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जीव विज्ञान

General Knowledge for Competitive Exams

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मनुष्यों में नियंत्रण और समन्वय

Feb 15, 2017

मनुष्य में, नियंत्रण और समन्वय, तंत्रिका तंत्र (nervous system) और हार्मोनल प्रणाली (hormonal system) के माध्यम से होता है जिसे अंत: स्रावी प्रणाली (endocrine system) कहा जाता है। हमारे शरीर की पांच इंद्रियों, आंख, कान, नाक, जीभ और त्वचा को रिसेप्टर्स (receptors) कहते है। इसमें हम इन सभी नियंत्रणों के बारे में अध्ययन करेंगे|

दुनिया के पहले स्थिर अर्द्ध-सिंथेटिक (semi-synthetic) जीव की खोज

Feb 3, 2017

स्क्रिप्स अनुसंधान संस्था (TSRI) के वैज्ञानिकों ने पहली बार एक “अर्द्ध-सिंथेटिक जीव”, अर्थात् एक एकल कोशिकीय जीवाणु की खोज की है, जो औषधि या दवाओं और अन्य अनुप्रयोगों से संबंधित खोजों के लिए महत्वपूर्ण हो सकता है| इस लेख में हम “अर्द्ध-सिंथेटिक जीव” तथा डीएनए की संरचना एवं कार्यप्रणाली का विवरण दे रहे हैं|

मानव पाचन तंत्र: अंग, कार्य और कैसे यह काम करता है

Jan 24, 2017

मनुष्य में पोषण मानव पाचन तंत्र के माध्यम से होता है| इसमें आहार नली (alimentary canal) और उससे संबद्ध ग्रंथियां (glands) होती हैं| मनुष्य के पाचन तंत्र में पाए जाने वाले विभिन्न अंग इस क्रम में होते हैं– मुंह, ग्रासनली/ भोजननली (Oesophagus), पेट, छोटी आंत और बड़ी आंत | इस लेख में मनुष्य के भीतर पाए जाने वाले मानव पाचन तंत्र में शामिल विभिन्न चरणों, ग्रंथियों का अध्ययन करेंगे |

जैव विज्ञान: आविष्कार और खोज की सूची

Jan 20, 2017

समकालीन दुनिया में जीव विज्ञान के जबरदस्त विस्तार  जैसे कि सेल (cell) बायोलॉजी, तंत्रिका विज्ञान (Neuroscience) और विकासवादी ( Evolutionary) जीव विज्ञान से होने वाले विभिन्न आविष्कारों और खोजों से न केवल जीवन जीने की प्रक्रिया एवं गुणवत्ता में सुधार आया है बल्कि जीवन जीने की प्रत्याशा भी बढ़ी है। इस लेख में जैविक विज्ञान में आविष्कार और खोजों की पूरी सूची प्रदर्शित की गई है|

रक्त : संरचना और कार्य

Jan 20, 2017

रक्त लाल रंग का तरल पदार्थ होता है जो हमारे शरीर में संचारित होता है | यह लाल रंग का इसलिए होता है क्योंकि इसकी लाल कोशिकाओं में हीमोग्लोबिन नाम का लाल रंग पाया जाता है| इस आर्टिकल में रक्त, उसकी संरचना और कार्य के बारें मे अध्धयन करेंगे |

मानव परिसंचारण तंत्र / वाहिका तंत्र : संरचना, कार्य और तथ्य

Jan 18, 2017

मनुष्यों और अन्य पशुओं का परिसंचारण तंत्र अंगों का वह तंत्र होता है जो शरीर के भीतर सामग्रियों के परिवहन का जिम्मेदार होता है| इसमें हृदय, धमनियां, नसें, केशिकाएं और रक्त होते हैं | हृदय रक्त को बाहर की तरफ धक्का देने वाले पंप के रूप में काम करता है| धमनियां, नसें और केशिकाएं नली या ट्यूब की तरह काम करती हैं जिनसे होकर रक्त प्रवाहित होता है| मनुष्य के शरीर में तीन प्रकार की रक्त वाहिकाएं होती हैं– धमनियां, नसें और केशिकाएं | अब हम परिसंचारण प्रणाली के सभी अंगों को विस्तार से समझेंगे |

