EPCA ने दिल्ली-एनसीआर में स्वास्थ्य आपातकाल घोषित किया

Nov 1, 2019, 15:16 IST

EPCA के चेयरमैन भूरे लाल ने कहा है कि राजधानी दिल्ली में प्रदूषण का स्तर ‘बेहद गंभीर’ हो गया है जिसके चलते यह निर्णय लिया गया है.

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पर्यावरण प्रदूषण (रोकथाम व नियंत्रण) प्राधिकरण (EPCA) ने 01 नवंबर 2019 को दिल्ली-एनसीआर क्षेत्र में स्वास्थ्य आपातकाल घोषित कर दिया है. यह घोषणा दिल्ली-एनसीआर में बेहद खतरनाक स्तर तक पहुंच चुके प्रदूषण के स्तर को देखते हुए की गई है. EPCA ने घोषणा करते हुए कहा है कि आगामी 5 नवंबर तक दिल्ली, नोएडा, गाजियाबाद, गुरुग्राम, और ग्रेटर नोएडा में किसी भी प्रकार के निर्माण कार्य पर पूरी तरह प्रतिबन्ध लगा दिया गया है.

राजधानी दिल्ली में प्रदूषण का स्तर कई स्थानों पर 500 पॉइंट से भी ऊपर पहुंच गया है जिसके बाद सुप्रीम कोर्ट द्वारा गठित EPCA पैनल ने दिल्ली-एनसीआर में जन स्वास्थ्य आपातकाल घोषित कर दिया है. EPCA के चेयरमैन भूरे लाल ने कहा कि 01 नवंबर 2019 को प्रदूषण का स्तर ‘बेहद गंभीर’ हो गया है.

एयर क्वालिटी इंडेक्स

एयर क्वालिटी इंडेक्स (AQI) में पीएम-2.5 और पीएम-10 के स्तर को मापा जाता है. इसमें 0-50 के बीच 'अच्छा', 51-100 'संतोषजनक', 101-200 'हल्का नुकसानदायक', 201-300 'ख़राब', 301-400 'बेहद ख़राब' और 401-500 'गंभीर' माना जाता है. यदि AQI 500 से ऊपर हो तो उसे 'बेहद गंभीर-आपातकालीन’ श्रेणी में माना जाता है.

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मुख्य बिंदु

• EPCA ने निर्देश दिया है कि सभी कोयला और अन्य ईंधन आधारित उद्योग, जो प्राकृतिक गैस या कृषि-अवशेषों में स्थानांतरित नहीं हुए हैं, वे 5 नवंबर तक बंद रहेंगे. 
• इन औद्योगिक इकाइयों में फरीदाबाद, गुरुग्राम, गाजियाबाद, नोएडा, बहादुरगढ़, भिवाड़ी, ग्रेटर नोएडा, सोनीपत, पानीपत आदि के क्षेत्र शामिल हैं.
• EPCA के चेयरमैन भूरे लाल ने हरियाणा, उत्तर प्रदेश और दिल्ली के मुख्य सचिवों को पत्र लिखकर दिल्ली के वातावरण की स्थिति की जानकारी दी है.
• प्राधिकरण द्वारा सर्दियों के मौसम में पटाखों पर पाबंदी की घोषणा भी की गई है.
• प्लास्टिक और कचरा जलाने से लेकर धूल प्रदूषण तक, सभी मामलों पर नियंत्रण रखने के लिए भी कहा गया है.

पीएम-10 लेवल क्या होता है?

पर्टिकुलेट मैटर अथवा पीएम उन बेहद छोटे धूल और गैसीय कणों को कहा जाता है जिन्हें नग्न आँखों से नहीं देखा जा सकता. पीएम-10 उन कणों को कहा जाता है जो 10 माइक्रोमीटर व्यास के आकार के होते हैं. इन कणों में धूल, गैस, प्रदूषित कण और कई प्रकार के सूक्ष्म कण शामिल होते हैं. राजधानी दिल्ली में पीएम-10 के स्तर के बढ़ने का मुख्य कारण - धूल, पराली और कूड़ा जलाए जाने का धुआँ, पटाखे और वाहनों का प्रदूषण है. इन कणों के सांस द्वारा फेफड़ों में प्रवेश करने पर विभिन्न स्वास्थ्य समस्याएं हो सकती हैं जैसे आँख-नाक में जलन, सांस लेने में दिक्कत, सांस फूलना, खांसी, श्वसन संबंधित गंभीर रोग आदि.

Gorky Bakshi is a content writer with 9 years of experience in education in digital and print media. He is a post-graduate in Mass Communication
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