भारत में 1833 से 1858 तक के सभी गवर्नर जनरल की पूरी लिस्ट, यहां देखें
भारत का इतिहास उठाकर देखें, तो हमें यहां ब्रिटिश शासन भी देखने को मिलता है। इस कड़ी में भारत में ब्रिटिश के गवर्नर रहे, जिन्होंने सत्ता को अपने हिसाब से चलाया। भारत में 1833 से गवर्नर जनरल का पद बना, जो कि 1858 तक रहा।
भारत की वर्तमान तस्वीर के पीछे इतिहास का काफी अहम योगदान रहा है। यहां अंग्रेजों ने करीब 200 सालों तक राज किया और समय-समय पर अपनी नीतियां बदलकर भारतीयों का शोषण किया। इस कड़ी में भारत में 1833 से लेकर 1858 तक अलग-अलग गवर्नर जनरल रहे, जिनके समय में भारत और भारत से जुड़ी प्रमुख घटनाएं देखने को मिली हैं।
इस लेख में हम भारत के गवर्नर जनरल की पूरी लिस्ट और उनके कार्यकाल में हुई प्रमुख घटनाओं के बारे में जानेंगे। यदि आप किसी प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी कर कर रहे हैं, तो यह लेख आपके लिए बहुत उपयोगी है।
1833 के चार्टर एक्ट से हुआ बदलाव
भारत में पहले बंगाल का गवर्नर हुआ करता था, जिसे बादे में 1773 के रेगुलेटिंग एक्ट के तहत बंगाल का गवर्नर जनरल कर दिया गया और ओडिसा और बिहार के इसके अधीन हो गए। बाद में 1833 का चार्टर एक्ट आया। इस एक्ट के तहत बंगाल के गवर्नर जनरल को Governor General of India कर दिया गया।
कौन था भारत का पहला गवर्नर जनरल
भारत के पहले गवर्नर जनरल की बात करें, तो वह विलियम बेंटिक थे। वह 1833 से लेकर 1835 तक इस पद पर बने रहे। आपको बता दें कि अंग्रेजी शिक्षा एक्ट,1835 उन्हीं के कार्यकाल में आया था।
भारत के दूसरे गवर्नर जनरल कौन थे
भारत के दूसरे गवर्नर जनरल लॉर्ड मेटकाफे थे। वह 1835 से लेकर 1836 तक इस पद पर रहे और उन्हें भारतीय प्रेस का मुक्तिदाता भी कहा जाता है।
भारतीय गवर्नरों की पूरी लिस्ट
यहां हमने भारत में 1833 से लेकर 1858 तक रहे सभी गवर्नरों की पूरी लिस्ट दी है। 1858 से यह पद वायसराय में परिवर्तित कर दिया गया था, क्योंकि 1857 में क्रांति हुई थी, जिसके बाद भारत में ब्रिटिश क्राउन का राज हो गया था।
| कार्यकाल | गवर्नर जनरल | कार्यकाल के दौरान हुई प्रमुख घटनाएं |
| 1833-1835 | लॉर्ड विलियम बेंटिक | भारत के प्रथम गवर्नर जनरल रहे, अंग्रेजी शिक्षा एक्ट (1835)। |
| 1835-1836 | लॉर्ड मेटकाफ | इन्हें 'भारतीय प्रेस का मुक्तिदाता' कहा जाता है। |
| 1836-1842 | लॉर्ड ऑकलैंड | प्रथम अफगान युद्ध इन्हीं के कार्यकाल में हुआ। |
| 1842-1844 | लॉर्ड एलेनबरो | इनके कार्यकाल में दास प्रथा का अंत होने के साथ सिंध का विलय हुआ। |
| 1844-1848 | लॉर्ड हार्डिंग प्रथम | प्रथम आंग्ल-सिख युद्ध इन्हीं के कार्यकाल में हुआ। |
| 1848-1856 | लॉर्ड डलहौजी | 'व्यपगत का सिद्धांत' (Doctrine of Lapse), पहली ट्रेन (1853) और डाक सेवा की शुरुआत इन्हीं के कार्यकाल में हुई। |
| 1856-1858 | लॉर्ड कैनिंग | 1857 का विद्रोह हुआ, जो कि बाद में कंपनी शासन के अंत का कारण बना। |
आजादी के बाद ये रहे भारत के गवर्नर जनरल
आजाद भारत के पहले गवर्नर जनरल लॉर्ड माउंटबेटन थे। दरअसल, वह 1947 में गवर्नर जनरल बन गए थे, जो कि देश आजाद होने तक इस पद पर रहे थे। वहीं, आजादी के बाद 1948 में सी. राजगोपालचारी आजाद भारत के पहल भारतीय गवर्नर जनरल रहे हैं। हालांकि, संविधान लागू होने के बाद यह पद खत्म कर दिया गया और डॉ. राजेंद्र प्रसाद देश के राष्ट्रपति बन गए।
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