मेसेन्टरी: मानव शरीर का 79वां अंग

Jan 5, 2017

मानव शरीर एक जटिल संगठन है जिसके विभिन्न अंगों एवं उसके कार्यप्रणाली के संबंध में समय-समय पर वैज्ञानिकों द्वारा नए-नए खोज होते रहे हैं| इन खोजों के द्वारा हमें नई-नई बिमारियों एवं उससे बचने के उपाय की जानकारी मिलती है| हाल ही में एक आयरिश वैज्ञानिक ने मानव पाचन तंत्र में एक नए अंग “मेसेन्टरी” की खोज की है| इस लेख में हम इस नए अंग एवं मानव पाचन तंत्र के अन्य अंगों का संक्षिप्त विवरण दे रहे हैं|

कीट विज्ञान क्या होता है?

Nov 28, 2016

यह विज्ञान, जंतु विज्ञान या प्राणिविज्ञान का वह अंग है जिसके अंतर्गत कीटों अथवा षट्पादों का अध्ययन आता है। षट्पाद (षट्=छह, पाद=पैर) श्रेणी को ही कभी-कभी कीट की संज्ञा दी जाती हैं। जंतु जगत में 20 संघ है जिनमे आर्थोपोडा सबसे बड़ा है जिनका शरीर सिर, वृक्ष और उदर में विभक्त होता है | सामान्य तौर पर इस संघ के कीटों में तीन जोड़ा पैर और पंख पाये जाते हैं|

दुग्ध से सम्बन्धित तथ्य

Nov 28, 2016

भारत की 70% जनसंख्या ग्रामीण है तथा 53% लोग कृषि व्यवसाय से जुड़े हुए हैं। करीब 7 करोड़ कृषक परिवारों में प्रत्येक 2 ग्रामीण घरों में से 1 डेरी उद्योग से जुड़ा है। भारत पूरी दुनिया का सबसे बड़ा दुग्ध उत्पादक देश है|

मानव कंकाल तंत्रः संरचना, कार्य और बीमारियां

Nov 25, 2016

कंकाल तंत्र मानव शरीर को सख्त संरचना या रूपरेखा प्रदान करता है जो शरीर की रक्षा करता है। यह अस्थियों, उपास्थियों, शिरा (टेंडन) और स्नायु/ अस्थिरज्जु (लिगमेंट) जैसे संयोजी ऊतकों से बना है। इस लेख में हम इसकी संरचना, कार्य, अस्थियों के विकारों एवं विभिन्न प्रकार के जोड़ों के बारे में पढ़ेंगे।

फलों में पाये जाने वाले विभिन्न विटामिन्स तथा खनिज

Nov 3, 2016

फलों में विभिन्न प्रकार के विटामिन्स तथा खनिज प्रचुर मात्रा में पाये जाते हैं, जो कि स्वास्थ्य तथा बृद्धि के लिए आवश्यक होते हैं | संतुलित आहार की दृष्टि से प्रत्येक व्यक्ति को प्रतिदिन कम से कम 92 ग्राम फल खाना ही चाहिये | भारत में सर्वाधिक (22%) फलों का उत्पादन महाराष्ट्र में होता है |

