कार्यप्रणाली का अध्ययन आवश्यक है | पादप व जंतुओं की कोशिकाओं की संरचना अलग- अलग होती है, जो पादपों को जंतुओं से भिन्न करती है |

बायोतकनीक व बायोइन्फोर्मेटिक के क्षेत्र में भविष्य की तकनीक

Jul 20, 2011

जेनेटिक इंजीनियरिंग , सिंथेटिक जीवविज्ञान व सिंथेटिक जीनावली, कृत्रिम फोटो संश्लेषण, विट्रीफिकेशन, हाइबरनेशन या सस्पेंडेड एनीमेशन,स्टेम सेल चिकित्सा,पर्सनलाइज्ड दवाएं

भिन्न प्रकार के रोग एवं उनके लक्षण

Jul 20, 2011

भिन्न प्रकार के रोग एवं उनके लक्षण

बैक्टीरिया से होने वाले रोग
वायरस से होने वाले रोग

प्रमुख अंत: स्रावी ग्रंथियां एवं उनके कार्ये

विटामिन की कमी से होने वाले रोग

औषधियाँ

Jul 20, 2011

औषधियाँ रोगों के इलाज में काम आती हैं। प्रारंभ में औषधियाँ पेड़-पौधों, जीव जंतुओं से प्राप्त की जाती थीं, लेकिन जैसे-जैसे रसायन विज्ञान का विस्तार होता गया, नए-नए तत्वों की खोज हुई तथा उनसे नई-नई औषधियाँ कृत्रिम विधि से तैयार की गईं।

शरीर के तंत्र

Jul 20, 2011

इन अंगों के अलग अलग कार्य होते हैं लेकिन ये एक दूसरे से अलग होकर स्वतंत्र रूप से काम नहीं कर सकते हैं| ये मानव शरीर में एक दूसरे से संपर्क में रहते हैं और अपने काम जैसे शरीर में हार्मोन्स के उत्पादन को विनियमित करने, शरीर की रक्षा और गतिशीलता प्रदान करने, शरीर के तापमान को नियंत्रित करने आदि के लिए एक दूसरे पर निर्भर रहते हैं।

पोषण (Nutrition)

Jul 20, 2011

पादप अपने कार्बनिक खाद्यों के लिए (कार्बोहाइड्रेट, वसा, प्रोटीन और विटामिन) केवल वायुमंडल पर ही निर्भर नहीं रहते हैं, इसलिए इन्हें स्वपोषी (Autotrophs) कहते हैं। कुछ जीवाणु भी सौर ऊर्जा या रासायनिक ऊर्जा का इस्तेमाल कर अपना भोजन स्वयं बना लेते हैं। उन्हें क्रमश: फोटोऑटोट्रॉफ या कीमोऑटोट्रॉफ कहते हैं। दूसरी तरफ जीव, कवक और अधिकांश जीवाणु, अपना भोजन  निर्माण करने में सक्षम नहीं हैं और वे इसे वायुमंडल से प्राप्त करते हैं। ऐसे सभी जीवों को परपोषी (heterotroph) कहते हैं।

कोशिका (Cell)

Jul 20, 2011

1665 में सर्वप्रथम रॉबर्ट हुक ने कोशिका (Cell) का वर्णन किया था। दो जर्मन जीव वैज्ञानिकों - एम. श्लाइडन और टी. श्वान ने 1838-39 में कोशिका सिद्धान्त (Cell Theory) प्रतिपादित किया, जिसके अनुसार सभी जीवों का निर्माण कोशिकाओं से होता है।

जीवधारी : लक्षण एवं वर्गीकरण

Jul 20, 2011

जीव विज्ञान जीवधारियों का अध्ययन है, जिसमें सभी पादप और जीव-जंतु शामिल हैं। विज्ञान के रूप में जीव विज्ञान का अध्ययन अरस्तू के पौधों और पशुओं के  अध्ययन से शुरू हुआ, जिसकी वजह से उन्हें जीव विज्ञान का जनक कहा जाता हैै। लेकिन  बायोलॉजी शब्द का प्रथम बार प्रयोग फ्रांसीसी प्रकृति विज्ञानी जीन लैमार्क ने किया।

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