फलों में पोषक तत्वों की कमी से होने वाले रोग

Sep 28, 2016

फलों में विभिन्न प्रकार के पोषक तत्व प्रचूर मात्रा में पाए जाते हैं, जो स्वास्थय तथा वृद्धि के लिए आवश्यक होते हैं| संतुलित आहार की दृष्टि से एक व्यक्ति को प्रतिदिन 92 ग्राम फल का सेवन करने की सलाह दी जाती है| वर्तमान समय में भारत फलों के उत्पादन के मामले में विश्व में दूसरे स्थान पर है| कई बार विभिन्न फलों में कई प्रकार के रोग लग जाते है जिसका प्रमुख कारण फलों में पोषक तत्वों की कमी होना है| इस लेख में हम विभिन्न फलों में पोषक तत्वों की कमी से होने वाले रोगों का विवरण दे रहे है जो विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं की दृष्टिकोण से बहुत उपयोगी है|

पशुओं के प्रमुख रोग कौन-कौन से हैं?

Jul 18, 2016

गायों, भेड़ों और कभी-कभी मनुष्यों को प्रभावित करने वाला रोग ‘एंथ्रेक्स’ है | पालतू जानवरों के कुछ अन्य मुख्य रोग हैं, पोंकनी (Rinder Pest), स्तन की सूजन, निमोनिया, चेचक और तपेदिक आदि|  चूंकि ये जानवर बोल नहीं पाते हैं इस कारण से ये सभी रोग इनके लिए बहुत ही असाध्य होते हैं |

मानव शरीर में विभिन्न ग्रंथियां और हार्मोन्स

Jul 4, 2016

हमारे शरीर में कुछ विशेष ऊतक होते हैं जिन्हें अंतःस्रावी ग्रंथियां कहते हैं। ये ग्रंथियां रसायनिक पदार्थ स्रावित करती हैं जिन्हें हार्मोन्स कहा जाता है। ये हार्मोन जीवों और उनके विकास की गतिविधियों में समन्वय स्थापित करने में मदद करते हैं।

पुरुष प्रजनन प्रणाली

Jul 4, 2016

प्रजनन के लिए मनुष्य यौन रीति का प्रयोग करते हैं। मनुष्यों में प्रजनन प्रणाली एक निश्चित आयु में काम करना शुरु कर देती है, इसे यौवन कहते हैं। मनुष्य जैसी जटिल बहुकोशिकीय जीवों में शुक्राणु और अंडे बनाने, शुक्राणुओं और अंडों को निषेचन के लिए एक साथ लाने और शिशु के रूप में युग्मनज के विकास के लिए विशेष प्रजनन अंग होते हैं।

जैविक विज्ञान में आविष्कार और खोज की सूची

Jul 1, 2016

प्रधान भाग: समकालीन  समय  में कई कई विभिन्न खोजे और अविष्कार हुए जैसे  सेल बायोलॉजी , तंत्रिका विज्ञान और विकासवादी जीवविज्ञान जिससे  न केवल जीवन की गुणवत्ता में सुधार हुआ बल्कि जीवन प्रत्याशा भी बढ़ गई।

मनुष्य का उत्सर्जन तंत्र किस तरह से कार्य करता है?

May 10, 2016

किसी जीव के शरीर से विषाक्त अपशिष्ट (Toxic Wastes) को बाहर निकालने की प्रक्रिया उत्सर्जन (Excretion) कहलाती है। कार्बन डाईऑक्साइड और यूरिया मानव शरीर द्वारा उत्सर्जित किए जाने वाले प्रमुख अपशिष्ट है। वृक्क (kidney) मानव शरीर का मुख्य उत्सर्जक अंग है|

पौधों में परिसंचरण तंत्र की क्रियाविधि

Apr 26, 2016

पौधों में परिसंचरण तंत्र का अर्थ है-किसी पौधे के द्वारा अवशोषित या निर्मित पदार्थों का पौधे के अन्य सभी हिस्सों तक पहुंचाना। पौधों में जल और खनिजों को उसके अन्य हिस्सों में तक पहुंचाने की जरूरत पड़ती है। पौधों को पत्तियों में बने भोजन को भी पौधे के अन्य हिस्सों तक पहुंचाने की जरूरत पड़ती है। जाइलम और फ्लोएम पौधे के परिसंचरण तंत्र में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं|

पुष्पीय पौधों में लैंगिक प्रजनन

Apr 12, 2016

जनक पौधों द्वारा अपनी सेक्स कोशिकाओं या युग्मकों (Gametes) का प्रयोग कर नए पौधे को जन्म देने की क्रिया ‘लैंगिक प्रजनन’ कहलाती है| पादपों या पौधों में भी नर और मादा जनन अंग होते हैं। पौधों के ये जनन अंग पुष्पों और फलों के भीतर पाए जाने वाले बीजों में पाये जाते हैं। पुष्प  का नर अंग ‘पुंकेसर’ (Stamen) और मादा अंग ‘अंडप/कार्पेल’ (Carpel) कहलाता है।

जंतुओं में लैंगिक प्रजनन

Apr 8, 2016

माता–पिता द्वारा अपनी सेक्स कोशिकाओं या युग्मकों (Gametes) का प्रयोग कर नए जीव या संतान को जन्म देने की क्रिया ‘लैंगिक प्रजनन’ कहलाती है| मनुष्य, मछलियाँ, मेढ़क, बिल्लियाँ और कुत्ते-ये सभी लैंगिक प्रजनन द्वारा संतान को जन्म देते हैं।

पादपों में पोषण किस तरह से होता है?

Apr 7, 2016

पादप प्रकाश संश्लेषण की क्रिया द्वारा अपना भोजन स्वयं तैयार करते हैं, इसलिए उन्हें ‘स्वपोषी’ कहा जाता है| वे क्लोरोफिल की उपस्थिति में कार्बन डाइ ऑक्साइड, जल और सूर्य के प्रकाश के माध्यम से अपना भोजन निर्मित करते हैं| पादपों में पोषण समभोजी व विषमभोजी, दो तरह से होता है|

पुरुष प्रजनन प्रणाली

Apr 5, 2016

मानव प्रजनन की लैंगिक पद्धति का प्रयोग करते हैं। मानव एक निश्चित उम्र के बाद ही प्रजनन क्रिया को सम्पन्न कर सकने में सक्षम हो पाता है, इसे ‘यौवन’ (Puberty) कहते हैं। मानवों जैसे जटिल बहुकोशिकीय जीवों में शुक्राणु और अंडाणु के निर्माण, शुक्राणुओं एवं अंडाणु के निषेचन और शिशु के रूप में युग्मनज (Zygote) की वृद्धि और विकास के लिए विशेष प्रजनन अंग पाये जाते हैं।

जंतुओं में पोषण किस तरह से होता है?

Apr 4, 2016

भोजन को ग्रहण करना तथा उसका ऊर्जा प्राप्ति और शारीरिक वृद्धि व मरम्मत के लिए उपयोग करना ‘पोषण’ कहलाता है| वे पदार्थ जो जंतुओं की जैविक क्रियाओं के संचालन के लिए आवश्यक होते हैं, ‘पोषक पदार्थ’ कहलाते हैं| पोषण प्रणाली दो तरह की होती है: ‘स्वपोषी’ व ‘परपोषी’|जंतुओं में पोषण प्रणाली के पाँच चरण पाये जाते हैं|

कोशिका विभाजन: असूत्री, समसूत्री व अर्द्धसूत्री विभाजन

Mar 31, 2016

पुरानी कोशिका का विभाजित होकर नयी कोशिकाओं का निर्माण करना कोशिका विभाजन कहलाता है| कोशिका विभाजन को सर्वप्रथम 1955 ई. में विरचाऊ ने देखा था| कोशिकाओं का विभाजन तीन तरीकों- असूत्री (Amitosis ),समसूत्री (Mitosis) और अर्द्धसूत्री (Meiosis) से होता है|

पौधों में अलैंगिक प्रजनन क्या है और यह किन विधियों से होता है?

Mar 31, 2016

अलैंगिक प्रजनन ऐसी प्रक्रिया है, जिसमें नया जीव एकल जनक से बनता है और इसमें युग्मक या जनन कोशिकाओं की कोई भूमिका नहीं होती। कई एककोशिकीय और बहुकोशिकीय जीव अलैंगिक प्रजनन करते हैं। इस प्रक्रिया में, जनक जीव या तो विभाजित हो जाता है या फिर जनक जीव का एक हिस्सा नया जीव बनाने के लिए अलग हो जाता है। अलैंगिक प्रजनन छह प्रकार का होता है।

आनुवांशिकी मानव के वंशानुगत गुणों को कैसे परिभाषित करती है?

Mar 16, 2016

माता–पिता से पीढ़ी–दर–पीढ़ी आसानी से संचरित होने वाले मौलिक गुण ‘आनुवांशिक गुण’ कहलाते हैं और आनुवांशिक गुणों के संचरण की प्रक्रिया एवं उसके कारणों का अध्ययन को ‘आनुवांशिकी’ कहा जाता है। ग्रेगर जॉन मेंडल को ‘आनुवांशिकी का जनक’ कहा जाता है। उन्होंने अलगाव, प्रभुत्व और स्वतंत्र वर्गीकरण का सिद्धांत दिया, जो आनुवांशिकी के विज्ञान का मौलिक आधार बन गया।

पादप जगत का वर्गीकरण किस तरह से किया जाता है ?

Mar 14, 2016

वर्गिकी (Taxonomy) वर्गीकरण का विज्ञान है, जो जीवों की व्यापक विविधता के अध्ययन को आसान बनाता है और जीवों के विभिन्न समूहों के बीच अंतर्संबंधों को समझने में हमारी मदद करता है। पादप जगत में प्रथम स्तर का वर्गीकरण पादप शरीर के अंतर, परिवहन के लिए विशेष ऊतकों की उपस्थिति, बीज धारण करने की क्षमता और बीज के फलों के अंदर पाये जाने पर निर्भर करता है।

उद्विकास : अर्थ, प्रमाण और सिद्धान्त

Feb 17, 2016

प्रारम्भिक व आदिम जीवों में लाखों-करोड़ों वर्षों के दौरान क्रमिक रूप से कुछ ऐसे परिवर्तन आ जाते हैं कि प्रारम्भिक प्रजाति से अलग एक नयी प्रजाति उत्पन्न हो जाती है, इस प्रक्रिया को ही उद्विकास (Evolution) कहा जाता है | जीवों के संबंध में इसे ‘जैव उद्विकास’ का नाम दिया जाता है |

जीवों का पाँच जगत वर्गीकरण

Feb 4, 2016

अध्ययन की दृष्टि से जीवों को उनकी शारीरिक रचना,रूप व कार्य के आधार पर अलग-अलग वर्गों में बाँटा गया है | लीनियस को ‘आधुनिक वर्गीकरण प्रणाली का पिता’ कहा जाता है क्योंकि उनके द्वारा की गयी वर्गीकरण प्रणाली के आधार पर ही आधुनिक वर्गीकरण प्रणाली की नींव पड़ी है| जीवों का ये वर्गीकरण एक निश्चित पदानुक्रमिक दृष्टि से  किया जाता है |

कोशिका : संरचना एवं कार्य

Feb 3, 2016

कोशिका जीवों की संरचनात्मक एवं कार्यात्मक इकाई है, जिसकी खोज रॉबर्ट हुक ने 1665 ई. में की थी | एक ही कोशिका वाले जीवों, जैसे- जीवाणु, प्रोटोज़ोआ और यीस्ट्स, आदि को एककोशिकीय प्राणी (Unicellular Organisms) और एक से अधिक कोशिका वाले जटिल जीवों को बहुकोशिकीय जीव (Multicellular Organisms) कहा जाता है |

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